अख्तरी:हमें इल्म ही न हो कि हमने संगीत सीख लिया!

यतीन्द्र मिश्र लिखित-सम्पादित किताब ‘अख्तरी: सोज़ और साज का अफ़साना’ किताब पर संगीत पर रसदार लेखन करने वाले और इन दिनों अपनी किताब ‘कुली लाइंस’ के उत्सुकता जगाने वाले लेखक प्रवीण कुमार झा की टिप्पणी पढ़िए- मॉडरेटर

=====================================

हालिया एक संगीत चर्चा में बात हुई कि भारत में संगीतलेखन का अर्थ है बस किंवदंती, किस्से और गप्प गढ़ना। कि फलाँ शराब में धुत्त रहते, फलाँ ने तबला उठा कर फेंक दिया, फलाँ बाई जी के पास रहते। पाश्चात्य संगीत लेखन में तत्त्व की चर्चा होती है, संगीत के स्वरूप और उसकी बारीकी पर बात होती है। संगीत में छुपे विज्ञान की चर्चा होती है।

यह बात पूरी तरह ग़लत नहीं। विलायत हुसैन ख़ान, बी. आर. देवधर, कुमार प्रसाद मुखर्जी से लेकर अब नमिता देवीदयाल तक ने कई किस्सेकहानियाँ सुनाई। मुझे भी सुननेसुनाने में आनंद आता है, और ऐसे संकलन इकट्ठे हैं। कहीं कहीं उन किस्सों से ही संगीत में रुचि भी बनी। लेकिन संगीत के तकनीकी पक्ष को रोचक ढंग से प्रस्तुत कम किया गया है। हिंदुस्तानी संगीत और रागों की व्याख्या पर भारीभरकम किताबें बनती रही हैं। बॉनी वेड, ओंकारनाथ ठाकुर, श्रीकृष्ण रतण्जन्कर, रामाश्रय झारामरंग’, मनोरमा शर्मा आदि कई लोगों ने लिखी है। सरल भाषा में हाथरस से किताबें निकली लेकिन उनके वितरण पर संदेह है कि कहाँकहाँ पहुँच पायी। संगीत के शोधी किस्सेकहानी ख़ास नहीं पढ़ते, और शौकिया लोग तकनीकी पक्ष से दूर रहते हैं। तो यह दोनों पाठकम्युचुअली एक्स्क्लुजिव सेटहैं।

यहीं एक पुल स्थापित करने की आवश्यकता है; कि रोचकता भी कायम रहे और बारीक बात भी हो। यह कार्य लेकिन धुनी लोग ही कर सकते हैं, जिन्हें साहित्य, संगीत और इतिहास, तीनों में रुचि हो। गजेंद्र नारायण सिंह जी के बाद हिन्दी में यतींद्र मिश्र जी में वही बात नजर आती है।लता सुर गाथासुगम संगीत पर लेखन था, और वहाँ भी उन्होंने एकएक गीत में छुपे रस और सुर का बख़ान किया, साथसाथ बातेंकिस्से भी चलती रही।

अख़्तरी: सोज़ और साज़ का अफ़सानामें वह बेगम अख़्तर के जीवन से गुजरते हुए बीचबीच में हमें संगीत के महीन बातों को बताते चलते हैं। पुस्तक का प्रथम भाग तो एक रोचक दस्तावेजीकरण है, जिसमें उन पर लिखे अंग्रेज़ी लेखों को भी अनुवाद किया गया। कई संदर्भों की पुनरावृत्ति भी होती है, लेकिन अलगअलग लेखकों के शब्दों में पढ़ कर वह आनंदित भी करता है और संदर्भ को सशक्त भी करता है। मैंने स्वयं एक छोटा लेख लिखा है और यतींद्र जी से बातचीत भी होती रहती है, तो एक बार सोचा पूछ लूँ कि आपने दुबारा लिखी बातों की काटछाँट क्यों नहीं की? लेकिन पढ़तेपढ़ते मैं उनके संपादन का कायल हो गया। जैसे गाने का मुखड़ा हर बार नया अंदाज़, नयी नज़ाकत, नयी नजर लिए होता है, वैसे ही बेगम पर एक सी बातें बारबार पढ़ कर हम झूम उठते हैं। यह पठनीयता भी बढ़ाता है कि आप अगर कुछ भूल गए तो वह दुबारा किसी और प्रसंग में आपके सामने है। और अगर याद है, तो वह रोचक बात पुन: दूसरे प्रसंग में पढ़ कररिलेटकर पाते हैं। यह संपादन का कौशल है।

दूसरे भाग में छब्बीस छोटेबड़े प्रसंग हैं, जैसे मंच पर अलगअलग वक्ता आकर बेगम से जुड़े संस्मरण सुना रहे हों। यह पुस्तक कोलाइवबना देता है, जैसे बेगम सामने बैठी हो, महफ़िल चल रही हो, और वाहवाही हो रही हो। मैंने संगीत में जितनी पुस्तक पढ़ी है, उसमें एक अमरीकी लेखक पीटर लवेज्जोली इसी अंदाज में लिखते हैं। जैसे रंगमंच हो, सभी लेखक पात्र हों, अपनेअपने संवाद कह रहे हों, साक्षात्कार चल रहे हों।

संपादक यतींद्र जी ने एक और गज़ब का प्रयोग किया है। पुस्तक का आखिरी लेख शुभा मुद्गल जी का है, शीर्षक है– ‘बेगम अख़्तरी: गायकी का पाठ मैं चकराया कि गायकी का भला पाठ कैसा होगा? यह पुस्तक का सबसे प्रिय लेख रहा। एक नौसिखिया संपादक जरूर इसे पहला लेख बनाता। आखिर शुभा मुद्गल जी समकालीन लोकप्रिय गायिका हैं, जिन्हें संगीत में हल्कीफुल्की रुचि वाले भी जानते हैं। पहला नहीं तो दूसरा या तीसरा लेख तो बना ही लेता। लेकिन यतींद्र जी ने इसे अंतिम लेख बनाया। यह मास्टरस्ट्रोक है!

शुभा जी किस्सेप्रसंगों से इतर बेगम की एक एल्बम लेकर उसके बारह गीतों की शल्यक्रिया करती हैं। यह लेख पढ़ते हुए मैं वही गीत सुनने लगा, और शुभा जी के लिखे से मिलाने लगा। जैसे कोई क्लास चल रही हो और शिक्षक ने बारह प्रश्न दिए हों, हमें उत्तर समझाया जा रहा हो। संगीत में ऐसे ही लेखों की जरूरत है कि जिसे संगीत का शून्य ज्ञान हो, उसे भी समझाया जा सके। मुझे छुटपन में गणित से भाग कर छतों पर पतंग उड़ाना याद आता है, जब पूछा जाता कि गिन कर बताओ अलगअलग रंगों के कितने पतंग हैं? हमें पता ही नहीं लगता कि यहाँ भी गणित ही पढ़ाया जा रहा है। यतींद्र जी ने उसी अंदाज़ में यह किताब सजायी है कि जब बेगम में लोग डूब चुके हों, तब शुभा जी का लेख आए और खंडखंड कर एकएक स्वर स्पष्ट कर दे। हमें इल्म ही हो कि हमने संगीत सीख लिया!

========

पुस्तक वाणी प्रकाशन से प्रकाशित है। 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

1 mins
WordPress Center Ankara Escort: Beypazarı Escort, Pursaklar Escort, Etimesgut Escort İstanbul Escort: Esenyurt Escort, Bahçelievler Escort, Maltepe Escort Bursa Escort: Gürsu Escort, Keles Escort, İznik Escort What are the best budget smartphones available in 2025? Reason Why Everyone Love Travel Doubts About Lifestyle You Should Clarify WooCommerce Product Condition Plugin WP Custom Cursors | WordPress Cursor Plugin ShortcodeHub – MultiPurpose Shortcode Builder WooCommerce Sequential Order Automatic Video Creator Plugin for WordPress Fullscreen Parallax WordPress Plugin Elegant Tabs for Elementor YellowPencil – Visual CSS Style Editor Viavi Flickr Album Gallery Sales Countdown for WooCommerce