मीडिया धीरे-धीरे मनोरंजन बनेगा, कोरा मीडिया नहीं रह जाएगा।June 4, 20121 mins6आज सुबह-सुबह युवा और प्रखर मीडिया विश्लेषक विनीत कुमार का यह लेख पढ़ा. साझा तो तभी करना… continue Reading..
\’कथा\’ पत्रिका का पुनर्प्रकाशनJune 4, 20121 mins0\’कथा\’ पत्रिका का नाम आते ही मार्कंडेय जी याद आते हैं. यह खुशी की बात है कि… prabhatcontinue Reading..
‘कथा’ पत्रिका का पुनर्प्रकाशनJune 4, 20121 mins8‘कथा’ पत्रिका का नाम आते ही मार्कंडेय जी याद आते हैं. यह खुशी की बात है कि…ब्लॉग continue Reading..
हिंदी के गौरव का सवाल गौरव सोलंकी के सवाल से कहीं ज़्यादा बड़ा हैJune 3, 20121 mins10ज्ञानपीठ-गौरव प्रकरण ने हिंदी के कुछ बुनियादी संकटों की ओर इशारा किया है. लेखक-प्रकाशक संबंध, लेखकों की… continue Reading..
सावन धान रोपने के मौसम को कहते हैंJune 2, 20121 mins16आज युवा कवि मिथिलेश कुमार राय की कविताएँ. कुछ खिच्चे अनुभव, कुछ दृश्य, कुछ सच्चाइयां मिथिलेश की… continue Reading..
चलन्तिका टीकाओं का पूरा अर्थशास्त्र बदल चुका हैJune 1, 20122 mins0संजीव कुमार हमारे दौर बेहतरीन गद्यकार हैं. उनका यह वृत्तान्त एक सिनेमा हॉल के बहाने पटना के… prabhatcontinue Reading..
चलन्तिका टीकाओं का पूरा अर्थशास्त्र बदल चुका हैJune 1, 2012July 20, 20202 mins8संजीव कुमार हमारे दौर बेहतरीन गद्यकार हैं. उनका यह वृत्तान्त एक सिनेमा हॉल के बहाने पटना के…फीचर्ड continue Reading..