‘लखनऊ बॉय’ विनोद मेहता का स्मरणMarch 10, 20151 mins1विनोद मेहता का जाना पत्रकारिता के एक मजबूत स्तम्भ का ढह जाना है. उस स्तम्भ का जिसके… continue Reading..
उमाशंकर चौधरी की कविताएंMarch 9, 20151 mins4उमा शंकर चैधरी की कविताएंः- उमाशंकर चौधरी की कविताओं का अपना स्वर है जो समकालीन कविता में… continue Reading..
एक बड़े आदर्श का यथार्थवादी अंत?March 5, 20151 mins4देश जिसे अपने आदर्श की तरह अपनाने के लिए तैयार था वह तो कमबख्त हिंदी कहानियों के… continue Reading..
क्या हिन्दी में भी कोई ‘चेतन भगत’ आ सकता है?March 3, 20151 mins219हाल में ही हिंदी में कुछ किताबें आई तो यह चर्चा शुरू हो गई कि हिंदी में… continue Reading..
भालचंद्र नेमाड़े को सुनते हुए ‘नाकोहस’ कहानी की यादMarch 2, 20151 mins760परसों की ही तो बात है. राजकमल प्रकाशन का स्थापना दिवस समारोह था, उसमें भालचंद्र नेमाड़े को… continue Reading..
क्या हिंदी प्रकाशन जगत में नए दौर की शुरुआत हो गई है?March 1, 20151 mins6कल की दोपहर बड़ी ख़ास थी. वसंत की दोपहरें आम तौर पर उदास करने वाली होती हैं.… continue Reading..