चेखव की कहानी ‘मामूली मजाक’ श्री श्री की आवाज में

‘आधुनिक कहानियों के जनक’ कहे जाने वाले चेखव अपने ‘ ‘इम्प्रेशनिस्ट स्टाइल’ के लिए जाने जाते हैं। इसीलिए पाठक शीघ्र ही उनके कहानियों से संबंध स्थापित कर लेते हैं। उन्हें पढ़ते हुए इस तरह तल्लीन हो जाते हैं कि पाठक कहानी की ‘सेटिंग’ का हिस्सा हो जाते हैं। उनकी कहानियाँ संक्षिप्त होते हुए भी अपनी विषय-वस्तु में बृहद होती हैं। अधिकतर रूसी कहानियाँ उदासी से भरपूर और अवसाद उत्पन्न करने वाली मगर बेहद ख़ूबसूरत होती हैं। क्या यह उनके ठंडे भूगोल की वजह से होता है कि कहानियाँ गूढ़ होते हुए भी बर्फ़-सी ठंडक लिए होती हैं!

यह कहानी ‘द जोक’ शायद चेखव की एकमात्र कहानी है जो सुखद प्रतीत होती है हालाँकि पाठक इसकी विवेचना अपने अनुभवों के आधार पर कर सकता है। प्रेम जीवन के लिए नितांत आवश्यक है और प्रेम का जीवन अनंत होता है यही इस कहानी का सार है।

पूनम की आवाज़ में यह कहानी पिघलते हुए आप तक पहुँचती है। नाद्या की प्रेम के प्रति मौन मगर उत्कट इच्छा श्री की आवाज़ में ठीक वैसी ही प्रतीत होती है जैसी चेखव ने लिखी है। नाद्या का कोरापन उसके प्रेम को और मुखर बना देता है और यहाँ पूनम इतनी ख़ूबसूरती से यह बयाँ करती हैं कि आप चेखव की इस कहानी, उनके किरदारों और इस बेहद प्यारी आवाज़ की मुहब्बत में डूब जाएँगे।

सुनिए चेखव की कहानी ‘द जोक’ का हिंदी अनुवाद ‘मामूली मज़ाक़ ‘पूनम अरोड़ा(श्री श्री) की आवाज़ में- दिव्या विजय

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