फ़िराक़ गोरखपुरी की कहानी ‘रैन बसेरा’March 3, 2020August 28, 20201 mins17उर्दू के मशहूर शायर फ़िराक गोरखपुरी की शायरी के बारे में किसी को बताने की ज़रूरत नहीं,… continue Reading..
स्मृतिलोप का दौर: भविष्य की कविता: सुधांशु फ़िरदौसMarch 3, 20201 mins8सबसे अंत में कवि बचता है, कविता बचती है। 28 फ़रवरी को आयोजित राजकमल स्थापना दिवस के… continue Reading..
सिनेमा की बदलती ज़मीन : भविष्य का सिनेमा:मिहिर पंड्याMarch 2, 2020March 2, 20201 mins7मिहिर पांड्या सिनेमा पर जो लिखते बोलते हैं उससे उनकी उम्र की तरफ़ ध्यान नहीं जाता। हिंदी… continue Reading..
भविष्य का समाज: सहजीविता के आयाम: जसिंता केरकेट्टाMarch 2, 2020August 12, 20251 mins6 जसिंता केरकेट्टा कवयित्री हैं, आदिवासी समाज की मुखर आवाज़ हैं। राजकमल स्थापना दिवस के आयोजन…Blog prabhatcontinue Reading..
‘फैन कल्चर’ का दौर : भविष्य का आलोचक:मृत्युंजयMarch 1, 20201 mins3मृत्युंजय कवि हैं और कविता के हर रूप में सिद्धहस्त हैं। सैद्धांतिक और व्यावहारिक दोनों तरह की… continue Reading..
कला ही ऐसा माध्यम है जो हमें अपने अंतःकरण की प्रस्तुति करने में समर्थ बनाता है: जिज्ञासा लाबरूMarch 1, 20201 mins1राजकमल स्थापना दिवस पर आयोजित ‘भविष्य के स्वर’ आयोजन में पहली बार जिज्ञासा लाबरू को सुना। हम… continue Reading..
किस्सागोई : वाचिक परंपरा का नया दौर:हिमांशु बाजपेयीMarch 1, 2020August 12, 20251 mins481राजकमल स्थापना दिवस पर आयोजित ‘भविष्य के स्वर’ में एक वक्तव्य प्रसिद्ध दास्तानगो हिमांशु बाजपेयी का भी…Blog prabhatcontinue Reading..