रविंदर सिंह लेखक थे अब कंपनी बन गए!

अभी वैलेंटाइन डे पर रविंदर सिंह का उपन्यास हिंदी में रीलिज हुआ था- ये प्यार क्यों लगता है सही! होली आते-आते उनसे जुड़ी एक और खबर आ गई. उन्होंने ब्लैक इंक नाम से एक प्रकाशन उद्यम शुरू किया है जिसमें अंतरराष्ट्रीय प्रकाशन समूह हार्पर कॉलिन्स उनका साझीदार होगा. समकालीन अंग्रेजी लेखन में एक फिनोमिना चेतन भगत हैं तो दूसरे रविंदर सिंह हैं. रविंदर ने रोमांस लेखन में बड़ा मुकाम बनाया है. मैंने उनके लगभग सारे उपन्यासों के अनुवाद किये हैं और मैं आज तक उनकी इस असाधारण सफलता का कारण नहीं समझ पाया. हर उपन्यास के बाद यही लगता रहा कि अब रविंदर सिंह का जलवा उतर जायेगा लेकिन वह और बढ़ता गया. इतना कि उनका नया उपन्यास तो मुझे भी बहुत अच्छा लगा. वे बिक्री के सारे फोर्मुले जानते हैं, लिखने के जानते हों या नहीं.

बहरहाल, अब रविंदर सिंह सिर्फ लेखक नहीं कंपनी बन चुके हैं. यह नई कम्पनी साल में नए नए ढंग से लिखने वाले तीन लेखकों की किताबें प्रकाशित करेंगे. इस श्रृंखला की पहली किताब की प्री लॉन्च बुकिंग शुरू भी हो गई है. किताब का नाम है ‘थ्री मार्केटियर्स’, लेखक का नाम है अजीत शर्मा. यह अपने ढंग का पहला ही वेंचर है जिसमें लेखक ने लेखकों की कंपनी बनाई और देश का एक बड़ा प्रकाशक उन किताबों की मार्केटिंग करेगी. रोमांस लिखने के बाद रोमांस बेचने का आनंद उठाएगा.

बाजार किस तरह से किसी भाषा के साहित्य को एक बिकाऊ प्रोडक्ट में बदल देता है यह इसका बहुत अच्छा उदाहरण है. एक जमाने तक देश में अंग्रेजी को श्रेष्ठ लेखन के लिए जाना जाता था, इस भाषा में लिखे को श्रेष्ठता के मानक के तौर पर देखा जाता था. आज अंग्रेजी चेतन भगत और रविंदर सिंह के उपन्यासों के लिए जाना जाता है. अंग्रेजी आज लोकप्रिय लेखन की सराय बनकर रह गई है. चिप्स और कोक की तरह बिकने वाली किताबों की सराय, जिनको जाने कौन पढता है लेकिन बिकती खूब हैं. लेखकों को खूब माल दे जाती हैं. प्रकाशक खुश, दुकानवाले खुश, ऑनलाइन दुकान वाले खुश. सब खुश हो जाएँ तो अंग्रेजी में किताब अच्छी मानी जाती है.

बहरहाल, अंग्रेजी में कुछ और नए लखकों को इस माध्यम से मौका मिलेगा, मंच मिलेगा, पैसा मिलेगा, शोहरत मिलेगी. इसलिए इस उद्यम का स्वागत होना चाहिए.

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