सुरेन्द्र मोहन पाठक क्यों हिंदी लोकप्रिय लेखन के शिखर हैं?

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जब मैं यह कहता हूँ कि सुरेन्द्र मोहन पाठक हिंदी के सबसे लोकप्रिय लेखक हैं तो उसका मतलब यह लिखना नहीं होता है कि वे हिंदी के सबसे अच्छे लेखक हैं, सबसे बड़े लेखक हैं? लेकिन यह जरूर होता है कि हिंदी में जो लोकप्रिय लेखन की धारा है वे संभवतः उसके सर्वकालिक सबसे बड़े लेखक हैं. यह कहने के के कई कारण हैं हैं, कई तर्क हैं. हम बरसों लुगदी लेखक कहकर सभी लोकप्रिय लेखकों को एक कैटेगरी में रखते आये हैं, सबको खारिज करते आये हैं. लेकिन जब से हिंदी में गद्य लेखन की परम्परा है तब से कुछ लेखक दूसरे कुछ लेखकों को कमतर बताते आये हैं ताकि खुद को या कुछ अन्य लेखकों को बेहतर कह सकें. बीसवीं शताब्दी के आरंभिक दशकों में सबसे लोकप्रिय लेखक पाण्डेय बेचन शर्मा ‘उग्र’ को उनकी कहानी ‘चॉकलेट’ के आधार पर घासलेटी साहित्य लेखक कहा गया.

हिंदी में लोकप्रिय लेखन की धारा में दो तरह के उपन्यास मूल रूप से लिखे गया- जासूसी और रोमांटिक. कुशवाहा कान्त, गुलशन नंदा, ओम प्रकाश शर्मा, कर्नल रंजीत, रानू, वेद प्रकाश कम्बोज, वेद प्रकाश शर्मा के साथ सुरेन्द्र मोहन पाठक को इसके अग्रगण्य लेखकों में माना जाता है. लेकिन पाठक जी ही शिखर लेखक हैं. इसका एक बड़ा कारण है उनकी निरंतरता. उनकी पहली कहानी 1959 में प्रकाशित हुई थी. आज 57 साल बाद तकरीबन 300 उपन्यासों को लिखने के बाद भी वे निरंतर नए-नए आइडियाज़ पर काम कर रहे हैं. यह सक्रियता सिर्फ कारोबार के कारण नहीं है बल्कि अपने अपने पाठकों के प्रति वह प्यार है जो उनको निरंतर सक्रिय बनाए हुए है. पटना ‘कलम’ के आयोजन में उन्होंने कहा था कि उनकी सबसे बड़ी खवाहिश यही है है वे जीवन के आखिर तक लिखते ही रहें. लोकप्रिय लेखन की धारा में इतना लम्बा करियर किसी और लेखक का नहीं हुआ. मेरे अपने विचार से और अपनी पसंद से गुलशन नंदा हिंदी लोकप्रिय लेखन के शिखर हो सकते थे लेकिन वे इस दुनिया से जल्दी चले गए. इसी तरह मेरे प्रिय ओमप्रकाश शर्मा भी जल्दी चले गए. बहरहाल, लगातार 60 साल तक लिखने वाला इस विधा में दूसरा कोई लेखक नहीं हुआ.

आज अगर साहित्यिक आयोजनों में, लिटरेचर फेस्टिवल्स में लोकप्रिय लेखक के बतौर अगर सुरेन्द्र मोहन पाठक पहली पसंद हैं तो इसके पीछे यही कारण है कि उनकी व्याप्ति बड़ी है. वे अकेले लेखक हैं जिनके प्रशंसक पुरानी और नई दोनों तरह की पीढ़ी में हैं और लगातार बढ़ रहे हैं. आज ऐप बेस्ड बाज़ार में डेलीहंट ऐप पर उनकी सबसे अधिक किताबें मौजूद हैं. इस ऐप से अधिकतर युवा अपने एंड्राएड फोन में किताब डाउनलोड करके पढ़ते हैं. यह बात कम लोग ही जानते हैं कि इस ऐप से भी सबसे अधिक उनकी किताब ही पढ़ी जा रही है. पिछले एक साल में उनकी सिर्फ डेलीहंट से 40 लाख की रोयल्टी मिली है जो अपने आप में यह बताती है कि उनकी लोकप्रियता कितनी है.  

सुरेन्द्र मोहन की व्याप्ति का एक बड़ा कारण यह भी है कि उन्होंने लगातार नए नए आइडियाज़ को लेकर रिसर्च किया है, उनको आधार बनाकर लेखन किया है और उनके उपन्यासों में कुछेक अपवादों को छोड़ दें तो अश्लीलता का पुट न के बराबर होता है. इस मायने में उनकी तुलना सिर्फ इब्ने सफी से की जा सकती है जिन्होंने उर्दू में अश्लीलता बिना मनोरंजन को ध्येय बनाकर ही जासूसी लेखन शुरू किया.

सुरेन्द्र मोहन पहले लेखक हैं जिन्होंने हिंदी की लोकप्रिय धारा के लेखन को ‘लुगदी’ के विशेषण से मुक्त करवाया. उनके उपन्यास हार्पर कॉलिन्स जैसा अंतर्राष्ट्रीय प्रकाशक छापता है. यह नसीब किसी और पौकेट बुक लेखक को नसीब नहीं हुआ.

इन्हीं कारणों से वे हिंदी में लोकप्रिय लेखन के शिखर की तरह लगते हैं. सबसे अच्छे नहीं, सबसे कामयाब नहीं, लेकिन शिखर लेखक. सुरेन्द्र मोहन पाठक एक फिनोमिना हैं, जिनके मुक़ाबिल कोई और लेखक नहीं लगता है.

वे पतनशील मानी जाने वाली विधा के एक अमर लेखक हैं! 
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4 COMMENTS

  1. There was more flow in the writing of Ibne Safi. When He wrote no one,not even Pathak, was close to him .Ibne Safi was just mesmerising.

  2. Prabhat sir..Nicely written piece…Just I Hv a curiosity..what kind of values are being developed in the readers by the wrtitings of Surendra Mohan Pathak sir?

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