लुक छिप बदरा में चमके जैसे चनवा…

जाने माने रंगकर्मी, कथाकार, लोक कलाओं के माहिर विद्वान हृषिकेश सुलभ का यह षष्ठी योग का वर्ष है, इसलिए जानकी पुल पर हम समय समय पर उनकी रचनाएँ, उनके रचनाकर्म से जुड़ी सामग्री देते रहेंगे. आज प्रस्तुत है एक बातचीत जो की है मुन्ना कुमार पाण्डे और अमितेश कुमार ने- मॉडरेटर. 
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आपके हिसाब से वह कौन सी ऐसी परिस्थितियाँ हैं जिसने भोजपुरी संस्कृति और यहां की कला को प्रभावित किया है?

पूरी दुनिया की बड़ीत्रासदियोंमेंसे एक है विस्थापन।और सिर्फ़भूगोलनहींबदलताहै, इससेआनेवालीकई पीढियांप्रभावितहोती हैं।विस्थापनका ये खेलहै।अब दुनियाके परिदृश्यमेंजहांजहांविस्थापनहुआहै जीवनकितनासंकटकितनासंघर्षमेंआयाहै! कुछपीढियांतो उस दर्दको लेकरमर गई और कुछनहींहो सका।भोजपुरीक्षेत्रकी सबसेबडीसमस्याजो प्रछन्नरूपसे दिखाईदेतीहै विस्थापनहै।अब इस विस्थापनकी जड़ोंमेंक्याहै? तो हम एक सड़ेहुएसामंतीसमाजका हिस्सारहेहैं।उत्तरप्रदेश का कुछ हिस्सा,बिहारऔर नेपालमेंमधेसियोंका हिस्साहै जिसे पूर्वांचल कह लीजिये इसका

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