सांसद एक सामान्य व्यक्ति की तरह क्यों नहीं रह सकता- हरिवंशMay 12, 2015July 2, 20201 mins109 प्रसिद्ध पत्रकार हरिवंश को राज्यसभा में आये एक साल से अधिक हो गया है. उन्होंने अपने अनुभवों… continue Reading..
“स्वतंत्रता” शब्द गुलामी से उपजता है!May 10, 20151 mins2आज सुबह एक अच्छी और सार्थक बातचीत पढ़ी. गीताश्री हमारे समय की एक महत्वपूर्ण कथाकार हैं, पत्रकार… continue Reading..
कविता एवं कला महोत्सव, शिमला में मिलते हैं !May 10, 20151 mins8साहित्य-कला उत्सवों के दौर में यह अपने तरह का पहला आयोजन है-कविता एवं कला महोत्सव, शिमला. लिटरेचर… continue Reading..
सेल्फी के जमाने में ‘बॉलीवुड सेल्फी’May 9, 20151 mins3जब से फिल्म समीक्षक पी.आर. एजेंसी के एजेंट्स की तरह फिल्मों की समीक्षा कम उनका प्रचार अधिक… continue Reading..
दुख उतना ही गहरा हुआ जितना गहरा था प्रेम!May 7, 20151 mins522कहने को मृत्यु को लेकर कुछ नोट्स हैं, लेकिन जिंदगी के राग से गहरे सराबोर. मनीषा पांडे… continue Reading..
पता नहीं क्यों इधर दु:स्वप्न झूठे नहीं हो रहे हैं!May 6, 20151 mins5दिल्ली-मुम्बई जैसे महानगरों में कला संस्कृति का कारोबार बढ़ता जा रहा है लेकिन कलाकारों-संस्कृतिकर्मियों की अड्डेबाजी की… continue Reading..
अनुराग अन्वेषी की प्रेम कविताएंMay 4, 20151 mins4आज कुछ कविताएं अनुराग अन्वेषी की. कविताओं में इस तरह की ऐन्द्रिकता कम हो गई है इन… continue Reading..
यह साहित्य के भूकम्पोत्तर काल का आयोजन था!May 3, 20151 mins124बिहार में संपन्न हुए अखिल भारतीय कहा समारोह पर यह टिप्पणी पटना के युवा साहित्य प्रेमी, समीक्षक… continue Reading..
संजीव के उपन्यास ‘फांस’ का अंशMay 2, 2015August 6, 20251 mins33कर्ज के जाल में फंसकर किसानों के मजदूर बनते जाने की पीड़ा को प्रेमचंद ने अपने उपन्यास…Blog prabhatcontinue Reading..