नंदकिशोर आचार्य की कविताएँ

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वरिष्ठ कवि नंदकिशोर आचार्य का नया कविता संग्रह आया है ‘केवल एक पत्ती ने’, ‘वाग्देवी प्रकाशन, बीकानेर से. उसी संग्रह से कुछ कविताएँ आज प्रस्तुत हैं- जानकी पुल.
  
अभिधा में नहीं
जो कुछ कहना हो उसे
–खुद से भी चाहे—
व्यंजना में कहती है वह
कभी लक्षणा में
अभिधा में नहीं लेकिन
कभी
कोई अदालत है प्रेम जैसे
कबूल अभिधा में जो
कर लिया
–सजा से बचेगी कैसे!
हर कोई चाहता है
साधू ने भरथरी को
दिया वह फल—
अमर होने का
भरथरी ने रानी को
दे दिया
रानी ने प्रेमी को अपने
प्रेमी ने गणिका को
और गणिका ने लौटा दिया
फिर भरथरी को वह
—भरथरी को वैराग्य हो
आया
वह नहीं समझ पाया:
हर कोई चाहता है
अमर करना
प्रेम को अपने.
मेरी तरह
सीने में गहरे
सूखी धरती के
बहती रहती है जलधार
सदा बसा रहता है
अपनी स्मृतियों में
उजाड़
आकाश के कानों में
गूंजा ही करती सब समय
सन्नाटों की पुकार
इन सबने क्या
मेरी तरह
किया था कभी
तुम से प्यार?
यादों में
एक उदास गंध है
सूख कर झरे सपनों की
दरख़्त के
खुशबू के रंगों की
यादों में
डूबा है जो.
सपना जो नहीं होता
झूठा है वह सच
सपना नहीं जो होता—
सपने में ही जीना
सपने को चाहे सच होना है उसका
झूठ को जियो कितना ही
सच नहीं होता वह
जिऊँ चाहे सपने-सा
तुम्हें
सच तुम ही हो मेरा.
सपने में- एक
देखा सपने में
मैंने
अपने को
देखते हुए सपना
–और ईश्वर हो गया
जागता हुआ सपने में.
सपने में—दो
सपने में देखा जो
तुमने
अपना सपना देखते
मुझको
सुला लिया उस को
गहरी नींद में अपनी

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