दुनिया के पहले डोर टू डोर कवि के बारे में

कविता की होम डिलीवरी करने वाला कवि

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आज ‘दैनिक हिन्दुस्तान’ अखबार में महेंद्र राजा जैन का लिखा एक दिलचस्प लेख पढ़ा. लेख रोवान मेकाबे के बारे में था. वह कविताओं की होम डेलिवरी करता है. उसके बाद रोवान की वेबसाईट https://rowanthepoet.com पर गया. वह खुद को दुनिया का पहला door to door poet कहता है. अजनबी लोगों के घर जाकर उनको उनकी पसंद की कविता लिखकर सुनाना. सोचिये कविता प्रधान भाषा हिंदी के कवि अगर ऐसा करने लगे तो क्या होगा? नीचे महेंद्र राजा जैन का दिलचस्प लेख पढ़िए-मॉडरेटर

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रोवान मेकाबे का नाम आपने शायद न सुना हो। यह वह कवि हैं, जो आपकी मांग के अनुसार किसी विषय पर कविता लिखते ही नहीं, बल्कि उसे आपके दरवाजे तक पहुंचाते भी हैं। इसी कारण बीबीसी ने उन्हें विश्व का पहला व संभवत: एकमात्र डोर-टु-डोर यानी दर-दर पहुंचने वाला कवि कहा है। पोयम फॉर यू (आपके लिए कविता) लिखा एक प्लेकार्ड लिए हुए रोवान लोगों के घर-घर पहुंचकर दरवाजे पर लगी घंटी बजाते हैं। दरवाजा खुलते ही पूछते हैं- क्या आप कविता प्रेमी हैं? क्या आप अपनी पसंद के किसी विषय पर कविता लिखवाना चाहेंगे?

कुछ लोग उन्हें पागल समझकर धड़ाम से दरवाजा बंद कर देते हैं, पर अधिकांश उन्हें आदरपूर्वक अंदर बुलाकर उनसे बात करते हैं, उनके बारे में पूछते हैं और उन्हें कविता लिखने के लिए विषय बतलाते हैं। कुछ दिनों बाद रोवान उनके घर के दरवाजे पर ही उनकी पसंद के विषय पर तैयार कविता सुनाते हैं। पिछले साल जून में ग्लास्टनबरी फेस्टिवल में आए लोगों को रोककर रोवान पूछते थे, ‘क्या आप कविताएं सुनना पसंद करेंगे?’

रोवान को अमूमन इंग्लैंड के शहर न्यूकासिल की सड़कों पर देखा जा सकता है। उनका दावा है कि शायद ही कोई विषय हो, जिस पर उन्होंने कविता न लिखी हो। अभी तक जितने भी लोगों से वह मिले हैं और जिनके विषय पर उन्होंने कविताएं लिखी हैं, सभी उनकी कविताएं सुनकर खुश हुए हैं। कुछ लोगों ने तो वे कविताएं अपने ड्रॉइंग रूम में भी टांग रखी हैं। एक लड़की पुलिस में भर्ती होने के लिए परीक्षा की तैयारी कर रही थी। उसकी इच्छा के अनुसार, उन्होंने ‘भावी पुलिस’ पर कविता लिख डाली। वह लोगों से उनके प्रिय विषय के संबंध में पूछते हैं, विषय चुनने का कारण पूछते हैं, और यह भी पूछते हैं कि वे किस प्रकार की कविता चाहते हैं, यानी गंभीर, हास्यास्पद, शृंगारिक, रोचक, वीभत्स, ट्रैजिक आदि? फिर एक-दो सप्ताह बाद उसे कविता सौंप जाते हैं। कुछ लोगों को उनकी लिखी कविताएं इतनी पसंद आती हैं कि वे उनकी अन्य कविताएं भी सुनना चाहते हैं।

पार्ट टाइम सेल्समैन व पार्ट टाइम पत्रकार 25 वर्षीय रोवान अपने परिवार के पहले व्यक्ति हैं, जो शिक्षा के लिए यूनिवर्सिटी तक पहुंचे। उनकी राय में कविता पढ़ी जा सकती है, किसी समारोह में सुनाई जा सकती है, दीवार पर टांगी जा सकती है। वह बच्चों के लिए कविता लेखन की वर्कशॉप भी चलाते हैं और छोटी-छोटी फिल्में भी बनाते हैं। उनकी कविताओं की लंबाई की कोई सीमा नहीं होती। विषय के अनुसार वे छोटी-बड़ी होती हैं।

रोवान ने जब दर-दर कविता लिखनी शुरू की, तो वह नहीं जानते थे कि लोग पसंद करेंगे या नहीं? किसी ने मना नहीं किया, पर सभी लोग पसंद भी नहीं करते। पहली बार एक वृद्ध महिला ने दरवाजा खोला, तो उन्हें घर-घर जाकर सामान बेचने वाला समझते हुए पूछा कि वह क्या बेचते हैं? जब उन्होंने कहा कि उनकी कविताएं नि:शुल्क हैं, तो उसने तुरंत दरवाजा बंद कर दिया। एक प्रौढ़ ने उनकी बात बीच में ही काटकर उन्हें अपनी तलाकशुदा पत्नी का पता देकर कहा कि वह जरूर उनकी कविता पसंद करेगी। कुछ लोग उन्हें अपने जीवन की कहानी सुनाने लगते हैं और फिर रोवान उनमें से किसी घटना-विशेष पर कविता लिखते हैं। एक गर्भवती महिला ने कहा कि उसके दो लड़के हैं। वह नहीं जानती कि उन्हें किस प्रकार से पाल-पोसकर बड़ा करे कि वे लड़कियों के प्रति होने वाले अन्याय व पक्षपात को खत्म कर सकें? बातचीत के बाद उन्हें कविता लिखने की प्रेरणा मिली कि वह किस प्रकार का पिता बनना चाहेंगे?

एक बार वह एक इमाम के घर पहुंचे। इमाम ने बहुत व्यस्त होने की बात कहकर उन्हें दूसरे दिन नमाज के वक्त बुलाया। इसके पहले रोवान कभी किसी मस्जिद में नहीं गए थे। नमाज के बाद इमाम ने उनसे काफी देर तक बात की, इस्लाम के संबंध में बताया व मुसलमानों के रहन-सहन, तौर-तरीकों के बारे में भी कहा। मुसलमानों के संबंध में उनकी कुछ गलतफहमियां दूर हुईं। उन्हें पता चला कि इस्लाम और अरबी कविता का करीबी रिश्ता है। कभी मक्का में कविता प्रतियोगिताएं हुआ करती थीं। बाद में उन्होंने जो कविता लिखी, वह इमाम को इतनी पसंद आई कि अगले दिन मस्जिद में लोगों को सुनाई गई।

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