तीसरा शैलप्रिया स्मृति सम्मान अनीता रश्मि को

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पिछले साल शैलप्रिया स्मृति सम्मान लेखिका नीलेश रघुवंशी को दिया गया था. इस बार अनीता रश्मि को देने का निर्णय किया गया है. यह सम्मान अलग ढंग का सम्मान है जो लेखिकाओं को हर साल सम्मानित करता है. शैलप्रिया जी स्वयं बहुत संवेदनशील लेखिका थी. यह सम्मान उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि है- मॉडरेटर  
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तृतीय शैलप्रिया स्मृति सम्मान (वर्ष 2015) झारखंड की ख्यात लेखिका अनिता रश्मि को प्रदान किया जाएगा। शैलप्रिया स्मृति सम्मान के निर्णायक मंडल के सदस्यों डॉ रविभूषण, महादेव टोप्पो और प्रियदर्शन ने यह निर्णय सर्वसम्मति से लिया है। झारखंड की अनिता रश्मि पिछले चार दशकों से लगातार रचनारत हैं। हिंदी के शोर-शराबे से दूर खामोशी से काम कर रही अनिता रश्मि लगातार राष्ट्रीय स्तर की पत्रिकाओं में प्रकाशित होती रही हैं। ‘हंस’, नया ज्ञानोदय’, ‘कथाक्रम’, ‘युद्धरत आम आदमी’ और जनसत्ता’ सहित कई पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित उनकी  कहानियां अपने परिवेश को लेकर संवेदनशील हैं और अपने सामाजिक यथार्थ का सूक्ष्मता से अंकन करती हैं। अनिता रश्मि अपने लेखन में किसी विचारधारात्मक आग्रह से बंधी नहीं हैं, इसके बावजूद स्त्रियों, वंचितों और मामूली लोगों के प्रति गहरी संवेदना से लैस दिखाई पड़ती हैं। यह महत्त्वपूर्ण है कि हिंदी संसार को कई उपन्यास और कहानी संग्रह देने के बावजूद वे हिंदी की आलोचकीय मैत्रियों और यश:प्रार्थी चर्चाओं से दूर रही हैं। स्पष्ट है, लेखन उनके लिए यश की कामना से ज़्यादा अपनी अभिव्यक्ति का वह माध्यम रहा है जो उन तक बार-बार लौट कर आता है। अपने ही प्रदेश की एक प्रतिबद्ध लेखिका को यह सम्मान प्रदान करते हुए हमें हर्ष का अनुभव हो रहा है। 
विद्याभूषण
संयोजक, शैलप्रिया स्मृति न्यास,
रांची

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