आलोचना का अर्थ चरित्र हनन नहीं होताFebruary 3, 20141 mins131तहलका पत्रिका के संस्कृति विशेषांक में शालिनी माथुर का लेख छपा था ‘मर्दों के खेला में औरत का… continue Reading..
आनंद नगर में कुछ घंटे आनंद केFebruary 3, 20141 mins9युवा पत्रकार-लेखक पुष्यमित्र ने हाल में ही कोलकाता की यात्रा की और उस यात्रा का एक रोचक… continue Reading..
भेड़चाल और हुआं-हुआंFebruary 2, 2014August 5, 20251 mins262आज कुछ कवितायें अनुराग अन्वेषी की। अखबार में शब्दों का सम्पादन करने वाले अनुराग अपनी कविताओं में…Blog prabhatcontinue Reading..
यह किताब बदलते परिवेश और इच्छाओं का डॉक्यूमेंट हैFebruary 1, 20141 mins13कल पंकज दुबे के उपन्यास ‘लूजर कहीं का’ का दिल्ली लांच था। एक तीसरे दर्जे के अभिनेता… continue Reading..