कोई भी मुझे इंतज़ार के सिवा कुछ नहीं दे सकता

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पुलित्ज़र पुरस्कार विजेता पहली अश्वेत लेखिका ग्वेंडोलीन ब्रुक्स का जन्म 7 जून1917 को टोपेका, केन्सास, संयुक्त राज्य अमेरिका में हुआ. इस एफ्रो अमेरिकन लेखिका ने अश्वेत समाज के जीवन की लय को अपनी कविताओं में बखूबी सम्माहित किया है। उनकी कुछ कविताओं का सुन्दर अनुवाद किया है त्रिपुरारि कुमार शर्मा ने- मॉडरेटर 
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पागल औरत 
मैं कोई मई का गीत नहीं जाऊंगी 

मई-गीत को समलैंगिक होना चाहिए

मैं नवंबर का इंतज़ार करूंगी

और धूसर रंग का गीत गाऊंगी
मैं नवंबर का इंतज़ार करूंगी 

यह मेरे लिए सही समय है।

मैं ठंढे अंधेरे में बाहर जाऊंगी

और ज़ोर-ज़ोर से गाऊंगी
सभी छोटे लोग

मुझे घूरेंगे और कहेंगे—

"ये वही पागल औरत है

जो मई का गीत नहीं गाती।"
मेरे सपनों को नरक के बाद तक इंतज़ार करना होगा
छोटे से जार में 

मैं अपनी इच्छाओं के साथ

थोड़ा शहद और ब्रेड रखती हूँ

लेबल लगाती हूँ

ठीक से ढक्कन बंद करती हूँ

ताकि अच्छे से तैयार हो जाए

जब तक मैं नरक से वापस नहीं आ जाती।

मुझे बहुत भूख लगी है

मैं अधूरी हूँ

और कोई भी मुझे
इंतजार के सिवा कुछ नहीं दे सकता।

थोड़ी सी रोशनी में


मैं इस उम्मीद के साथ एकटक देखती हूँ

कि जब मेरे दिल से सारी बुराइयाँ ख़त्म हो जाएंगी

और मैं निश्चिंत हो जाऊंगी

कि वो सब जा चुकी हैं

मैं घर जाने के बारे में सोच सकती हूँ

तब तक मेरे शहद और ब्रेड का स्वाद वैसा ही रहेगा

पुरानी शुद्धता और प्रेम लिए।
एक आज़ाद आदमी 
इस छोटी सी ज़िंदगी से कौन तुम्हें दूर ले जा सकता है

एक कमरा या दो कमरे या तीन कमरों में

और शराब के बोतल के कॉर्क की तरह

तुम्हें चालाकी से निकालेगा।

कोई औरत नहीं
,

बीवी तो बिल्कुल भी नहीं।

तुम उसे घुमाने दो
, 

थोड़ी ख़ुशी दो

उछलने दो

एक दोस्त की तरह।

और यह घुमाव बहुत मुलायम होगा

जब तक कि कॉर्क निकल नहीं जाता।
एक औरत ईमानदारी से ऐसा सोचेगी 

अगर तुम हफ़्ते में सिर्फ़ एक दफा उसके घर का कॉल बेल बजाते हो। 
सच्चाई
...और अगर सूरज आता है 

तो उसका स्वागत कैसे करेंगे
?

क्या हम उसे डराएंगे नहीं
?

क्या हम उसे धमकाएंगे नहीं

ग्रहन की एक लम्बी अवधि के बाद
जिसमें हम उसके लिए रोए 

हमने प्रार्थनाएं की

बरसों तक रात-रात भर 

कि किसी दिन

झिलमिलाती सुबह में हमारी नींद खुले

और दरवाज़े पर उसकी दस्तक हो! 
क्या हम काँप नहीं जाएंगे? 

क्या हम उल्टे पाँव लौट नहीं जाएंगे

जहाँ हमारे पहचान की धुन्ध होगी
?
बहुत मीठा होता है, 

एक सुखद बेहोशी की ढंडक में सोना।
आंखों पर भारी अंधेरा लटकता रहता है।
रॉबर्ट फ्रॉस्ट
उनकी आंखों में रोशनी का एक टुकड़ा है
मुंह में लोहा
उनके भौंह बहुत ऊपर या बहुत नीचे नहीं हैं
वो शानदार हैं
, एक ही जगह खड़े
उनके लहू मैं कुछ चमकता है
उनमें कुछ ख़ास है।
एक पश्चातापी समझता है कि मैरी फिर आएगी 
(रेवरेंड थिओडोर रिचर्डसन के लिए) 
अगर मैरी आई, 

तो क्या उसे माफ़ कर दिया जाएगा

दूसरी माओं की तरह

और दूसरा मौक़ा दिया जाएगा

आज की तरह
?
वो अपना सिर हिला नहीं पाएगी 

और ये जगह नहीं छोड़ेगी

लेकिन एक ख़ूबसूरत घास पर

अपना बच्चा रख देगी
मैरी पुरुषों को सज़ा नहीं देगी 

अगर वो फिर आई।
हम बिंदास लोग 
गोल्डन शॉवेल पर सात पूल खिलाड़ी।
हम सच में बिंदास हैं। 

हम स्कूल से भाग जाते हैं

हम देर से छुपते-छुपाते हैं

हम पाप गुनगुनाते हैं

हम दुबले-पतले

हम जैज जून

हम जल्द ही मर जाते हैं।
मेयर हेरोल्ड वाशिंगटन
मेयर,
एक वैश्विक-ऐतिहासिक आदमी।
सीढ़ियों के पार
,
आपकी आहट सुनाई पड़ती है।
आपको कभी नहीं भुलाया जा सकता है।

हम अपनी सेहत के साथ
समझौते की उम्र में प्रवेश करते हैं।
यह हमारा सबसे बड़ा साहस है। 
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