Meritking Giriş: Meritking Spor BahisleriMarsbahis Giriş: Marsbahis Para Yatırma Ve Çekme İşlemleriMavibet Giriş: Mavibet Güvenilir Mi, Mavibet Bonus Ve KampanyalarMeritking Giriş: Meritking Güvenilir Mi, Meritking Bonus Ve KampanyalarMarsbahis Giriş: Marsbahis Giriş Adresi, Marsbahis Mobilden Giriş 2026Mavibet Giriş: Mavibet Spor Bahisleri, Mavibet Casino Ve Slot OyunlarıMeritking Giriş: Meritking Spor BahisleriMarsbahis Giriş: Marsbahis Para Yatırma Ve Çekme İşlemleriMavibet Giriş: Mavibet Güvenilir Mi, Mavibet Bonus Ve KampanyalarMeritking Giriş: Meritking Giriş Adresi, Meritking Casino Ve Slot OyunlarıMarsbahis Giriş: Marsbahis Güvenilir Mi, Marsbahis Spor BahisleriMavibet Giriş: Mavibet Para Yatırma Ve Çekme İşlemleriMeritking Giriş: Meritking Spor BahisleriMarsbahis Giriş: Marsbahis Para Yatırma Ve Çekme İşlemleriMavibet Giriş: Mavibet Güvenilir Mi, Mavibet Mobilden Giriş 2026Meritking Giriş: Meritking Para Yatırma Ve Çekme İşlemleriMarsbahis Giriş: Marsbahis Spor BahisleriMavibet Giriş: Mavibet Giriş Adresi, Mavibet Güvenilir MiMeritking Giriş: Meritking Giriş Adresi, Meritking Casino Ve Slot OyunlarıMarsbahis Giriş: Marsbahis Güvenilir Mi, Marsbahis Spor BahisleriMavibet Giriş: Mavibet Para Yatırma Ve Çekme İşlemleriMeritking Giriş: Meritking Spor Bahisleri, Meritking Casino Ve Slot OyunlarıMarsbahis Giriş: Marsbahis Para Yatırma Ve Çekme İşlemleriMavibet Giriş: Mavibet Güvenilir Mi, Mavibet Bonus Ve KampanyalarMeritking Giriş: Meritking Canlı Destek Ve İletişimMarsbahis Giriş: Marsbahis Casino Ve Slot OyunlarıMavibet Giriş: Mavibet Bonus Ve KampanyalarMeritking Giriş: Meritking Spor Bahisleri, Meritking Giriş AdresiMarsbahis Giriş: Marsbahis Para Yatırma Ve Çekme İşlemleriMavibet Giriş: Mavibet Güvenilir MiMeritking Giriş: Meritking Canlı Destek Ve İletişimMarsbahis Giriş: Marsbahis Casino Ve Slot Oyunları, Marsbahis Spor BahisleriMavibet Giriş: Mavibet Bonus Ve Kampanyalar, Mavibet Giriş AdresiMeritking Giriş: Meritking Güvenilir Mi, Meritking Bonus Ve KampanyalarMarsbahis Giriş: Marsbahis Giriş Adresi, Marsbahis Mobilden Giriş 2026Mavibet Giriş: Mavibet Spor BahisleriMeritking Giriş: Meritking Giriş Adresi, Meritking Mobilden Giriş 2026Marsbahis Giriş: Marsbahis Güvenilir Mi, Marsbahis Bonus Ve KampanyalarMavibet Giriş: Mavibet Para Yatırma Ve Çekme İşlemleriMeritking Giriş: Meritking Para Yatırma Ve Çekme İşlemleriMarsbahis Giriş: Marsbahis Spor Bahisleri, Marsbahis Casino Ve Slot OyunlarıMavibet Giriş: Mavibet Giriş Adresi, Mavibet Mobilden Giriş 2026Meritking Giriş: Meritking Canlı Destek Ve İletişimMarsbahis Giriş: Marsbahis Casino Ve Slot OyunlarıMavibet Giriş: Mavibet Bonus Ve KampanyalarMeritking Giriş: Meritking Giriş AdresiMarsbahis Giriş: Marsbahis Güvenilir MiMavibet Giriş: Mavibet Para Yatırma Ve Çekme İşlemleriMeritking Giriş: Meritking Güvenilir Mi, Meritking Giriş AdresiMarsbahis Giriş: Marsbahis Giriş Adresi, Marsbahis Bonus Ve KampanyalarMavibet Giriş: Mavibet Spor Bahisleri, Mavibet Casino Ve Slot OyunlarıMeritking Giriş: Meritking Spor Bahisleri, Meritking Casino Ve Slot OyunlarıMarsbahis Giriş: Marsbahis Para Yatırma Ve Çekme İşlemleriMavibet Giriş: Mavibet Güvenilir Mi, Mavibet Bonus Ve KampanyalarMeritking Giriş: Meritking Spor Bahisleri, Meritking Casino Ve Slot OyunlarıMarsbahis Giriş: Marsbahis Para Yatırma Ve Çekme İşlemleriMavibet Giriş: Mavibet Güvenilir Mi, Mavibet Bonus Ve KampanyalarMeritking Giriş: Meritking Güvenilir Mi, Meritking Bonus Ve KampanyalarMarsbahis Giriş: Marsbahis Giriş Adresi, Marsbahis Mobilden Giriş 2026Mavibet Giriş: Mavibet Spor BahislerikalitebetgrandpashabetholiganbetjojobetholiganbetholiganbetextrabetAntalya EscortTeosbetRoyalbetRoyalbet girişRoyalbetMavibetMavibet girişMavibetGalabetGalabet girişGalabetUltrabetAmgbahisAmgbahis girişAmgbahisBetboxBetbox girişArtemisbetArtemisbet girişArtemisbetRestbetRestbet girişRestbetSuperbetSuperbet girişSuperbetRoketbetRoketbet girişKingroyalKingroyal girişKingroyalcasibomcasibom girişcasibomMarsbahisMarsbahis girişMarsbahisTarafbetTarafbet girişDedebetDedebet girişRamadabetRamadabet girişPalazzobetPalazzobet girişFestwinFenomenbetBetwoonBetwoon girişMaxwinLunabetLunabet girişEgebetEgebet girişEgebetBetplayBetplay girişBetplayBetcioBetcio girişBetcioBetwildBetwild girişBetwildBetkolikBetkolik girişBetkolikMavibetMavibet girişMavibetTeosbetTeosbet girişTeosbetUltrabetUltrabet girişUltrabetBetboxBetbox girişBetboxRestbetRestbet girişRestbetSuperbetSuperbet girişSuperbetRoketbetRoketbet girişRoketbetMarsbahisMarsbahis girişMarsbahisTarafbetTarafbet girişTarafbetDedebetDedebet girişDedebetFestwinFestwin girişFestwinBetwoonBetwoon girişBetwoonRomabetRomabet girişRomabetBetwildBetwild girişBetwildMaxwinMaxwin girişMaxwinBetkolikBetkolik girişBetkolikteosbetkulisbetroketbetmaxwinalobetjokerbetgrandbettinggalabetegebetmavibetatlasbetultrabetbahiscasinobetrabetyapMaxwinMaxwin girişMaxwinBetpuanBetpuan girişBetpuanBetplayBetplay girişBetplayBetkolikBetkolik girişBetkolikAntalya Escort BayanAntalya Escort BayanMeritking Giriş: Meritking Spor Bahisleri, Meritking Casino Ve Slot OyunlarıMarsbahis Giriş: Marsbahis Para Yatırma Ve Çekme İşlemleriMavibet Giriş: Mavibet Güvenilir Mi, Mavibet Bonus Ve KampanyalarMavibetMavibet girişMavibetroketbetroketbet girişroketbetdedebetdedebet girişdedebetRamadabetRamadabet girişRamadabetPalazzobetPalazzobet girişPalazzobetFestwinFestwin girişFestwinTarafbetTarafbet girişTarafbetMaxwinMaxwin girişMaxwinbetkolikbetkolik girişbetkolikFenomenbetFenomenbet girişFenomenbetenjoybetenjoybet girişenjoybetBetwoonBetwoon girişBetwoonromabetromabet girişromabetLunabetLunabet girişLunabetTeosbetTeosbet girişTeosbetKulisbetKulisbet girişKulisbetRoketbetRoketbet girişRoketbetMaxwinMaxwin girişMaxwinAlobetAlobet girişAlobetJokerbetJokerbet girişJokerbetGrandbettingGrandbetting girişGrandbettingGalabetGalabet girişGalabetEgebetEgebet girişEgebetMavibetMavibet girişMavibetAtlasbetAtlasbet girişAtlasbetUltrabetUltrabet girişUltrabetBahiscasinoBahiscasino girişBahiscasinoBetraBetra girişBetraBetyapBetyap girişBetyapAntalya Escort BayanAntalya EscortAntalya EscortlarAntalya Escort

सोनी पाण्डेय की कहानी ‘सलम – बाई’

युवा लेखिकाओं में सोनी पाण्डेय का नाम जाना पहचाना है और यह उनकी एक चर्चित कहानी है- मॉडरेटर

==============================

यह कहानी स्त्रियों की अकथ प्रेम की पीर सी चुभती रही है।घूँघट की ओट से ताकती नवेली दुल्हनों के आँख में ओस की बूँद सी अटकी नैहर के प्रेम की पीर को देखना हो तो कभी दरवाजे से हाक लगा देखिए….माधोपुर वालीsss !देखो तो तुम्हारे गाँव का है फेरीवाला …..
वह बर्तन- तासन छोड़ कर भागेगी..,गुड़ भेली संग लोटा भर पानी सास से बिना पूछे पीला देगी ,न जात पूछेगी न पात । सास के अग्नि दृष्टि से चाहे जो भसम हो ,ये औरतें जीते जी एक ही राग गाएंगी कि…नइहर गंगा छूटत नाहीssss। जड़ से उखड़ी हुई औरतों को मैंने बार -बार सावन -भादों में नैहर में पनपते और छछनते ,कटते देखा है।यह कहानी उन्ही गलियों में मेरी वापसी है जहाँ पहली बार जाना था कि वर्णमाला के प से पतंग का मतलब र के मेल से प्रेम भी होता है।यह प्रेम हो तो सकता है पर फल -फूल -छछन-बिछन नहीं सकता मेरी गलियों में।एक लड़का कागज पर आई लव यू लिख कंकड़ में लपेट फेंक तो सकता है हमारे अहाते में पर नाम नहीं लिख सकता और हम प्रेम की गुनगुनी धूप में आलू के सूखे चुरूरमुरूर पापड़ से एठेते,सिंकते,तलते ,न जाने कब डिब्बा बन्द हो परदेश को निकाल दिए जाते हैं पता ही नहीं चलता।चिट्ठी हमारे प्रेम लोक का रहस्यमयी आवरण बन बार -बार गुदगुदाता है और अतित के पन्ने खोल जीने का पाठ पढ़ता रहता है कि कभी तो किसी ने हमसे भी प्रेम किया था।
यह कोई 1993 का साल रहा होगा,मैं इण्टर बोर्ड की परीक्षा दे चुकी थी।बी.ए. में दाखिला ले लिया था और बेमन से उन विषयों को पढ़ रही थी जिसे पढ़ने का मन नहीं था।विश्वविद्यालय में पढ़ने के सपने के टूटने के साथ सैकडों सपने मर गये थे उम्मीद के ।बस जीना था और बेमन से जीवन की चादर को सीना था ,लगी थी जैसे -तैसे।अबकी जाड़े  की छुट्टियों में गाँव में अम्मा संग रह रही थी,अम्मा कटिया -पिटिया देखती और मैं टोले भर की लड़कियों संग गीत शायरी पढ़ती-लिखती।तुकबंदी कर लेती थी ,कविता भी लिखने लगी थी।लड़कियों संग फिल्मी धुन पर खूब बियाह के गीत रचे जाते,लड़कियों को लड़के मौका मिलते आई लभ यू कह कर ऐसे निकलते जैसे पाकिस्तान की सीमा पर युद्ध फतह कर आए हों।कभी- कभी लड़कियों के जनरल डायर सरीखे पिता भाईयों से जम कर कुचम्मस के शिकार भी हो जाते पर प्रेम तो प्रेम था।पुरोहित जी के शब्दों में ऐसा भूत जो न लात से उतरता न बात से और न किसी ओझा सोखा से।अब समझ लिजिए की इन विकट परिस्थितियों में प्रेम को पाना और सजोना कितना मुश्किल होता है कि मेरी सखी माया को प्रेम हो गया।बेचारी को बुखार कम पेट दर्द ज्यादा होता,कारण सिर छू कर बुखार उतारने वाले देसी वैद्य पूरे टोले में भरे पड़े थे किन्तु पेट दर्द का सही -सही आकलन थोड़ा मुश्किल काम था।जब दर्द हिंग,फिटकरी,पेट मलने,नारा बैठाने,सेंकने से भी नहीं ठीक होता तो किसी का हांका भूत जरूर सिद्ध हो जाता और मजबूरी में पहले त्वरित लाभ के लिए डॉक्टर फिर ओझा सोखा को दिखाया जाता। एक शाम ऐसा ही दर्द, बड़ी बेदर्दी से मेरी सखी को उठा और वह तड़पर माछर माटा हुई जा रही थीं,
आही रे माई! ssss
माई रे माईssss
ए बुच्ची! लीजिए इ गरम पानी का बोतल और पेट सेंकिए ।मुँह दबा के तनी सोने का कोशिश करिए।इ कुल तो जवानी में लगा ही रहता है और आप हैं कि बुक्का फाड़ के गाँव भर को जना रहीं हैं कि आ गया है।अरे तनी भाई-बाप का भी लेहाज किया जाता है।चार बार आपके भईया पूछ गये कि बुचिया काहें चिल्ला रही है।
हे माधो पुर वाली! अपना मुँह बन्द करो।लड़की दरद से बेजार है और तुम हो गियान बघारने में लगी हो।माया की माता जी को बहू का यह ज्ञान बघारना बिल्कुल अच्छा नहीं लगा।वह तमतमा उठीं,बहूरानी भी कम न थीं, तमक उठीं ज्यों झासी की रानी,
काहें नहीं अम्मा जी…काहें न बोलें? हमको का है,चढ़ाइए कपार पर।आपे के काम आएगा,अरे हम लोग भी झेलते हैं,का मजाल की कोई उफ्फ सुन ले और इ हैं कि कपारे पर गाँव उठा लेती हैं।
सास ने हाथ जोड़ लिया,अच्छा अब चुप हो जाओ और जाओ रसोंई में सांझ हो रही है। जानती थीं जो बहू खुल गयी थो फटे ढ़ोल सी बजने लगेगी और इधर जवान बेटी के पेट में दर्द उठा था।
हं हं जाते हैं …जाते हैं…हमारी बात तो सबको कटहा कुकुर की भाउ़ भाउं है…ड़ण्डा ले खेदियालो।
                                     बहू बड़बड़ाती रसोंई में चली गयी, माया निखहरे खटिया पर पेट पकड़े रो रही थी।माँ ने सिर में चुरुआ भर कडुवा तेल डाल कर थाप लगाई और लाल मिर्चा ओंइछ कर दुवार पर जलाने चली गयी।अन्धेरा घिर आया था..माघ का महिना…जाड़ा अपने चरम पर।सबके आँगन -दुवार से चुल्हा और कउड़ा का धुँआ उठने लगा।माया की बेचैनी बढ़ रही थी,पलट कर देखा…भाभी खाना बनाने में लगी थी..आज अकेले काम करने से इतनी रूष्ट थी कि बीच -बीच में अपने दोनों बच्चों को धमधमा कर पीट देती और भनभनाती रहती।माया तीन भाईयों की अकेली बहन ,..थी तो तीनों से छोटी पर इण्टर पास करते पिता शादी की तलाश में चारों तरफ भटक रहे थे।बड़े भाई की शादी हो चुकी थी और वह दो बच्चों का पिता ,घर का एक मात्र सरकारी नौकरीवाला आदमी ।ठीक ठाक कमा लेता था और छुट्टियों में घर आता  ।पति की बेरूखी से बड़ी बहू का स्वभाव कर्कश हो गया था…कारण वह जितना शहर ले जाने को कहती वह अगली बार उतना लेट कर घर आता।सास समझदार औरत थीं..खूब समझती थीं बहू की ख्वाहिशें ,सो उसके भनभनाहट का कोई प्रतिउत्तर नहीं देतीं और अक्सर जब वह शुरू होती वह बाहर निकल जातीं।
                                          हमारी तरफ जवान बेटियों के पेट में दर्द के कई अर्थ होते थे उन दिनों…ज्यादा बढ़ा तो अर्थ का अनर्थ होते देर नहीं लगती थी। माया की माँ खासी चिन्तित चुपचाप जाकर सोहरा माई के मन्दिर में बैठ गयीं…”हे भगवती!  तुम जगत भवानी ,लड़की से कोई ऊँँच-नीच न हुई हो।”रोते हुए पिंडी पर कपार पटक कर आँचल फैला मनौती भी मांग लीं की नारियल ,चुनरी का प्रसाद चढ़ाएंगी जो लड़की इज्ज़त से अपने घर चली गयी। उनको लड़की की बीमारी से ज्यादा इज्ज़त की चिन्ता थी।उधर से चौके की बेवा अनारो फुआ गुजरीं,पूरे गाँव की खबरी,देखते आकर बगल में बैठ गयीं…का हो माधो बो! काहें मुँह थपुआ जइसन छितराए बैठी हो।जानती थीं कि लड़की के ब्याह की चिन्ता है।समझाने लगीं…देखो! अब लड़की है तो अभी तुम्हारी चावल ही,भात सिझने में अभी समय है।चिन्ता काहें करती हो।एतनी सुघ्घर लड़की का कहीं बियाह रूकता है।माया की माता जी के जान में जान आया…अनारो फुआ उड़यी चिरई के पीठ पर हरदी लगा आतीं थीं,लड़कियाँ उन्हें देखते रास्ता बदल लेती ।कारण जो कोई सजी-सवरींं दिख गयी ,तुरन्त ज्ञान की शीशी ऊढ़ेल देतीं।आप रूप भोजन पराय रूप सिंगार ही ठीक लगता है ए बहिनी,नाही त नाक छेदाता देर नहीं लगती।कहते वह बहुत अश्लील इशारा करतीं।मेरा खून उबल जाता।काहें हो फुआ…सिंगार काहें दूसरे के मन का?अपना मन कुछ नहीं होता है क्या?
वह लहर जातीं,जैसी विष से मादी नागिन।
कह लो बेटी कह लो,…देसी कुत्ती मरेठी बोल।तुम्हारी माँ भी बित्ता भर का जबान चलाती रही,तो तुम काहें कम रहोगी।व्यंग्य में ताली पीट कर कहतीं…जइसन खेती वइसन बीया,जइसन माई वइसन धीया।
मन में आता कि ले लाठी कुत्ते की तरह इस अपमान पर दुरदुरा दूँ,पर गाँव था…गाँव के नियम ,और वह सबके घर की लड़कियों की अघोषित संरक्षक ।
                                          खैर फुआ का चरित्र प्रमाण- पत्र पा माया की माँ ने एक बार फिर पिंडी पर जोर से कपार पटका और फुआ को लिया कर घर आईं।देखते माया कि सिट्टी -पिट्टी गुम।वह सबको गुमराह कर सकती थी ,फुआ की दिव्य दृष्टि को नहीं।वह भरपूर अभिनय करती रही।फुआ भी गच्चा खा गयीं।अन्त में दो मोटरसाईकिल से माया ,फुआ माया की माता जी और दो लड़कों संग अन्धेरा घिरते- घिरते माया ब्लॉक के अस्पताल में पहुँची।नाटक इतना प्रचंड था कि बिना अस्पताल के निवारण का रास्ता दिख ही नहीं रहि था।बेचारी माया अन्दर से भयभीत ,जैसे कम्पाउंडर दिखा फुआ हाथ पकड़ ले आईं,यहाँ अस्पताल के बेड पर कब्जा पहले होता था पर्ची बाद में कटती थी।कम्पाउंडर बीस से पच्चीस के बीच का बड़ा ही सुन्दर ,गबरू जवान लड़का था।पास के गाँव का।मृतक आश्रित में माँ की जगह नौकरी लगी थी।अभी मुश्किल से चार महीने हुआ था।फुआ उसे खींचे लिए बेड के पास आकर रूकीं…ए भईया ! बहिनी बड़ी दरद में है,कौनो सुई दवाई दे के ठीक करा।
लड़की पेट के बल लेटी थी।कम्पाउंडर ने नब्ज पकड़ी,लड़की ने धीरे से आह! कहा ,वह मुस्कुराया और कहते निकल गया …अभी ठीक हो जाएगा।वह गया और तुरन्त उलटे पैर लौटा।हाथ में इन्जेक्शन था ,लड़की चीखने लगी तो फुआ ने कस के हाथ पकड़ लिया और सुई लगवाया।इस पकड़ा -पकड़ी में ही इशारों में दोनों में कुछ बातें हो गयीं।रात भर माया अस्पताल में रही…कम्पाउंडर बार -बार आकर देख जाता।फुआ की दिव्य दृष्टि धीरे -धीरे खुल रही थी और माजरा समझने का प्रयास चल रहा था।सुबह लड़की के पेट का एक्सरे हुआ…उसने एकांत पा पूछा।बड़े निरमोही हैं,फट से सुई कोंच दिए।
लडका हँस पड़ा…अरे पगली उ बिटामिन का सुई था।अब एतना डरामा पर कुछ न कुछ तो करना ही पड़ेगा।एक्सरे में पेट में थोड़े बहुत कीड़े दिखे और दवा देकर डॉक्टर ने घर भेज दिया।
                             प्रेम आदमी को निर्भिक बना देता है,माया की महामाया बढ़ती गयी और वह हर पन्द्रह दिन पर ब्लॉक घूम आतीं।बिटामिन का सुई लगवा चंगी हो घर लौट आतीं।फुआ का पेट फुल रहा था।इधर माया की माता जी कउरू-कमक्षा सब पूज आयीं की बेटी का दर्द दूर हो जाए और दर्द था कि हर पन्द्रह दिन पर उमेठ देता । धीरे – धीरे माया रोगिहाइन घोषित होती गयीं,शादी इस आरोप पर कटते रहे और वह थीं कि कुसुम कली सी खिलती जा रहीं थीं।गर्मी के दिन थे,इस बरस खूब लगन पड़े थे।हर घर में एक न एक ब्याह होना तय था।माया भी की बी.ए. दूसरे साल में आ गयी थी और अभी तक कहीं बात नहीं बनी।हमारे घर भी बड़े पिताजी की लड़की की शादी थी और रिश्तेदारों से घर भरा पड़ा था।गाँवों में कुछ हो न हो,सुख -दुख सबके साझे होते हैं।एक शाम इधर हमारे घर ब्याह के गीत गाए जा रहे थे कि अचानक बगल के आँगन से माया का रूदन सुनायी दिया..सब काम छोड़कर लोग उधर भागे।बाबूजी चाचा को डाट रहे थे..कहा था पछिलिए बार की शहर ले आवो बढ़ियाँ डॉक्टर को दिखा देता हूँ तो तुम हो कि इन साले फर्जी डॉक्टरों के चक्कर में पड़े हो।
चाचा ने धीरे से कहा…भईया! उहो कुल सरकारी हैं।
पिताजी ने उच्च स्वर में कहा,साले जोगाड़ी हैं।
अनारो फुआ ने बचाव किया…एक बार फिर लाद -फाद कर माया ब्लॉक पर पहुँची,कम्पाउंडर मुस्कुराते हुए इन्जेक्शन लगा गया। वह आता और बेबात माया का हाथ पकड़ हाल -चाल ले जाता।अबकी साथ में माया की बड़ी भाभी और मेरी माता जी भी साथ गयीं थीं।मेरी माँ ने कम्पाउंडर के अच्छे व्यवहार को देखकर गाँव-घर सब पूछ डाला।लड़का बताता रहा,बातों से पता चला कि वह अभी कुँवारा है।माता जी की बांछे खिल गयीं।घर में अभी तीन लड़कियाँ कुँवारी थीं।अम्मा ने उसके जाते फुआ से कहा…ए जीजी! अपनी रानी के लिए कैसा रहेगा यह लड़का।माया के मुँह से सुनते चीख निकल गयी…अरे बाप रेssss।
का हुआ बच्ची?अम्मा ने पूछा…वह रोने लगी।किसी ने कम्पाउंडर को खबर दी और वह सुई लिए भागता हुआ आया।माया की भाभी को माजरा समझ आ रहा था।सब चुप लगाए बैठे थे।बगल के बेड पर लेटी एक वृद्धा ने फुआ से पूछा…का हुआ है लड़की को,कुछ ऊपर झापर बुझाता है।फुआ कुछ कहतीं उससे पहले माया की भाभी ने तमक कर जवाब दिया।ऊपर झापर ना हो आजी…बहुत भित्तर का रोग है इ…नाम सुनी हैं,”सलम – बाई”।
अम्मा ने अंभित हो पूछा..इ कौन बाई ह हो दुल्हनिया?
फुआ ने ताली पीट कर कहा….सनम की जब बाई चढ़ती है तो सलम – बाई होती है और पूरे घर को पाद पदा देती है भौजी।मुड़ी झोर कर माया की भाभी को दाद दिया…खूब चिन्ही माधोपुर वाली,इ “सलम – बाईये” है।
सोनी पाण्डेय

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

1 mins
WordPress Center Ankara Escort: Beypazarı Escort, Pursaklar Escort, Etimesgut Escort İstanbul Escort: Esenyurt Escort, Bahçelievler Escort, Maltepe Escort Bursa Escort: Gürsu Escort, Keles Escort, İznik Escort What are the best budget smartphones available in 2025? Reason Why Everyone Love Travel Doubts About Lifestyle You Should Clarify Appointment Buddy – Online Appointment Booking WP Plugin Bookly Multisite (Add-on) Wiloke FAQs Prite Elementor Addon Smart Photo Gallery – Responsive WordPress Plugin Responsive HTML5 Audio Player PRO WordPress Plugin Stripe Payment Add-on for BookPro Plugin Product Price Info For WooCommerce WooCommerce Order Status Per Product Smart NFT BEP/ERC-20 Custom token standard (Addons) Approve New User Registration WordPress & WooCommerce Plugin