‘धरती आबा’ भगवान बिरसा के गाँव उलिहातू से

बिरसा मुंडा के गाँव से लौटकर यह प्रसिद्ध लेखक विकास कुमार झा ने लिखा है। आप भी पढ़िए और महसूस कीजिए-

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‘धरती आबा’ भगवान बिरसा के गाँव उलिहातू से आज ही लौटा हूं।झारखंड के खूंटी जिलान्तर्गत अड़की प्रखंड का यह बदनसीब गाँव पीने के पानी के लिए दशकों से तरस रहा है।उलिहातू में पीने का घोर प्रदूषित जल है,जो इस गाँव की चंद डांड़ी और कुएं में है।सही मायने में पानी के नाम पर आदिवासी विद्रोह के महानायक बिरसा मुंडा का आंसू ही यहां मौजूद है।’उलगुलान’ यानी ‘विद्रोह’ के महान उन्नायक का यह गाँव देश की आजादी के बाद विकास के नाम पर बस सड़क देख पाया है।सड़क भी इसलिए क्योंकि ‘धरती आबा’ की जन्मतिथि और पुण्यतिथि पर देश से लेकर झारखंड के बड़े-बड़े नेताओं को यहां राजनीतिक खेल खेलने के लिए आना होता है।लगभग दस महीने पहले देश की राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मर्मू भी उलिहातू आयीं और बिरसा भगवान की गाँव में स्थित प्रतिमा पर माला चढ़ाकर गयीं।श्री राजनाथ सिंह जब देश के गृह मंत्री थे,तो अपनी झारखंड-यात्रा के दौरान उन्होंने सिंहनाद किया था कि उलिहातू गाँव का अब कोई घर कच्चा नहीं रहेगा।इस बात के वर्षों बीत गए, उलिहातू कच्चे घरों में ही दिन गुजार रहा है।बिरसा भगवान का जिस घर में जन्म हुआ था,वहां उनकी एक अदद मूर्ति बेशक लगी हुई है।कहने को यह बिरसा भगवान का स्मारक है।पर यहां एक केयर-टेकर तक नहीं है।बिरसा भगवान की जर्जर बूढ़ी पौत्रवधू किसी के आने पर ताला खोलकर बिरसा की प्रतिमा का दर्शन कराती है।बिरसा-स्मारक से सटा हुआ बिरसा के वंशजों का घर है।ये वंशज भी बहुत बुरी हालत में हैं।गांव का स्कूल हमेशा बंद पड़ा रहता है।पुस्तकालय भवन और सामुदायिक भवन पर भी स्थायी ताला है।
आज 15 सितंबर, 2023 है।आज से दो माह बाद 15 नवंबर को ‘धरती आबा बिरसा’ की जयंती है।लिहाजा,उलिहातू को लेकर हर साल की भांति हलचल तेज है।जून 2023 के पहले सप्ताह में खूंटी के उपायुक्त श्री शशिरंजन ने घनघोर प्रशासनिक बैठक कर ऐलान किया कि उलिहातू का भरपूर विकास किया जायेगा।इसके लिए एक शानदार ‘ऐक्शन प्लान’ तैयार है।घोषणा में कहा गया कि उलिहातू को सभी मूलभूत सुविधाओं से लैस किया जायेगा।यहां ‘पर्यटन-केंद्र’ बनाया जायेगा।फलों की खेती को भरपूर बढावा दिया जाएगा।फलों में ‘ड्रेगन फ्रूट’ और चीकू की खेती को प्राथमिकता दी जायेगी।उलिहातू में एक ‘जैव विविधता पार्क’ भी लगे हाथ बना दिया जाएगा।
उलिहातू के ग्रामीण हर साल होनेवाली ये और ऐसी घोषणाओं से ऊब चुके हैं।वे जानते हैं कि यह सारा ड्रामा 15 नवंबर तक है।उलिहातू फिर अपने दुर्भाग्य के अंधकार में गुम हो जायेगा।
संसद के सेंट्रल हाल में लगी बिरसा भगवान की तस्वीर खून के आंसू टपका रही है।रांची हवाई अड्डा, जिसका नाम ‘बिरसा एयरपोर्ट’ है, पर मौजूद बिरसा की दमकती हुई आदमकद प्रतिमा छाती कूट रही है क्योंकि बिरसा के गाँव को पानी नसीब नहीं।पक्का घर मयस्सर नहीं।रोशनी कहीं नहीं।उलिहातू के बच्चों को शिक्षा नहीं।
बिरसा संसद के सेंट्रल हाॅल में घुट-घुट कर रो रहे हैं।उन्हें अपने गाँव आकर पास के ‘डोम्बारी बुरू’ पहाड़ पर जाना है और आजाद भारत में ‘उलगुलान’ करना है।
उलिहातु को प्यार की गोद चाहिए।मेरी क्या बिसात है।पर मैं उलिहातु को भरसक गोद में उठाऊंगा।बहुत दुलार उलिहातू!!

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