जलेस से कुछ सवालDecember 3, 20151 mins1मार्क्सवादी आलोचक अरुण माहेश्वरी ने जनवादी लेखक संघ को लेकर कुछ बहसतलब सवाल उठाये हैं. पढ़िए और… continue Reading..
‘पाप के दस्तावेज’ बनाम ‘पुण्य का साहित्य’December 2, 2015June 24, 20201 mins5 ‘कादम्बिनी’ पत्रिका के दिसंबर अंक में गंभीर साहित्य बनाम लोकप्रिय साहित्य पर मेरा लेख प्रकाशित हुआ है.… continue Reading..