पूनम दुबे की कोपेनहेगन डायरी

पूनम दुबे कोपेनहेगन में रहती हैं। उन्होंने यूरोप के अलग-अलग शहरों से जुड़े अपने कई संस्मरण लिखे हैं जो जानकी पुल पर प्रकाशित हैं। इस बार उन्होंने बहुत दिनों बाद डेनमार्क की जीवन शैली पर कुछ लिखा है। एक नायाब गद्य-

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वह बॉलकनी में रिक्लाइनर कुर्सी पर लेटी घूप सेंक रही थी. हालाँकि मेरे लिए अब भी बाहर सर्दी का मौसम चल था. लेकिन यहाँ डेनिश लोगों के लिए सूरज की इनायत के लिए सोलह डिग्री ही काफ़ी है. जब राशनिंग में सूरज की किरणें मिलती हैं तो काम चलाना ही पड़ता है. मैं उसका चेहरा ठीक से देख नहीं पाई, लेकिन हाथ-पैर देखकर अंदाजा लगा लिया कि यह लोकल डेनिश ही है. स्किन का रंग व्हाइट पेल था, एक हाथ में सिगरेट और दूसरे में फ़ोन। बालकनी का रूप रंग भी बदला सा लग रहा था, जैसे कि मेकओवर मिल गया हो. कई सारे फूलदान और रंगबिरंगे लाइटों की लड़ियाँ नोटिस की मैंने, जोनस की बालकनी को मैंने कभी ऐसा सजा नहीं देखा. शायद यह जोनस की मेहमान या उसकी गर्लफ्रेंड हो। पहले कभी नहीं देखा इस लड़की को यहाँ। खैर मैं तैयार थी अपनी रनिंग के लिए इसलिए बिना हाय हेलो किये वहां से चलती बनी। पूरे दस दिन बाद अपना क्वारंटाइन कारावास पूरा कर घर से बाहर निकली थी. मौसम थोड़ा ठंडा था लेकिन हवा की ताज़गी अपने सीने के भीतर भरने को मैं न जाने कब से बेताब थी. लगभग पांच महीने अपने देश में बिताकर वापस लौटी थी. इस बार अचार और मसालों के साथ उदासी और मायूसी भी साथ ले आई थी. इस कोरोना काल में वहां जो देखा और महसूस किया वह मन पर गहरे-काले बादलों सा छाया था. दिसम्बर के महीने में जब यहाँ से गई थी तो सब कुछ ग्रे रंग में रंगा था और जब वापस आयी तो आस-पास हरियाली के निशान दिखने लगे थे. घर से कुछ ही दूरी पर एक बड़ा ग्रीन एरिया है. यहाँ अक्सर हम वाक या रन के लिए आते हैं. इसी एरिया के कुछ हिस्सों में सेमेट्री भी हैं. एक के बाद एक लाइन से बनी लोगों की कब्र हैं. पास ही में एक तालाब और चर्च भी है. जीवन और मृत्यु एक साथ. कभी-कभार लोग तालाब के पास पिकनिक करते दिख जाते हैं तो कभी वहीं थोड़ी ही दूरी पर लोग अपने प्रियजनों की समाधि पर फूल चढ़ाते दिखते हैं. ‘जो यहाँ लोग इन समाधियों में सोये है क्या कभी इस पाथ पर वह भी दौड़े होंगे? क्या उन्होंने कभी इस तालाब के पास पिकनिक मनाई होगी? दौड़ते हुए मेरी नज़र उन सेमेट्रीज पर जाती है। पेड़ों पर आये नए नवेले हरे पत्ते, घासों पर सितारों सी बिखरी अनगिनत सफ़ेद डेजी और चेरी के ग़ुलाबी कोमल फूल मन में फैले ग्रे रंग को रंगने की कोशिश कर रहे थे.  फ़िर भी न जाने क्यों मन उदासी और डर के घेरे में जी रहा था. कोरोना काल में शायद सभी का यही हाल था.

मैं अपनी रनिंग से वापस लौटती हूँ, देखा वह अब भी वहीं लेटी थी. और शायद यह उसकी तीसरी या चौथी सिगरेट थी. सुस्ताने के लिए मैं अपनी बालकनी में रखे चेयर पर बैठ जाती हूँ. लेकिन उसके सिगरेट की गंध से खीझ कर भीतर चली जाती हूँ. मेरे और उसकी बालकनी में कुछ ही फ़ीट का फासला है. क्यों पीते हैं लोग इतने सिगरेट जानते हैं इतना हानिकारक होता है फिर भी ! मैंने हमेशा से ही न जाने क्यों सिगरेट से एक दूरी सी बनाए रखी. सिगरेट पीना मुझे कभी भी ग्लैमरस नहीं लगा. इसीलिए तो जिंदगी में कभी ट्राई तक नहीं किया। शायद इसीलिए मैंने सिगरेट पीने वाले लड़कों को डेट तक नहीं किया. यह मेरी अपनी चॉइस थी लेकिन अब सिगरेट और तंबाकू से एक पर्सनल दुश्मनी सी है. कुछ दस साल पहले मैंने पापा की तंबाखू की लत छुड़वा दी यह सोचकर की तंबाखू उनकी सेहत के लिए सही नहीं। उस समय यह नहीं पता था कि पापा को एक बार नहीं दो बार कैंसर का सामना करना पड़ेगा. चार सालों से कैंसर से लड़ रहे हैं पापा  अपनी उम्र से ज्यादा ही बूढ़े हो गए हैं. कैंसर ने हमारे जीवन का एक बड़ा स्पेस ऑक्युपाई कर लिया है. कभी-कभी सोचती हूँ शायद छुड़वाने में देर कर दी.

बहरहाल लंबे और गर्म दिनों का सिलसिला शुरू हो गया था कोपनहेगन में, मैं भी जिंदगी को फिर से रूटीन में लाने की कोशिश करने में लगी थी. मन बार-बार कहता कि कुछ नया सीखना चाहिए इसलिए बड़े लम्बी सोच विचार के बाद फैसला लिया क्यों न यहाँ की भाषा को सीखने का एक मौका दूँ. करीब दो साल हो गए रहते हुए, बेसिक ज्ञान तो होना ही चाहिए। जब डेनमार्क आयी थी तब पहली बार डेनिश भाषा को सुनकर लगा था कि शायद यह भाषा कभी न सीखूं और सच तो यह है कि कभी ज़रूरत ही नहीं पड़ी. यहाँ ज्यादातर लोग अंग्रेजी बोल लेते है, रोजमर्रा की जिंदगी में काम चल ही जाता है. डेनिश सीखना इतना आसान नहीं अपने कई विदेशी दोस्तों से सुना था. एन्टे ने तीन साल में डेनिश सीखी है, लेकिन अब भी डेनिश में बात-चीत करना वह कुछ ख़ास पसंद नहीं करता। जबकि एन्टे खुद ही डच, भला डच कौनसी बड़ी आसान भाषा हो गई.

आते-जाते कई बार मैंने उसे वहीँ बालकनी में बैठे देखा लेकिन कभी बात करने की पहल नहीं की.

यह भी कोरोना का एक इफेक्ट ही समझो, मानो हम लोगों से कम्युनिकेट करना भूल गए हों, डिजिटल कनेक्शन अब ज़्यादा कम्फर्टेबल और आसान हो गए हैं…

खैर यहाँ के लोकल लोगों से बातचीत की पहल खुद ही करनी होती है, दरअसल डेनिश लोग सकुचाते बहुत है. हाँ लेकिन जब दारु जम के पी ली तो इनका सकुचाना थोड़ा कम हो जाता है. एक शाम मैं अपनी बालकनी में बैठी चाय पी रही थी और वह साइकल पर सवार शायद ऑफिस से लौट रही थी. उसने काले रंग की ड्रेस पहनी थी. ड्रेस लम्बी थी इसीलिए उसने ड्रेस को उठाकर अपने घुटनों से ऊपर बांधा हुआ था. इतना तो सन में बैठती है लेकिन फिर भी अभी तक टैन नहीं हुई  इसकी स्किन मैंने मन ही मन सोचा. पहली बार मैंने उसे इतने क़रीब से देखा। उसने अपनी साइकल पार्क की और मेरी और से चलते हुए अपने घर की ओर बढ़ ही रही थी कि मैंने उसे आवाज दे दी. मैंने कहा हेलो.

उसने और क़रीब आकर जवाब दिया हाय.

“आप कैसी हैं? आपको पहले यहाँ देखा नहीं?”

“मैं यहाँ अभी कुछ तीन महीने पहले शिफ़्ट हुई हूँ. और तुम?”

 “हम तो यहाँ दो साल से है, लेकिन मैं पाँच महीने इंडिया में थी, शायद उसी दौरान तुम शिफ़्ट हुई.”

मुझे वह हम उम्र लगी. गोल्डन ब्लॉन्ड बाल और हरी आँखे थी उसकी। चेहरे पर उसके एक लंबी मुस्कान थी लेकिन आँखों में उदासी साफ़ झलक रही थी. होंठों की मुस्कराहट आँखों में उतर कर नहीं आ रही थी. लोकल डेनिश लड़की ही थी जैसे कि मैंने अंदाजा लगाया था. मन ही मन सोचा इसके साथ थोड़ी दोस्ती कर लूँ हो न हो मैं अपनी डेनिश भाषा की प्रैक्टिस ही कर लूंगी.

पहल करते हुए मैंने उसे एक दिन कॉफ़ी के लिए इन्वाइट किया. पता चला वह यहाँ अकेले रहती है और उसका नाम एलेना है.

उसकी गुड़ियों सी खूबसूरती और स्माइल के पीछे छुपी उदासी मुझे कुछ खटकी. कॉफी मीटिंग के बाद धीरे-धीरे हमारी जान पहचान हो गई. आते-जाते उसके साथ थोड़ी बहुत बातें हो जाती. मैं उसे हिन्दुस्तानी कल्चर के बारे में बताती और वो मुझे डेनिश. मैं जब कभी डेनिश में कुछ बोलती तो मुस्कुराकर वह मुझे करेक्ट करती. कभी-कभी तो मेरे उच्चारण पर वो खूब हंसती है.

एलेना का इतना सिगरेट पीना मुझे पसंद नहीं लेकिन वह उसकी अपनी चॉइस है. बातों ही बातों में एक दिन उसने मुझसे पूछा, तुमने कभी सिगरेट नहीं पी? शायद उसने भांप लिया कि मुझे सिगरेट नहीं पसंद.

“नहीं मैंने मुस्कराते हुए जवाब दिया.”

“अच्छा है, मैं तो तेरह साल की थी तभी से शुरू कर दिया”

“इतनी जल्दी, क्यों?”  मेरे दिमाग़ ने गणित लगाना शुरू कर दिया इसका मतलब, उसे सिगेरट पीते करीब बीस साल तो हो ही गए हैं.

“लंबी कहानी है. कई बार कोशिश की लेकिन कुछ न कुछ ऐसा हो जाता है कि इसी का सहारा बचता है. चार साल पहले मेरी लत पूरी तरह से छूट गई थी, लेकिन अपने छह साल पुराने रिश्ते के टूटने के बाद फिर से लत पड़ गई. तब से ना किसी और से रिश्ता बना, न इससे रिश्ता छूटा.”

एक दिन हम साथ में वाक करने गए. मौसम अच्छा था. वाक करते-करते हम पास वाले पार्क में गए. कुछ देर तक इधर उधर की बातें करते रहे. एलेना डिज़ाइनर है वह कपड़े डिज़ाइन करती है.

“तुम कभी माँ बनने के बारे में सोचती हो? तुम लोगों को बच्चे चाहिए?” उसने पुछा. डेनिस लोग सीधे सवाल पूछने से कतराते नहीं है. उन्हें जो पूछना होता है वह  साफ सुथरी तरीके से पूछते हैं घुमाना फिराना उन्हें नहीं पसन्द. और जवाब भी बिना किसी लाग लपेट के देते हैं.

‘नहीं, मैंने अपने आपको मदर के रोल में देखा ही नहीं.” पता नहीं अचानक से यह सवाल कहाँ से आ गया. मेरे पास कोई ख़ास जवाब नहीं था.

“और तुम?”

 “मुझे चाहिए बच्चे, लेकिन डरती हूँ कहीं अपनी माँ जैसी न बन जाऊं?”

 “मतलब?”

“मेरी माँ ने मेरा और मेरी बहन का इस्तेमाल किया केवल मेरे पापा के साथ रहने के लिए. वह उन्हें ब्लैकमेल किया करती थीं ताकि मेरे पापा उन्हें छोड़ कर न जाए.”

सुनकर मुझे अटपटा सा लगा. चाहती थी कि कोई और सवाल न करूँ लेकिन रोक न पाई.

“अब कहाँ है तुम्हारी माँ?”

वह अपने नए पति के साथ रहती हैं, जब मेरे पिता ने उनके साथ रहने से इंकार कर दिया तो मेरी माँ ने दूसरी शादी कर ली. उनके दूसरे पति ने मुझे मोलेस्ट किया और जब मैंने अपनी माँ को बताया तो वह नहीं मानी। उसने उसी का साथ दिया इसीलिए चौदह साल की उम्र मैं घर से भाग गई थी.

एलेना की बातें सुनकर मैं शॉक में थी समझ नहीं आ रहा था क्या बोलूं. उसके चेहरे पर कोई भाव नहीं था, एकदम शांत और आँखें उदास, और होंठों पर वही स्माइल.  मैंने आगे कुछ नहीं पूछा. हम डेनिश भाषा और मौसम की बातें करने लगे.

चलते-चलते हम समुद्र के किनारे पहुंचे वहां से फिर पार्क के भीतर. आस-पास कई सारे बेरिस के पेड़ थे. कुछ ब्लैक बेरीज उसने पेड़ो से तोड़कर मुझे थमा दिए.

“खाकर देखो?” यह कहते वह कुछ ब्लैक बेरीज़ मुँह में डाल लेती है. उफ्फ खट्टें हैं. कुछ दिन बाद हम आएंगे यहाँ बेरीस पीकिंग के लिए.

“जरूर” मैंने कहा. मैंने भी कुछ ट्राय किए. मुझे तो ठीक ही लगे.

“मैं सिगरेट छोड़ना चाहती हूँ. लेकिन बहुत मुश्किल है. कई बार कोशिश की.”

“सिगरेट छोड़ना आसान तो नहीं, लेकिन चाहो तो छोड़ भी सकती हो. सेहत के लिए अच्छा नहीं होता.”

“बस एक बार सिगरेट छूट जाए तो मैं स्पर्म डोनर के जरिये प्रेग्नेंट होना चाहूंगी. अब मैं राइट मैन का और इन्तजार नहीं कर सकती. मुझे आदमियों से चिढ़ सी होने लगी है.”

“सिंगल मदर होना मुश्किल होता है?”

“होता तो है, लेकिन मेरे एक दोस्त ने यही किया और अब वह खुश है. लेकिन फिर अपनी मां के बारे में सोचती हूँ. मुझे नहीं पता नॉर्मल मदर कैसी होती है. मैं कैसी माँ बनूंगी मुझे पता नहीं.”

मैंने कुछ कहा नहीं सिर्फ उसे सुनती रही.

“सोचती हूँ अगर मैंने सिगरेट छोड़ दी तो कहीं मेरा वेट न बढ़ जाए, और आदमियों को मोटी लड़कियां नहीं पसन्द… और मेरे ड्रेसस भी तो फिट नहीं होंगे मुझे! हालाँकि सिगरेट छोड़ना भी ज़रुरी है. अगली बार जब तुम मुझे कभी सिगरेट पीते देखो तो मुझे डांट सकती हो.”

मैं उसकी बाते सुन रही थी, कुछ पल के लिए ऐसा लगा, वह मुझसे नहीं अपने आप से बातें कर रही हो. मानो अपने आप को ही कुछ समझा रही हो या बता रही हो.  न जाने क्यूँ लेकिन मुझे शेक्सपीयर के हैमलेट की ये लाइनें  ‘टू बी ऑर नाट टू बी’ याद आ गईं. वह भी तो प्रिंस ऑफ़ डेनमार्क था.

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