आज से आई.पी. कॉलेज में शुरू हो रहा है ‘हिंदी महोत्सव’

आज से ‘हिंदी महोत्सव’ की शुरुआत हो रही है. दिल्ली विश्वविद्यालय के आई.पी. कॉलेज और वाणी फाउंडेशन के संयुक्त तत्वाधान में दो दिनों का यह महोत्सव हिंदी को लेकर दिल्ली में अपनी तरह का पहला ही आयोजन है. भारतीय भाषाओं को लेकर दिल्ली में फेस्टिवल होते रहे हैं लेकिन यह परिकल्पना बिलकुल नई है कि हिंदी का अपना फेस्टिवल हो, हिंदी का अपना उत्सव हो. अभी तक हिंदी लिटरेचर फेस्टिवल्स में अपनी जगह तलाश करती रही है लेकिन इस बार हिंदी के अपने महोत्सव की परिकल्पना उत्साहवर्धक है और स्वागतयोग्य है. इसको लेकर इतनी उत्सुकता है कि मैंने दो तीन दिन पहले देखा कि ट्विटर पर ‘हिंदी महोत्सव’ ट्रेंड कर रहा था. अंग्रेजी के अखबार टाइम्स ऑफ़ इण्डिया ने सबसे पहले इसकी खबर प्रकाशित की. सबसे बड़ी बात यह है कि दिल्ली विश्वविद्यालय के एक एलिट समझे जाने वाले कॉलेज में हिंदी महोत्सव का आयोजन हो रहा है. एक ज़माना था जब डीयू कैम्पस में हिंदी को शर्म की भाषा समझा जाता था. अब वह गर्व की भाषा बनती जा रही है. हिंदी के इस ऐतिहासिक आयोजन का हिस्सा बनिए और गर्व से कहिये कि आप हिंदी में बोलते-सुनते-लिखते हैं.

दो दिनों के इस महोत्सव में उद्घाटन सत्र सहित कुल 24 सत्र हैं जिसमें हिंदी की हर प्रकार की गतिविधि को समेटने की कोशिश उदारता के साथ की गई है. हिंदी का मतलब सिर्फ साहित्य ही नहीं होता है. हिंदी समाज विज्ञान, अनुवाद, नाटक, सिनेमा आदि माध्यमों की अभिव्यक्ति का भी प्रमुख माध्यम रही है. हिंदी महोत्सव के सत्रों में इस बात की पूरी कोशिश की गई है कि हिंदी से जुड़ा कोई भी पहलू छूटने न पाए. मसलन पहली बार मैंने किसी फेस्टिवल में प्रकाशन के नए आयामों के ऊपर एक सत्र देखा है जिसमें हिंदी के सभी प्रमुख प्रकाशक अपने अनुभवों को साझा करेंगे. हिंदी भाषा शिक्षण का एक जरूरी सत्र भी है तो भारतीय भाषाओँ में राजनीति विमर्श का भी एक दिलचस्प सत्र है. ‘आई टू हैड ए लव स्टोरी’ के लेखक रविंदर सिंह से बातचीत का भी एक सत्र है, संयोग से इस पुस्तक सहित इस लेखक की सभी पुस्तकों का अनुवाद मैंने ही किया है. इस में एक सत्र में मुझे भी सुरेन्द्र मोहन पाठक के साथ शनिवार की दोपहर बातचीत का मौका मिलने वाला है ‘क़त्ल की किस्सागोई’ के सत्र में.

हिंदी के गंभीर, लोकप्रिय सभी माध्यमों में काम करने वाले लोग एक साथ जुटेंगे, हिंदी के नए-पुराने वितान को लेकर चर्चा करेंगे. यह अनुभव यादगार होगा. ऐसा मेरा मानना है.

प्रभात रंजन

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