Verifying that you are not a robot...

भोजपुरी कविता संग्रह की हिंदी समीक्षा

जलज कुमार ‘अनुपम’ के भोजपुरी कविता संग्रह पर पीयूष द्विवेदी भारत ने हिंदी में समीक्षा लिखी है- मॉडरेटर

=============================================

जलज कुमार ‘अनुपम’ का भोजपुरी कविता संग्रह ‘हमार पहचान’ की कविताओं के कथ्य का फलक ग्रामीण अंचल के विषयों और पारंपरिक जीवन-मूल्यों के पतन से लेकर राष्ट्रीय राजनीति के रंगों तक को समेटे हुए है। इन कविताओं की भाषा भोजपुरी है, जिसके विषय में कहा जाता है कि यह  महज एक भाषा नहीं, एक पूरे समाज और संस्कृति का प्रतिनिधित्व करती है। ये बात इस संग्रह की तमाम कविताओं को पढ़ते हुए महसूस की जा सकती है कि कैसे भोजपुरी के भाषाई तत्वों सहित उसके सामजिक-सांस्कृतिक तत्व भी इसमें जीवंत हो उठे हैं। उदाहरणार्थ संग्रह की कविता ‘पहचान’ की ये पंक्तियाँ देखिये, ‘बिरहा कजरी फगुआ चईता जेकर ध्रुपद करे बखान/ भिखारी महेंदर धरीछन बाबा/ कईलें आपन सब कुरबान/ हमनी हईं उहे पुरुबिया/ भोजपुरी आपन पहचान’ इन पंक्तियों में भोजपुरी समाज-संस्कृति की एक झाँकी प्रस्तुत करने का प्रयास स्पष्ट है। ऐसी कई कविताए इस संग्रह में मौजूद हैं, जिनमें भोजपुरिया समाज के विविध पक्षों का चित्रण हमें देखने को मिलता है।

‘गऊँवा सहरियात बा’ शीर्षक कविता उल्लेखनीय होगी जिसमें पतनशील जीवन-मूल्यों की कथा कही गयी है जिसकी कुछ पंक्तियाँ देखिए, ‘चाचा-चाची के, के पूछे/ माई-बाबू जी हावा में/ नइकी बहुरिया बाहर चलली/ लाज झंवाइल तावा में/ ससुर आ भसुर से केहू/ नाही तनिको लजात बा/ गंऊवा सहरियात बा’। हम देख सकते हैं कि इस कविता में कवि संभवतः भावनाओं के आवेग में न केवल सामान्यीकरण का शिकार हो जाता है, बल्कि कई बार पूर्वाग्रहग्रस्त और आधुनिकता विरोधी भी लगने लगता है। पारंपरिक जीवन-मूल्यों के समर्थन में आधुनिकता का एकदम से विरोध करने की ये प्रवृत्ति उचित नहीं कही जा सकती। कुछ ऐसा ही पूर्वाग्रह कवि की राजनीति विषयक कविताओं में भी दिखाई देता है। इस प्रकार की कविताएँ कई जगह राजनीतिक व्यवस्था की बजाय दल-विशेष का विरोध करती प्रतीत होती है। कोई भी रचना उस वक्त तक अपनी स्वाभाविक लय में रहती है, जबतक कि उसपर रचनाकार के वैचारिक पूर्वाग्रहों का प्रभाव नहीं पड़ता। जलज को इस बात का ध्यान रखना चाहिए।

जरूरी बा, देशवा हमार सूतल बा, चूड़ीहारिन, काथी लिखीं बुझात नईखे, करेज, भारत के संविधान हईं आदि संग्रह की अन्य उल्लेखनीय कविताएँ हैं।

पूर्वाग्रहों से इतर जलज की कविताओं का कथ्य तो भावपूर्ण है, मगर शिल्प के कच्चेपन के कारण ज्यादातर कविताएँ साधारण से अधिक प्रभाव नहीं छोड़तीं। शिल्प के प्रति असजगता के कारण बहुत-सी कविताओं में लय का अभाव भी नजर आता है। इसके अलावा बहुत-सी कविताओं के स्वरूप में एकरूपता का न होना भी खटकता है। ये कविताएँ शुरूआत में लयपूर्ण तुकांत स्वरूप में आरम्भ होकर अंत होते-होते अतुकांत हो जाती हैं। इन शिल्पगत समस्याओं के कारण मनोरम कथ्य के बावजूद भी संग्रह की ज्यादातर कविताओं में कोई विशेष मोहकता नहीं उत्पन्न हो पाती।

=========================

भावपूर्ण कथ्य की कच्ची प्रस्तुति

पुस्तकहमार पहचान (भोजपुरी कविता संग्रह)

रचनाकरजलज कुमारअनुपम

प्रकाशकहर्फ़ प्रकाशन, नई दिल्ली

मूल्य200 रूपये

पीयूष द्विवेदी

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

1 mins
WordPress Center Ankara Escort: Beypazarı Escort, Pursaklar Escort, Etimesgut Escort İstanbul Escort: Esenyurt Escort, Bahçelievler Escort, Maltepe Escort Bursa Escort: Gürsu Escort, Keles Escort, İznik Escort What are the best budget smartphones available in 2025? Reason Why Everyone Love Travel Doubts About Lifestyle You Should Clarify Fast Portfolio & Grid for Elementor WordPress Plugin Social Share for Elementor WordPress Plugin PDF Password Protect WooCommerce Advance Request A Quote | Product Enquiry WooCommerce Product Accordion Addon For Elementor WPBakery Page Builder Add-on – Image with Arrow PLUS Admin – WordPress White Label Branding Admin Visual Composer | Pricing Tables By NBGoyani WooCommerce Variations Table Gym Master – Gym Management System