‘शुक्ल भी केवल अपने तरह के ही दिखाई पड़ते हैं, शुक्ल की तरह।’

लेखक-कवि विनोद कुमार शुक्ल को ज्ञानपीठ पुरस्कार मिलने पर यह टिप्पणी लिखी है अमेरिका प्रवासी प्रसिद्ध अंग्रेज़ी लेखक अमितावा कुमार…

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