Meritking Giriş: Meritking Spor BahisleriMarsbahis Giriş: Marsbahis Para Yatırma Ve Çekme İşlemleriMavibet Giriş: Mavibet Güvenilir Mi, Mavibet Bonus Ve KampanyalarMeritking Giriş: Meritking Güvenilir Mi, Meritking Bonus Ve KampanyalarMarsbahis Giriş: Marsbahis Giriş Adresi, Marsbahis Mobilden Giriş 2026Mavibet Giriş: Mavibet Spor Bahisleri, Mavibet Casino Ve Slot OyunlarıMeritking Giriş: Meritking Spor BahisleriMarsbahis Giriş: Marsbahis Para Yatırma Ve Çekme İşlemleriMavibet Giriş: Mavibet Güvenilir Mi, Mavibet Bonus Ve KampanyalarMeritking Giriş: Meritking Giriş Adresi, Meritking Casino Ve Slot OyunlarıMarsbahis Giriş: Marsbahis Güvenilir Mi, Marsbahis Spor BahisleriMavibet Giriş: Mavibet Para Yatırma Ve Çekme İşlemleriMeritking Giriş: Meritking Spor BahisleriMarsbahis Giriş: Marsbahis Para Yatırma Ve Çekme İşlemleriMavibet Giriş: Mavibet Güvenilir Mi, Mavibet Mobilden Giriş 2026Meritking Giriş: Meritking Para Yatırma Ve Çekme İşlemleriMarsbahis Giriş: Marsbahis Spor BahisleriMavibet Giriş: Mavibet Giriş Adresi, Mavibet Güvenilir MiMeritking Giriş: Meritking Giriş Adresi, Meritking Casino Ve Slot OyunlarıMarsbahis Giriş: Marsbahis Güvenilir Mi, Marsbahis Spor BahisleriMavibet Giriş: Mavibet Para Yatırma Ve Çekme İşlemleriMeritking Giriş: Meritking Spor Bahisleri, Meritking Casino Ve Slot OyunlarıMarsbahis Giriş: Marsbahis Para Yatırma Ve Çekme İşlemleriMavibet Giriş: Mavibet Güvenilir Mi, Mavibet Bonus Ve KampanyalarMeritking Giriş: Meritking Canlı Destek Ve İletişimMarsbahis Giriş: Marsbahis Casino Ve Slot OyunlarıMavibet Giriş: Mavibet Bonus Ve KampanyalarMeritking Giriş: Meritking Spor Bahisleri, Meritking Giriş AdresiMarsbahis Giriş: Marsbahis Para Yatırma Ve Çekme İşlemleriMavibet Giriş: Mavibet Güvenilir MiMeritking Giriş: Meritking Canlı Destek Ve İletişimMarsbahis Giriş: Marsbahis Casino Ve Slot Oyunları, Marsbahis Spor BahisleriMavibet Giriş: Mavibet Bonus Ve Kampanyalar, Mavibet Giriş AdresiMeritking Giriş: Meritking Güvenilir Mi, Meritking Bonus Ve KampanyalarMarsbahis Giriş: Marsbahis Giriş Adresi, Marsbahis Mobilden Giriş 2026Mavibet Giriş: Mavibet Spor BahisleriMeritking Giriş: Meritking Giriş Adresi, Meritking Mobilden Giriş 2026Marsbahis Giriş: Marsbahis Güvenilir Mi, Marsbahis Bonus Ve KampanyalarMavibet Giriş: Mavibet Para Yatırma Ve Çekme İşlemleriMeritking Giriş: Meritking Para Yatırma Ve Çekme İşlemleriMarsbahis Giriş: Marsbahis Spor Bahisleri, Marsbahis Casino Ve Slot OyunlarıMavibet Giriş: Mavibet Giriş Adresi, Mavibet Mobilden Giriş 2026Meritking Giriş: Meritking Canlı Destek Ve İletişimMarsbahis Giriş: Marsbahis Casino Ve Slot OyunlarıMavibet Giriş: Mavibet Bonus Ve KampanyalarMeritking Giriş: Meritking Giriş AdresiMarsbahis Giriş: Marsbahis Güvenilir MiMavibet Giriş: Mavibet Para Yatırma Ve Çekme İşlemleriMeritking Giriş: Meritking Güvenilir Mi, Meritking Giriş AdresiMarsbahis Giriş: Marsbahis Giriş Adresi, Marsbahis Bonus Ve KampanyalarMavibet Giriş: Mavibet Spor Bahisleri, Mavibet Casino Ve Slot OyunlarıMeritking Giriş: Meritking Spor Bahisleri, Meritking Casino Ve Slot OyunlarıMarsbahis Giriş: Marsbahis Para Yatırma Ve Çekme İşlemleriMavibet Giriş: Mavibet Güvenilir Mi, Mavibet Bonus Ve KampanyalarMeritking Giriş: Meritking Spor Bahisleri, Meritking Casino Ve Slot OyunlarıMarsbahis Giriş: Marsbahis Para Yatırma Ve Çekme İşlemleriMavibet Giriş: Mavibet Güvenilir Mi, Mavibet Bonus Ve KampanyalarMeritking Giriş: Meritking Güvenilir Mi, Meritking Bonus Ve KampanyalarMarsbahis Giriş: Marsbahis Giriş Adresi, Marsbahis Mobilden Giriş 2026Mavibet Giriş: Mavibet Spor BahislerikalitebetgrandpashabetholiganbetjojobetholiganbetholiganbetextrabetAntalya EscortAntalya Escort BayanAntalya Escort BayanMeritking Giriş: Meritking Spor Bahisleri, Meritking Casino Ve Slot OyunlarıMarsbahis Giriş: Marsbahis Para Yatırma Ve Çekme İşlemleriMavibet Giriş: Mavibet Güvenilir Mi, Mavibet Bonus Ve KampanyalarAntalya Escort BayanAntalya EscortAntalya EscortlarAntalya EscortSüratbetSüratbet girişSüratbetCasinoroyalCasinoroyal girişCasinoroyalHarbiwinHarbiwin girişHarbiwinAresbetAresbet girişAresbetPolobetPolobet girişPolobetBetwildBetwild girişBetwildMavibetMavibet girişMavibetGalabetGalabet girişGalabetBahislionBahislion girişBahislionBetcioBetcio girişBetcioBetsilinBetsilin girişBetsilinEgebetEgebet girişEgebetKavbetKavbet girişKavbetRoketbetRoketbet girişRoketbetMarsbahisMarsbahis girişMarsbahisMeritkingMeritking girişMeritkingHoliganbetHoliganbet girişHoliganbetElitbahisElitbahis girişElitbahisHarbiwinHarbiwin girişHarbiwinCasinoroyalCasinoroyal girişCasinoroyalKalebetKalebet girişKalebetMisliwinMisliwin girişMisliwinRekorbetRekorbet girişRekorbetSetrabetSetrabet girişSetrabetSüratbetSüratbet girişSüratbetTimebetTimebet girişTimebetKralbetKralbet girişKralbetWinxbetWinxbet girişWinxbetHoliganbetHoliganbet girişHoliganbet
  • कथा-कहानी
  • अमरकान्त की कहानी ‘हत्यारे’

    आज पढ़िए अमरकान्त की कहानी ‘हत्यारे’। यह कहानी 1960 के दशक में लिखी गई है और युवाओं के मोहभंग से जुड़ी कहानी है। मोहभंग के बाद युवा किस तरह लंपट हो जाते हैं इस कहानी में इसी बात का संकेत है। यह कहानी नेट पर उपलब्ध नहीं है इसलिए लगा कि उपलब्ध करवाना चाहिए। मैंने यह कहानी ‘A Death in Delhi: Modern Hindi Short Stories’ नामक संग्रह में मैंने पहली बार अंग्रेज़ी में पढ़ा था। इस संकलन में मूलतः नई कहानी आंदोलन के लेखकों की कहानियों के अनुवाद प्रकाशित हुए थे। लेकिन हिन्दी में मुझे नहीं मिली। हाल में राजकमल से अमरकान्त की संपूर्ण कहानियाँ प्रकाशित हुई तो उसके पहले खंड में मिली। सोचा साझा कर दूँ- प्रभात रंजन

    =================

    क्वार की एक शाम को पान की एक दुकान पर दो युवक मिले। आकाश साफ़, नीला और ख़ुशनुमा था और हवा आनेवाले मौसम की स्मृति में चंचल। एक युवक गोरे रंग का, लम्बा, तगड़ा और बहुत सुन्दर था, यद्यपि उसकी आँखें छोटी-छोटी थीं। वह सफ़ेद क़मीज़ और आधुनिक फ़ैशन की एक ऐसी तंग पैंट पहने था, जिसको फाड़कर उसके बड़े-बड़े और सुडौल चूतड़ बाहर निकलना चाहते थे। पैरों में जूते थे, किन्तु मोज़े नहीं थे और बाल उलटे फिरे हुए थे। दूसरा युवक साँवला, ठिगना और तन्दुरुस्त था। उसकी दाढ़ी-मूँछ अपने साथी की तरह ही सफ़ाचट थी, पोशाक भी उसी ढंग की थी, किन्तु सिर पर कश्मीरी टोपी थी, पैंट का रंग चाकलेटी न होकर भूरा था और क़मीज़ की दो बटनें खुली होने के कारण बनियाइन साफ़ दिखाई दे रही थी।

    ‘हलो, डियर!’

    ‘हलो, सन!’ गोरा पास आकर खड़ा हो गया।

    ‘इतना लेट क्यों, बेटे?’

    ‘भई, बोर हो गए!’

    ‘कोई ख़ास बात?’

    ‘यही नेहरू है, यार! आज उसका एक और पत्र मिला है।‘

    ‘आई सी!’ साँवले की आँखों और होंठों के कोरों में हास्य की हल्की सिकुड़नें पैदा होकर विलीन हो गईं।

    ‘हाँ डियर, यह आदमी मुझको परेशान कर रहा है। मैंने बार-बार कहा कि, भाई मेरे, भारत की प्राइम मिनिस्ट्री किसी दूसरे व्यक्ति को दो, मेरे पास बड़े-बड़े काम हैं। लेकिन मानता ही नहीं।‘

    ‘क्या कहता है?’

    ‘वही पुराना राग! इस बार लिखा है अब मैं थक गया हूँ। गाँधीजी देश का जो भार मुझे सौंप गए, उसको मैं आपके मज़बूत कन्धों पर रखना चाहता हूँ। इस अभागे देश में आज आपसे क़ाबिल और समझदार दूसरा कोई भी नहीं है!’

    दो लट्टू तेज़ी से नाचकर सहसा गिर गए हों, इस तरह वे कुछ क्षण हँसकर

    गम्भीर हो गए।

    ‘और भी तो नेता हैं?’ साँवले ने पूछा ।

    ‘नेहरू देश के और सभी नेताओं को निकम्मा और बातूनी समझता है। तुमको तो मालूम है न कि लास्ट टाइम जब मैं दिल्ली गया था तो नेहरू ने अशोक होटल में आकर मुझसे मुलाक़ात की थी?’

    ‘नहीं! तुम हरामी की औलाद हो, कोई बात बताते भी तो नहीं!’ साँवले की आँखें बटन की तरह चमकने लगीं।

    ‘नेहरू मेरा हाथ पकड़कर रोने लगा। बोला, आज देश भारी संकट से गुज़र रहा है। सभी नेता और मंत्री बेईमान और संकीर्ण विचारों के हैं। जो ईमानदार हैं, उनके पास अपना दिमाग़ नहीं है। मेरी लीडरशिप भी कमज़ोर है। मेरे अफ़सर मुझको धोखा देते हैं। जनता की भलाई के लिए मैंने पाँचसाला योजनाएँ शुरू कीं, लेकिन ब्लॉकों के सरकारी कर्मचारी अपने घरों को भरने में लगे हैं। मैं जानता हूँ कि सारे देश में कुछ लोग लूट-खसोट मचाए हुए हैं, लेकिन मैं उनके ख़िलाफ़ कोई कार्रवाई नहीं कर सकता।‘

    ‘अरे!’

    ‘किसी से कहना मत, साले!… उसने अन्त में कहा- देश को आज केवल आपका ही सहारा है। आप ही पूँजीपतियों, मंत्रियों और अफ़सरों के षड्यंत्र को ख़त्म करके समाजवाद क़ायम कर सकते हैं!’

    ‘अब तुम क्या सोच रहे हो?’

    ‘ऐसे छोटे-मोटे काम माबदौलत नहीं करते!’

    ‘यार, तुमको देश की ख़ातिर कुछ तो झुकना ही चाहिए!’

    ‘नहीं, बे! मैं सिद्धान्तों का आदमी हूँ। नेहरू को ट्रंक कॉल करके आ रहा इसीलिए तो देर हुई।‘

    ‘अच्छा?’

    ‘हाँ! मैंने साफ़-साफ़ कह दिया- भैया, देश की प्राइम मिनिस्ट्री मुझे मंजूर नहीं। मेरे सामने बहुत बड़े-बड़े सवाल हैं। सबसे पहले तो मुझे विश्व-शान्ति क़ायम करनी है!’

    दोनों दाँत खोलकर हँसने लगे।

    ‘तुम्हारा सोचना एक तरह से ठीक ही है। हाँ, मुझको भी एक मामूली-सी बात याद आ गई। कल मुझको भी अमेरिका के प्रेसीडेंट केनेडी का एक तार मिला था।‘

    ‘क्या लिखता है?’ गोरे की आँखें सिकुड़ गईं।

    ‘मुझको अमेरिका बुला रहा है। उसने लिखा है- आप-जैसा साहसी व्यक्ति आज संसार में कोई दूसरा नहीं। आप आ जाएँगे तो अमेरिका निश्चित रूप से रूस को युद्ध में हरा देगा।‘

    ‘तुमने कोई जवाब दिया?’

    ‘मैंने भी केबुल कर दिया है कि मैं राष्ट्रीय विचारों का युवक हूँ और इस घोर संकट के समय किसी भी हालत में अपने देश को छोड़कर किसी दूसरी जगह नहीं जा सकता!’

    ‘अच्छा किया। वैसे वह शख़्स है बहुत सीधा-सादा। मेरी तो बड़ी इज्ज़त करता है। मैंने ही उससे तुम्हारी सिफ़ारिश कर दी थी!

    इस पर वे एक ही साथ इस तरह सिर नीचे करके हँसने लगे, जैसे अपनी निकली छातियों को देखकर ख़ुश हो रहे हों। परन्तु बग़ल में खड़े एक पैंटधारी सज्जन की खिलखिलाहट सुनकर फ़ौरन गम्भीर हो गए। उनकी आँखें सिकुड़ गईं, होंठों में दृढ़ता आ गई और गर्दनें तन गईं। इसके बाद गोरे ने अजीब शान से आगे बढ़कर पानवाले से कैपस्टन का डिब्बा ले लिया। फिर दोनों ने एक-एक सिगरेट सुलगाई और अन्त में शंटिंग करने वाले रेल के इंजिन की तरह लापरवाही से धुआँ छोड़ते हुए वहाँ से चलते बने।

    एक चौड़ी और साफ़-सुथरी तारकोल की सड़क के दोनों ओर भव्य दुकानें थीं। अगल-बग़ल दोनों फुटपाथों पर हर उम्र, पेशा और रंग-रूप के स्त्री-पुरुषों की उत्साही भीड़ें विपरीत दिशाओं को सरक रही थीं। वे बाईं पटरी से आगे बढ़ रहे थे। उनके कूल्हे ख़ूब मटक रहे थे। उनके हाथ कुछ फैलकर इस तरह आगे-पीछे हो रहे थे, जैसे वे खड़े होकर तैर रहे हों। वे अक्सर अपने दाएँ और बाएँ अत्यधिक नाराज़ी से घूरते थे। एक बार जब भड़कीले वस्त्रों से सज्जित कुछ छात्राओं का एक दल सुगन्ध उड़ाता हुआ बग़ल से गुज़रा तो उन्होंने होंठ सिकोड़कर चुम्बन की आवाजें पैदा कीं। जब वे बाज़ार के दूसरे छोर पर पहुँच गए तो उन्होंने सरदार की दुकान के सामने खड़े होकर बादाम का शर्बत पिया, बनारसी पानवाले के यहाँ जाकर चार-चार बीड़े मगही पान खाए और अन्त में बाईं पटरी से वापस लौटने लगे।

    ‘उस लौंडिया को पहचान रहे हो?’

    ‘नहीं।‘ साँवले ने पीछे घूमकर एक दुबली-पतली लड़की को जाते हुए देखा। ‘तुम साले गदहे हो! जब मैं प्रधानमंत्री बनूँगा तो तुमको सेक्रेटेरियट का भंगी बनाऊँगा! बेटे, यह है चन्द्रा सिन्हा। एम. ए. इंग्लिस से टॉप करके अब रिसर्च कर रही है। वह मुझको अपना पति मान चुकी है।‘

    ‘या पुत्र?’

    ‘मज़ाक़ नहीं, डियर! कई बार चरण पकड़कर रो चुकी है। लेकिन तुम तो जानते ही हो कि मैं बाल-ब्रह्मचारी रहने की प्रतिज्ञा कर चुका हूँ।‘

    ‘तुम्हारे बाप भी तो बाल ब्रह्मचारी थे।‘

    दोनों के मुँह कानों तक फैल गए।

    ‘यार, तुम हर बात को नॉनसीरियस बना देते हो! मैं देश की कोटि-कोटि जनता के कल्याण के लिए अपील करता हूँ कि तुम गम्भीर बनो और अनुशासन में रहो।‘

    ‘अच्छा, फ़रमाइए, हुजूर शाहंशाह हरामी-उल-मुल्क!’

    ‘तो हे अर्जुन, सुनो! एक रोज़ प्रोफ़ेसर दीक्षित मेरे पास आकर गिड़गिड़ाने लगे।‘

    ‘इंग्लिश डिपार्टमेंट के हेड?’

    ‘हाँ बे, और कौन प्रोफ़ेसर दीक्षित है इस अखिल विश्व में?’

    ‘ग़लती हुई, सरकार!’

    ‘आते ही हाथ जोड़कर बोले— इस संसार में आप ही मेरी मदद कर सकते हैं। चन्द्रा सिन्हा के बिना मैं एक क्षण भी जिन्दा नहीं रह सकता। वह मामूली स्टूडेंट थी, लेकिन मैंने ही उसको टॉप कराया। मैंने उससे कई बार कहा है कि तुमको दो वर्ष में ही डॉक्टरेट दिला दूँगा। मैंने हर दर्जे के लिए पाठ्य-पुस्तकें और कुंजियाँ लिखकर जो लाखों रुपये कमाए हैं, उनको चन्द्रा के चरणों पर न्यौछावर करने को तैयार हूँ। लेकिन वह तो मेरी ओर देखती भी नहीं। वह आपके ही नाम की माला जपती रहती है। आप समझा देंगे तो कहना मान जाएगी!’

    ‘तुम तो बेटा, फिर डरे होगे? तुम्हारा एक पीरियड वह लेता जो है!’

    ‘हुश! सारा देश जिसकी पूजा करता है, वह उस पिद्दी से डरेगा? मैंने डाँटकर उससे पूछा-बच्चू, पाठ्य-पुस्तकों का रोब तो बहुत दिखाते हो, लेकिन क्या तुम इससे इनकार कर सकते हो कि तुम्हारी सभी पुस्तकें तुम्हारे शिष्यों की लिखी हुई हैं?’

    ‘फिर क्या बोलिस?’

    ‘बोलता क्या? थर-थर काँपने लगा। मेरे चरण पकड़कर प्रार्थना करने लगा कि मैं यह बात किसी से न कहूँ! मैंने कड़ककर उत्तर दिया- मैं जानता हूँ कि तुम बड़े-बड़े अफ़सरों और मंत्रियों की चापलूसी करते हो। तुमने अनगिनत लड़कियों की ज़िन्दगी इसी तरह चौपट की है। चन्द्रा सती-साध्वी नारी है, अगर आइन्दा तुमने उसको बुरी नज़र से देखा तो मुझे बाध्य होकर देश की शिक्षा-पद्धति में आमूल परिवर्तन करना पड़ेगा!’

    सहसा एक बुक स्टॉल ने उनका ध्यान आकर्षित किया, जिसके सामने एक जवान, गोरी और सुन्दर महिला खड़ी थी। उसका जूड़ा सर्प की कुंडली की तरह पीछे बँधा था और उसके पुष्ट शरीर पर गेरुए रंग की एक रेशमी साड़ी सयत्न लापरवाही के साथ लिपटी थी, जिससे वह कोई बौद्ध भिक्षुणी की तरह दिखाई दे रही थी। वह ‘ईव्स वीकली’ को ध्यानपूर्वक उलट-पुलटकर देख रही थी, परन्तु उसके मुख पर इस आशा का भाव था कि लोग उसको अत्यधिक आधुनिक और प्रबुद्ध समझें। वे भी मुँह से धीरे-धीरे सीटी की आवाजें निकालते हुए निकट आकर खड़ हो गए और कुछ पत्र-पत्रिकाओं को उलटने-पुलटने लगे। उन्होंने बारी-बारी से ‘रेखा’, ‘गोरी’, ‘रीडर्स डाइजेस्ट’, ‘इलस्ट्रेटेड वीकली’, ‘लाइफ’, ‘मनोहर कहानियाँ’, ‘फ़िल्मफेयर’, ‘जासूस महल’ आदि पत्रिकाएँ देखीं। बीच-बीच में वे उस महिला को घूरते जाते थे और कोई बात कहके ज़ोर से हँस पड़ते थे।

    ‘यार, लास्की भी अजीब आदमी था!’ गोरे ने कहा।

    ‘क्यों?’

    ‘तुम तो जानते ही हो कि ‘ग्रामर ऑफ पॉलिटिक्स’ लिखने के पहले वह मुझसे मिलने आया था।‘

    ‘कुछ-कुछ याद आ रहा है।‘ साँवला महिला की ओर तिरछी दृष्टि से देखकर

    ज़ोर से हँस पड़ा।

    ‘वह एक रात को चुपके से मेरे घर पहुँचा। गिड़गिड़ाकर बोला- जब तक आप मदद न करेंगे मेरी किताब लिखी नहीं जाएगी! मुझे दया आ गई कि आदमी शरीफ़ है और इसके लिए कुछ कर देना चाहिए। मैंने कहा- भाई, मेरे पास इतना समय तो नहीं कि तुम्हारे लिए पूरी पुस्तक लिख दूँ, हाँ, रोज़ मैं रात को दो घंटे बोल दूँगा और तुम नोट कर लेना।‘;

    ‘तैयार हुआ?’

    ‘अरे, बड़ा ख़ुश हुआ! मैंने दस दिन में ही पूरी किताब डिक्टेट करा दी। वह कहने लगा कि पुस्तक के असली लेखक आप ही हैं और उस पर आपका ही नाम जाना चाहिए, लेकिन मैंने जवाब दिया कि मैं सत्य और अहिंसा के देश का रहने वाला हूँ और मेरी सेवाएँ सदा निःस्वार्थ होती हैं।‘

    उस महिला ने शान से गर्दन घुमाकर उनकी ओर घूरती नज़र से देखा। फिर वह ‘ईव्स वीकली’ ख़रीदकर उपेक्षापूर्ण भाव प्रकट करती हुई चली गई। दोनों ने पलकों की छाँव में रहने दो… ज़ोर का ठहाका लगाया। फिर साँवला शीघ्र ही गम्भीर होकर गुनगुनाने लगा- ‘मुझे पलकों की छाँव में रहने दो…

    उन्होंने बाज़ार के दो और चक्कर लगाए। तब तक एक अँधेरा छा गया था। सभी दुकानें रंग-बिरंगी रोशनियों से जगमगाकर रहस्यमय स्वप्नलोक की तरह प्रतीत ने सिगरेट ख़रीदी। हो रही थीं। वे फिर उसी पान की दुकान पर आकर खड़े हो गए। इस बार साँवले ने सिगरेट ख़रीदी।

    ‘डियर, हम काफ़ी विदेश भ्रमण कर चुके। अब हमको प्यारे स्वदेश की भी सुध लेनी चाहिए’ गोरा जमुहाई लेकर बोला।

    ‘हाँ। मेरी भी पवित्र आत्मा स्वदेश के लिए छटपटा रही है।‘

    ‘लेट अस गो!’

    कुछ दूर चलकर वे ‘दी प्रिन्स’ में घुस गए। काउंटर पर बड़ी-बड़ी मूँछोंवाला एक अधेड़ व्यक्ति अत्यधिक तटस्थ और विनम्र भाव से बैठा था। उसने झुककर उनको सलाम किया। दाहिनी ओर चार केबिन बने हुए थे। पहले में चार व्यक्ति बैठे हुए थे और ज़ोर-ज़ोर से बातें करके ठहाके लगा रहे थे, जिनको देखते ही वे दोनों अत्यधिक गम्भीर हो गए और उनके चेहरों पर उच्चता और उपेक्षा के भाव अंकित हो गए। वे अन्तिम केबिन में जाकर बैठ गए।

    ‘क्या लोगे?’ गोरे ने पूछा।

    ‘देश का सामाजिक और नैतिक स्तर ऊँचा करना है, ब्रांडी ही चलने दो!’  ‘

    एक अद्धा और साथ में अभी… उबले हुए अंडे।‘ गोरे ने ऑर्डर दिया। जब बैरे ने सामान लाकर मेज़ पर रख दिये तो गोरे ने दो गिलासों में बराबर-बराबर मात्रा में शराब ढाली। साँवले ने चुपके से अपने गिलास की कुछ शराब गोरे के गिलास में उड़ेल दी और अन्त में झेंपकर हँसने लगा।

    “साले! तुम कायर हो!’ गोरा बिगड़ गया, “मैंने सोचा था कि प्राइम मिनिस्टर होने पर मैं तुमको भ्रष्टाचार निवारण समिति और जाति-भेद उन्मूलन-समिति का अध्यक्ष बना दूँगा। लेकिन जब तुम इतनी पी नहीं सकते तो अवसर आने पर घूस कैसे लोगे, जालसाज़ी कैसे करोगे, झूठ कैसे बोलोगे? फिर देश की सेवा क्या करोगे, ख़ाक?’

    दोनों ज़ोर-ज़ोर से ठहाके लगाने लगे। फिर उन्होंने सिगरेट सुलगा ली। वे शराब की चुस्की लेने के बाद अंडे खाकर कुछ देर तक अपनी नाक की सीध में महत्त्वपूर्ण और बुजुर्गाना ढंग से देखते थे और बाद में सिगरेट के गहरे कश खींचकर धुआँ छोड़ने लगते थे। जब वे बाहर निकले तो उनके चेहरे तमतमा रहे थे। फुटपाथों पर की भीड़ें हल्की पड़ गई थीं। गोरे ने हाथ ऊँचे करके अपने शरीर को तोड़ा।

    ‘तुम्हारी लीडरशिप का मज़ा न आया। आज तो कुछ रचनात्मक कार्य होना चाहिए!’

    ‘तो तैयार हो जाओ! मैं देश के चौमुखी विकास और विश्वशान्ति की स्थापना के लिए जो क़दम उठाने जा रहा हूँ, उसमें तुम्हारे जैसे नौजवान की मदद चाहिए! अगर तुम हिम्मत से काम लोगे तो माबदौलत ख़ुश होकर तुमको होम मिनिटर बना देंगे!’

    ‘जो आज्ञा, हुजूर!’

    ‘तो आओ बेटा, रिक्शे पर बैठो।‘

    कुछ देर बाद उनका रिक्शा एक ऐसी छोटी-सी बस्ती के पास रुका, जिसमें खपड़ैल और फूस के पन्द्रस-बीस छोटे-छोटे मकान थे। उस बस्ती में चौका बर्तन करनेवाले कमकर, कुछ रिक्शा चालक और इसी क़िस्म के मज़दूर रहते थे। वह स्थान विश्वविद्यालय से लगभग एक मील दूर शहर की सीमा पर स्थित था, इसलिए दूर तक कोई अन्य बस्ती नहीं दिखाई देती थी। नुक्कड़ पर पान की एक ऐसी दुकान थी, जिसमें अन्य छोटे-मोटे सामान भी मिलते थे। झोंपड़ियों से मद्धिम मटमैली रोशनियाँ झाँक रही थीं। रात अँधेरी थी, परन्तु मौसम बहुत सुहावना था और नि:शब्द चलनेवाली पवित्र, स्वच्छ और शीतल हवा शरीर और मन को पुलक से भर देती थी।

    वे पहली झोंपड़ी में ही घुसे। बाहर छोटे-से बरामदे में बाईं ओर दीवार से सटकर नाव की तरह गहरी एक पुरानी बँसखट पड़ी हुई थी। दाहिनी तरफ़ एक कोने में एक औरत चूल्हे के सामने बैठी खाना बना रही थी। वह चौंककर खड़ी हो गई, परन्तु गोरे को तत्क्षण पहचानकर सज्जनतापूर्वक हँसने भी लगी, जिससे उसके गालों के बीच में गड्ढे पड़ गए। उसकी उम्र चौबीस-पचीस की होगी। रंग क़रीब क़रीब काला था, परन्तु शरीर मज़बूत था और वह देखने में बुरी भी नहीं थी। वह एक मैली-कुचैली साड़ी पहने थी। और उसके आँचल की अस्त-व्यस्तता के कारण उसके उन्नत और पुष्ट उरोज़ दिखाई दे रहे थे। वह एक सीधी-सादी और सरल स्वभाव की स्त्री प्रतीत होती थी ।

    ‘बहुत दिन के बाद दरसन दिया?… बैठिए।‘

    ‘यहाँ बैठकर क्या होगा, जी?’ गोरा हँस पड़ा।

    ‘तो भीतर चलिए!’ वह भी हँसने लगी।

    ‘आज तुम्हारी सेवा में विश्व के एक महान नेता को लाया हूँ।‘

    ‘मुझे तो आपकी बात समझ में नहीं आती। कौन हैं ये?’ उसने अदा के साथ साँवले की ओर देखा।

    ‘ये अखिल विश्व लेखक संघ के अध्यक्ष हैं। इनको हर तरह से तुम्हें खुश करना है।‘

    ‘मेरे लिए तो सभी बराबर हैं। किसी तरह की शिकायत की बात नहीं मिलेगी।‘

    वह फिर हँसने लगी।

    ‘तुम्हारा दोपाया जानवर कहाँ है?’

    ‘कहीं घास चरने गया होगा!’ वह खिलखिला पड़ी।

    ‘तो क्या देर है?’

    ‘कुछ नहीं। दाल चुरती रहेगी।‘

    वह सहसा व्यस्त होकर चूल्हे के सामने बैठ गई। उसके होंठ अनजाने ही एक शिष्ट, हल्की मुस्कराहट से फैल गए थे। उसने एक लकड़ी निकालकर आँच होकर उठ खड़ी हुई। धीमी कर दी, बटलोई की दाल को करछुल से चलाया और अन्त में आश्वस्त

    गोरा बाहर बँसखट पर बैठा-ऊँघता-सा रहा। थोड़ी देर बाद औरत तेज़ी से बाहर आई और बटलोई को चूल्हे पर से उतारकर पुनः कोठरी में चली गई। अब बाहर बैठने की बारी साँवले की थी। इस बीच बरामदे के ताक पर रखी डिबरी की रोशनी किसी बीमार की फीकी मुस्कराहट की तरह टिमटिमाती रही।

    ‘दो-दो रुपये हुए न?’ बाहर निकलकर गोरे ने हँसकर पूछा।

    ‘आज तो चार-चार लूँगी! बड़ा परेशान किया है आप लोगों ने!’ वह आँखें

    मटकाकर बोली।

    ‘तुम तो पूँजीपति हो! तुमको किस बात की कमी है? अच्छा, आठ-आठ आना और। लेकिन दस रुपये का नोट है।‘  

    ‘रुपये तो मेरे पास नहीं हैं।‘

    ‘पान वाले से भुना लेते हैं।‘

    ‘लाइए, मैं ले आती हूँ।‘

    ‘अरे, तुम देश की महान कार्यकर्त्री हो, तुम कहाँ कष्ट करोगी? अभी आते हैं।‘  ‘अच्छी बात है।‘ वह हँसने लगी।

    वे झोंपड़ी से बाहर निकलकर पान की दुकान की ओर बढ़े। वह औरत बरामदे में खड़ी उनको देख रही थी।

    ‘साले, जूते निकालकर हाथ में ले लो!’ गोरे ने दुकान के निकट पहुँचकर फुसफुसाहट के स्वर में कहा।

    ‘क्यों?’ साँवला चौंक उठा।

    ‘मेरे आदेश का चुपचाप पालन कर। आज समय आ गया है कि हमारे नवयुवक बुद्धिमानी, मौलिकता, साहस और कर्मठता से काम लें! मैं पूर्ण अहिंसात्मक तरीक़े से उनका पथ-प्रदर्शन करना चाहता हूँ!’

    दोनों ने झटपट अपने जूते उतारकर अपने हाथों में ले लिये।

    ‘भाग साले! आर्थिक और सामाजिक क्रान्ति करने का समय आ गया है!’

    वे सरपट भाग चले। साथ में वह ‘ही-ही’ हँसते भी जा रहे थे। वह औरत झोंपड़ी के बाहर निकल आई थी और छाती पीट-पीटकर विलाप करने लगी थी, ‘अरे, लूट लिया हरामी के बच्चों ने! उन पर बज्जर गिरे…’

    झोंपड़ियों से कुछ व्यक्ति निकलकर युवकों के पीछे दौड़े। तारकोल की सड़कें जनशून्य थीं। दोनों युवक अरबी घोड़ों की तरह दौड़ रहे थे। वे कभी बाएँ घूम जाते और कभी दाएँ। पीछा करनेवालों में से एक फुर्तीबाज़ व्यक्ति तीर की तरह उनकी ओर बढ़ा आ रहा था। वह समीप आता गया। अब वह समय दूर नहीं था जब वह आगे लपककर साँवले युवक को पकड़ लेता, जो पीछे पड़ गया था। परन्तु सहसा गोरा रुककर एक ओर खड़ा हो गया। फिर फुर्ती से आगे बढ़कर उसने छुरा उस व्यक्ति के पेट में भोंक दिया, जो ‘हाय मार डाला’ कहके लड़खड़ाकर गिर पड़ा।

    इसके बाद दोनों पुनः तेज़ी से भाग चले। जब बिजली का खम्भा आया तो रोशनी में उनके पसीने से लथपथ ताक़तवर शरीर बहुत सुन्दर दिखाई देने लगे। फिर वे न मालूम किधर अँधेरे में खो गए!

    Leave a Reply

    Your email address will not be published. Required fields are marked *

    1 mins
    WordPress Center Ankara Escort: Beypazarı Escort, Pursaklar Escort, Etimesgut Escort İstanbul Escort: Esenyurt Escort, Bahçelievler Escort, Maltepe Escort Bursa Escort: Gürsu Escort, Keles Escort, İznik Escort What are the best budget smartphones available in 2025? Reason Why Everyone Love Travel Doubts About Lifestyle You Should Clarify Image Toggle – Addon for WPBakery Page Builder Google Maps Neighborhood Walker for WordPress Slick Slider Addon for WPBakery Page Builder WP Story Premium – Instagram Style Stories For WordPress Crypto Swap – Cryptocurrency Exchange Script and Widget on Ethereum Blockchain VIP Shop : Advanced WooCommerce VIP Plugin Woo Advanced Product Shipping Sonoran – Responsive WordPress Coming Soon Plugin Ultra Portfolio – WordPress Sharp Gallery for WordPress