भालचंद्र नेमाड़े के उपन्यास ‘हिन्दू’ का एक अंशApril 25, 20151 mins104आज मराठी के प्रसिद्ध लेखक भालचंद्र नेमाड़े को ज्ञानपीठ पुरस्कार प्रदान किया जा रहा है. उनके प्रसिद्ध… continue Reading..
कुँवर नारायण की कहनियों में धंसते हुएApril 24, 20152 mins35युवा लेखक मनोज कुमार पाण्डेय ने यह लेख लिखा है हिंदी के वरिष्ठ कवि-कथाकार कुंवर नारायण की… continue Reading..
बापू! देश का अंतिम जन अपने अंत की ओर बढ़ रहा है!April 23, 20151 mins4महात्मा गाँधी की वतन वापसी के सौवें साल में उनके नाम यह मार्मिक पाती लिखी है दिल्ली… continue Reading..
मीरांबाई की छवि और मीरां का जीवनApril 22, 20151 mins10बड़ी चर्चा सुनी थी माधव हाड़ा की किताब ‘पंचरंग चोला पहर सखी री’ की. किसी ने लिखा… continue Reading..
हृषीकेश सुलभ कथाकार हैं, क्रॉनिकल राइटर नहीं!April 20, 20151 mins9हृषीकेश सुलभ के छठे कहानी संग्रह ‘हलंत’ की कहानियों को पढ़ते हुए यह मैंने लिखा है- प्रभात… continue Reading..
नेताजी का सच और गुमनामी बाबा का मिथक!April 17, 20151 mins9गुमनामी बाबा नेताजी थे- इस बारे में सबसे पहले ‘गंगा’ नामक पत्रिका में पढ़ा था. बात 1985-86… continue Reading..
‘कोर्ट’ : भारतीय सिनेमा का उजला चेहराApril 15, 20151 mins6सर्वश्रेष्ठ फिल्म का राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त फिल्म ‘कोर्ट’ हो और प्रसिद्ध फिल्म समीक्षक मिहिर पंड्या की लेखनी… continue Reading..
क्या मीडिया समाज की नकारात्मक छवि बनाता है?April 13, 20151 mins6अभी हाल में ही वरिष्ठ पत्रकार राकेश तिवारी की किताब आई है- ‘पत्रकारिता की खुरदरी जमीन’. इस… continue Reading..
एक अनुशासनहीन फेंटेसी है ‘अँधेरे में’April 11, 20151 mins34पिछले साल मुक्तिबोध की मृत्यु की अर्ध-शताब्दी थी. इस मौके पर उनके ऊपर खूब कार्यक्रम हुए, थोक… continue Reading..
गंभीर साहित्य सृजन में पैसा कहां है- सुरेन्द्र मोहन पाठकApril 9, 20151 mins24प्रतिष्ठित पत्रिका ‘पाखी’ ने लोकप्रिय साहित्य को लेकर एक ऐतिहासिक आयोजन किया है जिसमें लोकप्रिय धारा के… continue Reading..