गर्व की बात है कि बिहार को सबसे दूरंदेशी मुख्यमंत्री मिला है!

हमें गर्व करना चाहिए कि हमें एक दूरंदेशी मुख्यमंत्री मिला है- नीतीश कुमार. आज सुबह उठा तो प्रधानमंत्री के साथ उनकी मुस्कुराती तस्वीर अखबारों में दिखाई दी. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ वे न केवल भोज में शामिल हुए बल्कि बल्कि अलग से उनके साथ बातचीत भी की. मुख्यमंत्री जी का कहना है कि गंगा के बाढ़ के मुद्दे पर बातचीत की. बागमती, कोशी की बाढ़ पर नहीं की, जिसके कारण बिहार की बड़ी आबादी तबाह होती रही है. शायद अगली बार करें. तब तक बाढ़ भी आ जाएगी और राहत की मांग और पूर्ति का मुद्दा रहेगा.

लेकिन बड़ी बात है कि वे मोदी जी के साथ भोज में शामिल हुए. विपक्ष का कोई नेता मॉरिशस के प्रधानमंत्री के स्वागत में आयोजित भोज में शामिल नहीं हुआ. नीतीश जी हुए. वही नीतीश जी जिन्होंने 2013 में बिहार में नरेंद्र मोदी के विरोध में भोज कैंसिल कर दिया था. जिनके विरोध में उन्होंने एनडीए के साथ 15 साल से भी पुराना साथ छोड़ दिया. उन्हीं नरेन्द्र मोदी की केंद्र में सरकार बनने के 3 साल पूरे होने के अगले ही दिन वे भोज में शामिल हुए और उनके साथ मुस्कुराती हुई तस्वीर भी खिंचवाई.

नरेन्द्र मोदी देश की सबसे अधिक चिंता करने वाले प्रधानमंत्री हैं तो नीतीश जी बिहार की सबसे अधिक चिंता करने वाले मुख्यमंत्री. दूरंदेशी तो हैं ही. एनडीए छोड़कर लालू जी की पार्टी के साथ गए. तीन साल से मुख्यमंत्री हैं. सिवाय शराबबंदी के कुछ नहीं कर पाए. लालू जी का परिवार इस समय भ्रष्टाचार के आरोपों में घिरा हुआ है. छापे पड़ रहे हैं. मोदी जी और उनकी सरकार की सबसे बड़ी उपलब्धि भ्रष्टाचार मुक्त होना मानी जा रही है. नीतीश जी की भी सबसे बड़ी उपलब्धि भ्रष्टाचारमुक्त होना रही है.

साम्प्रदायिकता के मुद्दे पर नीतीश जी ने एनडीए का साथ छोड़ा था. यह कहा था कि सबसे सांप्रदायिक आदमी उस पार्टी का नेता हो गया है. अब वे उसके साथ नहीं रह सकते.

साम्प्रदायिकता अब उनके लिए गौण मुद्दा हो गया है. भ्रष्टाचार प्रमुख बन गया है. केंद्र सरकार विकास को प्रमुखता देती है नीतीश जी विकास पुरुष कहे जाते रहे हैं.

उम्मीद करता हूँ कि आने वाले समय में विकास और विकास पुरुष का मिलन हो जाएगा. बिहार शराबमुक्त हो चुका है. अब भ्रष्टाचारमुक्त होकर विकास विकास करने लगेगा.

कुल मिलाकर नीतीश ने अपने एक्सटेंशन का इंतजाम कर लिया है.

नीतीश जी दूरंदेशी नेता हैं!

-प्रभात रंजन 

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