यह हमारा स्वयं का चुना हुआ भ्रम हैAugust 11, 20121 mins9आज वंदना शुक्ल की कविताएँ– जानकी पुल. (१) भ्रम बहुत ऊँचाइ पे बैठी कोई खिड़की बुहार देती…ब्लॉग continue Reading..
आजकल सच और सपने में कोई फर्क ही नहीं लगता!June 17, 20121 mins16वंदना शुक्ल की कविताएँ बिना किसी भूमिका के. ये कविताएँ खुद अपनी भूमिका हैं और परिचय भी.…ब्लॉग continue Reading..
सांस जीती हैं देह को जैसे स्वरों में धडकता है संगीतMarch 30, 20121 mins3शास्त्रीय /उप शास्त्रीय संगीत के अंगों में जीवन रहस्य तलाशती वंदना शुक्ल की इन कविताओं की प्रकृति…ब्लॉग continue Reading..