नन्द चतुर्वेदी रचनावली पर प्रणव प्रियदर्शी की टिप्पणी

हाल में ही राजकमल प्रकाशन से नन्द चतुर्वेदी की रचनावली प्रकाशित हुई है। चार खंडों में प्रकाशित इस रचनावली का…

मुझे लघु पत्रिकाएं और लेखक संगठन जरूरी लगते हैं- पल्लव

आज लघु पत्रिका दिवस है। लघु पत्रिका से ‘बनास जन’ की याद आती है। ‘बनास जन’ से पल्लव की याद…

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Jankipul : A Bridge of World's Literature एक नयी शुरुआत! मेरा कॉलम #Jankipul के लिए " जनहित में जारी सब पर भारी" आपकी टिप्पणी की अपेक्षा रहेगी