अनुवाद में क्या-क्या छूट जाता है: कोरियाई साहित्य के बहाने

आज अंतरराष्ट्रीय अनुवाद दिवस है। अनुवाद ने साहित्यिक परिदृश्य को बदल कर रख दिया है। अनुवाद के इसी बदले परिदृश्य…

 प्रज्ञा गौतम की टिप्पणी ‘एक मुकम्मल कहानी की तलाश’

प्रज्ञा गौतम विज्ञान कथा लिखती हैं। हिन्दी में विज्ञान कथा के प्रति क्या नज़रिया है- उसी को लेकर उन्होंने अपने…

श्रीकान्त वर्मा शिखर सम्मान स्वीकृति वक्तव्य: अशोक वाजपेयी

कल यानी 18 सितंबर की शाम श्रीकान्त वर्मा शिखर सम्मान का आयोजन दिल्ली के कंस्टीट्यूशन क्लब में हुआ, जिसमें हिन्दी…

राष्ट्रीय भाषा: एकरूपता नहीं विविधता में एकता

14 सितंबर को हिन्दी दिवस क्यों मनाते हैं? संविधान सभा में भाषा को लेकर, राष्ट्रीय भाषा के सवाल पर क्या…

स्कर्ट के युग मेँ साड़ी लिपटाने का प्रयास

आज हिन्दी दिवस है। आज हम दो लेख पढ़ेंगे। पहला लेख है भाषा प्रयोगों की अराजकता पर, दूसरा लेख जेन…

हाइफ़न: भारतीय भाषाओं के साहित्य के आपसी संवाद का मंच

इतवार के इंडियन एक्सप्रेस में पारोमिता चक्रवर्ती के साथ कन्नड़ के लेखक विवेक शानभाग की बातचीत पढ़ी। विवेक समकालीन भारतीय…

क्या प्रकृति को भी पितृसत्ता से आज़ादी चाहिए?

यह लेख प्रकृति और मनुष्य के रिश्ते को स्त्रीवाद के नज़रिए से देखती है। इको फेमिनिज्म पर कुमारी रोहिणी का…

जीवन वही है जो जीने और रोने दोनों के लिए पर्याप्त है।

दिल्ली विश्वविद्यालय के शोधार्थी लक्की कुमार मिश्रा ने बहुत अच्छा लेख लिखा है। एलियनेशन पर लिखा यह लेख हम सबको…

भारतीय ज्ञान परम्परा – एक विहङ्गम दृष्टि

इस साल उन्मोचन शृंखला की पाँच पुस्तकों का प्रकाशन हुआ है। वाणी प्रकाशन से प्रकाशित इन पुस्तकों में से भारत…

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