याद आई प्रेम के एक न भूले जाने वाले उपन्यास ‘द डेविल इन द फ्लेश’ की

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ये जो कम उम्र का लड़का और बड़ी उम्र की लड़की के प्यार का फार्मूला है न वह इसी लेखक के उपन्यास से शुरू हुआ था. महज 20 साल की उम्र में फ्रेंच साहित्य में प्रेम का एक न भूला जाने वाला उपन्यास लिखकर मर जाने वाले इस लेखक का जीवन फ़िल्मी सा लगता है और उनके उपन्यास पर एक मशहूर फिल्म भी बनी थी. उस फ्रेंच लेखक रेमंड रेडिग्वे ने लिखा है कि पहला प्रेम अक्सर साधारणता के आकर्षण से शुरु होता है और हमें असाधारणता की ओर ले जाता है. द डेविल इन द फ्लेशनामक फ्रेंच उपन्यास के लेखक रेमंड रेडिग्वे के अपने जीवन की दास्तान भी कम दिलचस्प नहीं है. 1923 में जब पहली नज़र में प्यार का यह उपन्यास प्रकाशित हुआ तो उस समय रेमंड केवल 20 साल के थे. जब उपन्यास की चर्चा शुरु हुई तो उसी साल टायफायड बुखार से उनके जीवन का अंत हो गया. 20 साल से भी कम की उम्र में लिखे गए इस उपन्यास की गणना विश्व के सर्वकालिक सर्वश्रेष्ठ प्रेम-उपन्यासों में की जाती है. आज अचानक यह उपन्यास अपने किताबों के बरसों से न देखे गए खजाने से झांकता दिख गया- मॉडरेटर
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उपन्यास की पृष्ठभूमि प्रथम विश्वयुद्ध के आखिरी दिनों की है. उपन्यास का कमसिन कथानायक पेरिस के स्टेशन पर मार्था नाम की स्त्री को रेलगाड़ी से उतारते हुए देखता है और जैसे सूरदास ने लिखा है नैन नैन मिली पड़ी ठगौरीउसी तरह पहली नज़र में ही सोलह साल के उस लड़के को उम्र में अपने से बड़ी महिला से प्यार हो जाता है. मार्था की सगाई हो चुकी है, शादी भी हो जाती है लेकिन उसका फौजी पति विश्वयुद्ध में लड़ने लाम पर चला जाता है. फ्रांको नाम के उस लड़के से दुबारा मिलकर नवविवाहिता मार्था के विरह की अग्नि भी कुछ ठंढी होती है लेकिन दोनों के प्यार की आग भड़क उठती है. उपन्यास में उनके उद्दाम प्रेम की कहानी है. १९ साल की युवती मार्था की नई-नई शादी हुई है और वह अपने नए होने वाले घर को सजाने संवारने के लिए अपने पति के लौटने की प्रतीक्षा कर रही होती है. ऐसे में उसकी मुलाक़ात फ्रांको नाम के लड़के यानी उपन्यास के कथावाचक और नायक से होती है. उसकी आँखों में भी कुछ सपने हैं. दोनों वास्तविकता की शोरोगुल से दूर अपने-अपने सपनों में खोये रहते हैं कि उनकी आपस में मुलाकात हो जाती है और उनके सपनों के पंख लग जाते हैं. दोनों को जिंदगी में पहली बार यह महसूस होता है कि उनको कुछ ऐसा हो गया है जो पहले कभी नहीं हुआ था. यही पहले प्यार का अहसास होता है, न उससे पहले कुछ वैसा अहसास होता है न ही उसके बाद कभी होता है. समाज की नैतिकताओं, मर्यादा आदि से उसका कोई संबंध नहीं होता है.
आत्मकथात्मक शैली में लिखा गया यह उपन्यास केवल प्रेम-वर्णनों के लिए ही नहीं जाना जाता है बल्कि स्त्री-पुरुष संबंधों में वर्चस्व, अधिकार, समर्पण जैसे भावों की अपने समय में नई व्याख्या के लिए भी याद किया जाता है. मार्था अपने किशोर प्रेमी के उद्दाम प्रेम के पूरी तरह वश में रहती है. वह अपने नए घर के लिये उसके पसंद के सामान खरीदती रहती है. यहाँ तक कि फ्रांको ही उसे बताता है कि घर में किस तरह का फर्नीचर खरीदना चाहिए, उसे किस तरह के कपड़े पहनने चाहिए. विवाहिता होने के बावजूद उसे ऐसा महसूस होता है जैसे जीवन में पहली बार उसे किसी ने इस तरह टूटकर सम्पूर्णता में प्यार किया हो. उस सच्चे प्यार की निशानी के तौर पर मार्था के पेट में फ्रांको का बच्चा पलने लगता है. इसमें कोई संदेह नहीं कि द डेविल इन द फ्लेशने उस दौर प्रेम को नए सन्दर्भ दिए, नए मायने दिए. मार्था के प्यार में फ्रांको १६-१७ की उम्र में सम्पूर्ण पुरुष बन गया और मार्था को पहली बार स्त्रीत्व का सुख मिला. मार्था के प्यार में पड़ने के बाद उपन्यास के किशोर कथानायक को यह बात समझ में आती है कि जीवन के मायने क्या होते हैं, किस तरह संसार केवल भावना के आधार पर संचालित नहीं होता. सांसारिकता तो अक्सर क्रूर बुद्धि का खेल होता है. पुरुष होने का सचमुच क्या अर्थ होता है?

बहरहाल, इस प्रेम-संबंध का वही हश्र होता है जो अक्सर इस तरह के प्रेम-संबंधों का होता है. उपन्यास में एक स्थान पर फ्रांको कहता है जबसे मैं इस बात को लेकर मुतमईन हो गया हूँ कि मैं उससे प्यार नहीं करता मैं उससे और भी अधिक प्यार करने लगा हूँ. प्यार कुछ पाने के लिए नहीं अक्सर कुछ खोने के लिए किया जाता है. सब कुछ खोकर एक कसक के साथ उम्र भर जीने के लिए. फ़्रांस में इस उपन्यास के प्रकाशन के साथ बवाल मच गया. कहा जाने लगा द डेविल इन द फ्लेशजैसा उपन्यास समाज में अनेक तरह की विकृतियों को जन्म देगा, किशोरों को गलत राह पर ले जायेगा. कहा गया कि उपन्यास में एक गौरवशाली युद्ध का मजाक उड़ाया गया है. लेकिन २० साल के किशोर द्वारा लिखे गए इस उपन्यास की साहसिक कथा ने आलोचकों का ध्यान भी अपनी ओर खींचा. एक आलोचक ने तो लिखा कि उपन्यास को पढकर यह कल्पना की जा सकती है कि अगर वयस्क होने के बाद भी यह लेखक लिखता रहता तो उसका लेखक कितना जानदार हुआ होता. खैर, उपन्यास के प्रकाशन के कुछ दिनों बाद ही रेमंड रेडिग्वे का देहांत हो गया. उसकी मृत्यु वैसे तो बीमारी से हुई थी लेकिन यह कहा जाने लगा कि अपनी प्रेमिका का बिछोह नहीं सह पाने के कारण ही उसकी मृत्यु हो गई. रेमंड रेडिग्वे को एक ऐसे लेखक के रूप में याद किया जाने लगा जो प्रेम के लिए न केवल जिया बल्कि उसने प्रेम के लिए अपनी जान भी दे दी. द डेविल इन द फ्लेशपहली नज़र के दुखांत प्रेम का ऐसा उपन्यास है जिसे मार्था और फ्रांको के सच्चे प्रेम के लिए हमेशा याद किया जायेगा.
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1 COMMENT

  1. अद्भुत ! क्या इस महँ पुस्तक की हिंदी संस्करण भी हुआ है ? प्रेम कहानिया तो बहुत पढ़ी है किन्तु ये तो कुछ ख़ास ही लग रहा है।

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