‘बुल्ला की जाना मैं कौन’ से गूंजा पोएट्री फेस्टिवल का आखिरी दिन

दिल्ली पोएट्री फ़ेस्टिवल का समापन हो गया। उसकी यह रपट लिखी है संतोष कुमार ने-

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– दिल्ली पोएट्री फेस्टिवल के दूसरे दिन छिड़ा बातों और गानों का दौर
– पंजाबी से लेकर हरियाणवी में सुनी लोगों ने कविताएं
– महीप सिंह ने पेश किया कविता और कॉमेडी का कॉकटेल
– कविताओं की विरासत संभालने वालों को पहनाए गए तमगे

दिल्ली पोएट्री फेस्टिवल का आखिरी दिन रब्बी शेरगिल के गानों और बातों की गुनगुनी धूप के साथ खत्म हुआ. रब्बी ने जहां अपने गाए गानों से लोगों को झूमने पर मजबूर कर दिया वहीं उनकी बातों ने लोगों को समकालीन मसलों पर सोचने के लिए मजबूर कर दिया. रब्बी ने नई पीढ़ी को लेकर अपनी चिंता को भी सामने रखा. उनका कहना था कि जहां पहले कलाम और अदब की बातें होती थीं अब वह सब गुम सा हो गया है. लोग अलग ही तरह की दुनिया में जी रहे हैं.

हरियाणा की छोरी से उगा दूसरा दिन
दिल्ली पोएट्री फेस्टिवल का दूसरा दिन हरियाणा से आई एक युवा कवियत्री की कविता से शुरू हुआ. शीतल नाम की कवित्री ने हरियाणवी में कविताएं सुनाईं. उनकी कविताओं में महिलाओं की जितनी बुलंद आवाज़ सुनने को मिली उससे भी बुलंद उनका कविताएं सुनाने का अंदाज रहा. शीतल ने मंच पर आते ही ऐलान कर दिया कि मुझे अंग्रेजी नहीं आती, हिंदी भी कम आती है लेकिन हरियाणवी में मैं बखूबी कविताएं लिखती हूं. उनकी हरियाणवी कविताओं ने सुबह-सुबह कविताओं का लुत्फ लेने पहुंचाने अलसाए कविता प्रेमियों में जोश भर दिया.

बंटवारे की बात, कवियों का साथ
साहित्य की दूसरी विधाओं के साथ ही कविताओं में भी देश के बंटवारे का दर्द वक्त-वक्त पर बयां होता रहा है. पोएट्री फेस्टिवल के दूसरे दिन वरिष्ठ पत्रकार इकबाल अहमद की मशहूर कवित्री सुकृता पॉल कुमार और फेमिनिस्ट राइटर उर्वशी बुटालिया के साथ रोचक बातचीत ने लोगों को बांधे रखा. बंटवारे और उसके बाद महिलाओं के ऊपर हुए अत्याचार को लेकर सामाजिक संवेदना पर कई तरह के गंभीर सवाल उठाए गए. इकबाल अहमद दोनों ही महिला लेखिकाओं को बंटवारे से लेकर देश में हुए दंगे दर दंगे में महिलाओं पर हुए अत्याचारों की पड़ताल की.
बहु-पुरस्कृत अनुवादक, लेखक और साहित्यिक इतिहासकार डॉक्टर रक्षंदा जलील ने बंटवारे से जुड़ी गुलज़ार की कविताओं को पेश किया. रक्षंदा ने गुलजार की कविताओं का अंग्रेजी में अनुवाद किया है. उन्होंने उर्दू, हिंदी और अंग्रेजी के कविता पाठ से लोगों को गुलजार की कविताओं के अलहदा जायके से परिचित कराया.

कविता और कॉमेडी की जुगलबंदी
कविता के मंच पर महीप सिंह का परफॉर्मेंस कई मायनों में हासिल ए महफिल रहा. एक तरफ उन्होंने अपनी कविताएं सुनाईं तो दूसरी तरफ कवियों पर तीर भी चलाए. उन्होंने कविता से अपनी पहली मुलाकात का जिक्र करते हुए बताया कि स्कूल में अक्सर पूछा जाता कि बताओ कि कवि कविता में क्या कहना चाहता है, तो मुझे लिखता भाई जब उसे ही नहीं पता कि वह क्या कहना चाहता है तो हम क्या जानें. महीप ने बॉलीवुड और कविताओं के छत्तीस के आंकड़े पर भी चुटकी ली. उन्होंने कहा कि लोग बॉलिवुड के किसी भी गाने की पहली लाइन को अपनी शादी के वीडियो में फिट करवा लेते हैं फिर चाहें उस गाने की आगे की लाइनों का असर बिल्कुल ही उटपटांग हो. महीप का शो तालियों और ठहाकों से गूंजता रहा.

हीर है तो हिट है
इस बार का दिल्ली पोएट्री फेस्टिवल पंजाबी कवि वारिस शाह को समर्पित रहा. वारिस शाह की अमर रचना हीर-रांझा पर बातचीत और रेनी सिंह के हीर गायन ने लोगों को झूमने पर मजबूर कर दिया. बरसों पहले लिखे हीर काव्य के कई युगों से गुजर कर अब भी लोगों को बीच मशहूर है. हीर के महत्व और समय के दायरे से परे होने पर बातचीत करने के लिए मंच पर रेनी सिंह, सुकून सिंह, डॉक्टर विनीता सिंह और डॉली सिंह मौजूद रहीं. हीर का मजबूत किरदार अब भी किस तरह से महिलाओं को प्रोत्साहित कर रहा है यह वारिस शाह की रचना के भविष्यगामी होने के प्रामण पेश करती नजर आई.

कविता की विरासत संभालेंगे सुपर 24
दिल्ली पोएट्री फेस्टिवल में सिर्फ पुराने कवियों और शायरों पर ही नहीं बल्कि कविता की विरासत संभलाने वालों को भी प्रोत्साहित किया गया.  इस बार पोएट्री फेस्टिवल में बाल कवियों को सम्मानित किया गया. इनका चयन एक प्रतियोगिता के जरिए हुआ. इस प्रतियोगिया में दिल्ली-एनसीआर के 30 स्कूलों के 500 से ज्यादा बच्चों ने हिस्सा लिया. इनमें से 24 बच्चों को पुरस्कार के लिए चुना गया. इन बच्चों को दिल्ली पोएट्री फेस्टिवल रेक्स करमवीर अवॉर्ड एंड फेलोशिप से सम्मानित किया गया.

बह निकली कविता की धार
कविता का निर्बाध प्रवाह दिल्ली पोएट्री फेस्टिवल के मेरी आवाज़ सुनो सेशन में देखने को मिला. इस सेशन में देवी प्रसाद मिश्रा, अमर नाथ और सविता सिंह ने कविता पाठ किया. देवी प्रसाद के मुक्तक और छंदबद्ध कविताओं के पाठ में जम कर तालियां बजीं. अमर नाथ इंडिया हैबिटेट सेंटर के असिस्टेंट जनरल मैनेजर होने के साथ एक पर्यावरणविद भी हैं. उन्होंने मैं कूज से वापसी कर रहा हूं, जननी जन्मभूमि और मेरी विरासत जैसी कविताओं के जरिए लोगों तक यह संदेश पहुंचाया कि अपनी जमीन से जुड़ा रहना कितना जरूरी है. सविता सिंह ने अपनी कविताओं के जरिए महिला विमर्श के कई पहलुओं पर रौशनी डाली.

दिल्ली पोएट्री फेस्टविल में डॉक्टर अर्शिया सेठी ने सीनियर ब्यूरोक्रेट नवतेज सरना से उनकी किताब ज़फरनामा पर सार्थक बातचीत की. नवतेज सरना ने अपनी किताब के गलियारे से इतिहास के कई रोचक किस्से लोगों के बीच पेश किए.
पंजाब में सेवाएं दे चुके सीनियर ब्यूरोक्रेट रमेश इंदर सिंह की किताब ‘टर्मोयल इन पंजाबः बिफोर एंड आफ्टर ब्लू स्टार’ के जरिए पंजाब में दहशदगर्दी की पृष्ठभूमि पर सार्थक चर्चा हुई. चर्चा में मीडिया के महत्व पर जोर दिया गया.

बैंड-बाजा-बारात के साथ समापन
कविता और कवियों के सबसे बड़े सालाना समागम दिल्ली पोएट्री फेस्टिवल का समापन पूरे धूमधाम से हुआ. अगले साल आने का वादा करते हुए पोएट्री फेस्टिवल के आखिरी सेशन ‘पोएट्री इन पंजाबी वेडिंग सॉन्ग’ में राधिका सूद नायक और एमी सिंह ने समां बांधा. इस मौके पर राधिका सूद नायक ने घोरियां, सुहाग, सिथनियां और जागो पेश किए. तकरीबन 20 गानों की इस प्लेलिस्ट पर लोग जम कर झूमे.

दिल्ली पोएट्री फेस्टिवल के छठे सीजन के लिए फेस्टिवल फाउंडर डॉली सिंह और कार्यकारी प्रोड्यूसर संजय अरोड़ा ने अपने भागीदारों और प्रायोजकों को धन्यवाद ज्ञापित किया. इनमें शामिल हैं – हिंदी साहित्य अकादमी, ब्लूस्मार्ट मोबिलिटी, रेडएफएम, कुरेज़, याह्वी, ऑक्सफोर्ड बुकस्टोर्स, सच की आवाज़, ऑथरप्रेस, द सिख चैंबर ऑफ कॉमर्स, द गुड पोएट्री प्रोजेक्ट, बटरफ्लाई एंड द बी, निफ्टी ऑनलाइन, रेक्स कर्मवीर चक्र एंड ग्लोबल फेलोशिप और विक्की.
फेस्टिवल के समापन पर कार्यकारी प्रोड्यूसर संजय अरोड़ा ने कहा कि समाज में कवि ही उम्मीद की मशाल लेकर चलता है. इस वक्त सबसे जरूरी बात यही है. इस फेस्टिवल के माध्यम से भी हमारी यही कोशिश है कि उम्मीद की मशाल रौशऩ रहे.

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