हर एक शख़्स में अन्ना दिखाई देता है

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युवा कवि त्रिपुरारि कुमार शर्मा ने यह कविता भेजी तो सोचा क्यों न आपसे साझा किया जाए- जानकी पुल.

जहाँ तलक भी ये मजमा दिखाई देता है
हर एक शख़्स में अन्ना दिखाई देता है

नहीं बुझेगी ये मशाल, जलती जाएगी
सभी की आँख में गुस्सा दिखाई देता है

अभी तो धुंध के बादल नहीं छंटे हैं सब
अभी तो राज़ पे’ परदा दिखाई देता है

किसे मालूम कि कानून की देवी है कहाँ
यहाँ तो जो भी है, अंधा दिखाई देता है

देखना ये है हुकूमत का हश्र क्या होगा
कि रंग-ए-चेहरा तो उड़ता दिखाई देता है

वो एक शख़्स जो फिरता था हाथ बंद किए
वो भ्रष्टाचार का पुतला दिखाई देता है

मेरी तकलीफ कभी तुम समझ नहीं सकते
तुम्हारी आँख में जाला दिखाई देता है

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10 COMMENTS

  1. मेरी तकलीफ कभी तुम समझ नहीं सकते
    तुम्हारी आँख में जाला दिखाई देता है

    बहुत खूब!

  2. बहुत अच्छी,सामायिक ग़ज़ल ! होनहार कवि को बधाई ! धन्यवाद इस प्रस्तुति के लिए !

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