हमारी चिंता यह है कि बच्चों को लोकप्रिय पढ़ाया जाए या गम्भीर लेकिन बच्चों की चिंता के केंद्र में तकनीकी प्रगति है। आज पढ़िए 12 वीं कक्षा की विद्यार्थी बबीता जोशी का लेख-
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आज के दौर में इंटरनेट हमारी आवश्यकता नहीं ज़रूरत बन गया है। बिना इंटरनेट के आज के समय में हम कुछ भी नहीं ढूंढ सकते हैं। सही मायनों में इंटरनेट एक दूसरे से जुड़े बहुत सारे कम्प्यूटरों का जाल हैं। इंटरनेट को विशवस्तर पर जुड़ा हुआ नेटवर्क सिस्टम है। इंटरनेट का उपयोग हम ईमेल भेजने, चैटिंग, टिकट बुक कराने, सूचनाएं बेचने और प्रदान करने के लिए, नौकरी खोजने और प्रदान करने के लिए, विज्ञापन करने के लिए, सीधे अपने ग्राहकों तक पहुंचने के लिए, मनोरंजन इत्यादि सभी कार्य करने के लिए इंटरनेट का उपयोग किया जाता है।
एक छात्र या छात्रा के लिए जितना पढ़ना ज़रूरी हैं उतना ही पाठ्येतर गतिविधियाँ भी। लेकिन जब हम टाइम्स ऑफ इंडिया की सर्वे देखते हैं। तो सर्वेक्षण से पता चला कि ग्रामीण क्षेत्रों में, नमूना छात्रों में से 37% बिल्कुल भी अध्ययन नहीं कर रहे थे – यह शहरी क्षेत्रों में 19% है – और केवल 8% नियमित रूप से ऑनलाइन अध्ययन कर रहे थे। सर्वेक्षण किए गए ग्रामीण बच्चों में से कम से कम 48% कुछ शब्दों से अधिक पढ़ने में सक्षम नहीं थे।
इसे देख कर हम यह समझ सकते हैं कि कितने कम बच्चें ऑनलाइन अध्ययन में भागीदारी कर पा रहे हैं। लेकिन बहुत से अलग अलग स्पेस में भागीदारी लेने के लिए हमें इंटरनेट की आवश्यकता हैं। जैसे बहुत सी इंटर्नशिप्स जो की ऑनलाइन ही मिलती हैं।
वर्तमान में तो बच्चों की शिक्षा और उनके खेलने के लिए गेम्स भी इंटरनेट पर उपलब्ध है। हालांकि, अच्छे के साथ, बुरा आता है। उद्योगों में क्रांति लाने के बावजूद, इंटरनेट से जुड़े जोखिम भी हैं। साइबर धोखाधड़ी, मैलवेयर हमले, अव्यवस्थित और असत्यापित सामग्री, पहचान की चोरी, बेईमान व्यवसाय आदि इंटरनेट से संबंधित कुछ प्रमुख मुद्दे हैं। इसके अलावा, इंटरनेट का अत्यधिक उपयोग मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य दोनों को प्रभावित कर सकता है। एरिक्सन असीम कनेक्टिविटी की दुनिया बना रहा है, जिससे हर जगह छात्रों तक पहुंचना और उन्हें सशक्त बनाना संभव हो रहा है, जैसा पहले कभी नहीं हुआ। गहन सीखने के अनुभव और गुणवत्ता प्रशिक्षण तक पहुंच के साथ, नए कौशल और ज्ञान प्राप्त करना सभी के लिए एक समृद्ध जीवन भर की यात्रा बन जाएगी।
शिक्षा बेहतर भविष्य की कुंजी है। छात्रों को अपनी पढ़ाई के प्रति बेहतर एकाग्रता सुनिश्चित करने और सीखने पर ध्यान केंद्रित करने के लिए इंटरनेट तक पहुंच सीमित होनी चाहिए। यह उन्हें खराब साइटों का उपयोग करने के लिए प्रतिबंधित करेगा और बुरे लोगों का दुरुपयोग नहीं किया जा सकता है और सामाजिक नेटवर्क पर ट्रैक नहीं किया जा सकता है। इंटरनेट द्वारा पल भर में, बिना ज्यादा खर्च किए कोई भी विचार हो, स्थिर चित्र हो, विडियो चित्र हो तथा एक पुस्तकालय की किताबों के विषय को कम समय में कहीं भी भेज सकते हो। इस प्रकार संचार व सूचना के दोनों क्षेत्र में इंटरनेट का महत्व बढ़ गया है।
इंटरनेट का उपयोग आधुनिक जीवन का एक अनिवार्य हिस्सा बन गया है, जो अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, राजनीतिक भागीदारी, स्वास्थ्य और अन्य मौलिक अधिकारों को सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक है। यह एक अमूल्य स्थान प्रदान करता है जहां हाशिए पर रहने वाले समुदाय सामाजिक परिवर्तन की शुरुआत करते हैं और पहचान बनाई जाती है।इंटरनेट और स्थापित मानवाधिकारों के संबंध में, बिना इंटरनेट एक्सेस के सार्वजनिक मामलों और राजनीति में सार्थक रूप से भाग लेना लगभग असंभव है। यह पर्याप्त शिक्षा, स्वास्थ्य देखभाल, या अन्य आर्थिक और सामाजिक मानवाधिकारों तक पहुँचने के लिए जाता है इंटरनेट के सार्थक मानवाधिकारों को इस प्रणाली में निर्मित शक्ति असंतुलन को पहचानना चाहिए ताकि सीमांत समुदायों द्वारा ऑफ़लाइन असमानताओं को दोहराने और तीव्र करने से बचा जा सके। इंटरनेट एक्सेस के अधिकार की मान्यता के बाद, एक्सेस और अनुभव में असमानताओं का सामना करना, और उन्हें दूर करने के लिए रणनीति विकसित करना नितांत आवश्यक है।2008 के पहले उनका जो अनुभव रहा वो एक साल बाद 2009 में पूरी तरह बदल गया.
2009 में पूरी क्लास ने उनके इस सवाल का जवाब एक सुर में बताने से मना कर दिया और कहा कि ये अनुचित और असंभव टास्क है हैनकॉक ऑनलाइन कम्युनिकेशन से जुड़े मनोवैज्ञानिक और सामाजिक प्रक्रिया का अध्ययन करते हैं छात्रों का तर्क था कि अगर वे ऑफलाइन हो जाएं तो उनके काम पर बुरा असर पड़ता है, सोशल लाइफ प्रभावित होती है और दोस्तों और परिवार को चिंता होती है कि कहीं उनके साथ कुछ अशुभ तो नहीं घटा इंटरनेट को अगर कुछ समय के लिए बंद कर दिया जाए तो इसका असर हमारी उम्मीदों से परे होगा…..
हम इसे हकीकत में तब्दील करने के लिए गांवो के बच्चों को स्कूल भेज सकते हैं और स्कूल उन्हे इंटरनेट की सुविधा प्राप्त कर सकते हैं। जिससे बच्चे बाहरी दुनिया से जुड़े और बहुत से अलग अलग मौक़ों का फायदा उठा सकें।
अन्त में मैं अपनी लेखनी को विराम देते हुए ये कहना चाहती हूँ की सम्पूर्ण जनमानस को दुनिया की बेहतर से बेहतर सुविधा प्राप्त कराने हेतु आधुनिक युग में इन्टरनेट बेब सेवा के प्रति जागरूकता के साथ आगे आना होगा पिछड़े से पिछड़ा क्षेत्र जब इस तकनीकी दुनिया में आगे आयेगा इसे जानेगा तभी वह अपने बच्चों को एक नयी दुनिया का परिचय प्राप्त करवाने में सक्षम होगा….

