पड़ोसी की इमारत और कल्लन ख़ालू का दुखOctober 18, 20141 mins9सदफ नाज़ के व्यंग्य की अपनी ख़ास शैली है. व्यंग्य चाहे सियासी हो, चाहे इस तरह का… continue Reading..
इस्लाम की पश्चिमी छवि और ‘दफ्न होती जिंदगी’October 17, 20141 mins12जिस अखबार, जिस मैगजीन को उठाइए उसमें कुछ चुनिन्दा प्रकाशकों की किताबों के बारे में ही चर्चा… continue Reading..
सारा आकाश पड़ गया छोटा, इतना ऊंचा था कभी सर अपनाOctober 16, 20141 mins4कभी कभी सोचता हूँ हिंदी की मुख्यधारा से सार्थक लेखन करने वाले बहुत सारे लेखक कैसे काट… continue Reading..
विजयदान देथा के आखिरी दिन और ‘बोरुंदा डायरी’October 15, 20141 mins4बोरुंदा क़स्बा है या गाँव, उसकी पहचान विजयदान देथा से थी. हिंदी-राजस्थानी के लेखक मालचंद तिवाड़ी विजयदान… continue Reading..
सवालों के घेरे में ‘दलाल की बीवी’ के लेखक रवि बुलेOctober 13, 20141 mins8रवि बुले के लेखन को मैं गंभीरता से लेता रहा हूँ. हँसते हँसते रुला देने वाली कहानियों… continue Reading..
लोकनायक बनाम महानायकOctober 12, 20141 mins411 को लोकनायक और महानयक दोनों का जन्मदिन पड़ता है. लोकनायक धीरे धीरे दूसरी आजादी के झूठ… continue Reading..
बाइयों का ज़माना और हिंदी सिनेमा का आरंभिक दौरOctober 11, 20141 mins11युवा कवि और संगीत पर लिखने के लिए अपनी एक विशिष्ट पहचान बनाने वाले लेखक यतीन्द्र मिश्र… continue Reading..
मैं आशिक बनना चाहता हूँ, पर बन नहीं पाया हूँOctober 10, 20141 mins3आईआईटी पलट हिंदी लेखक प्रचण्ड प्रवीर, जिनके उपन्यास ‘अल्पाहारी गृहत्यागी’ का मैं बड़ा मुरीद रहा हूँ, बरसों… continue Reading..
‘हाफ गर्लफ्रेंड’ से क्या सीख मिलती है?October 9, 2014September 2, 20241 mins328चेतन भगत ने एक बड़ा काम यह किया है कि उसने ऐसे दौर में जबकि पढना लोगों…समीक्षा continue Reading..
मई महीने से तरक्की की चिड़िया ने पंख फड़फड़ाएOctober 8, 20141 mins11सदफ नाज़ फिर हाज़िर हैं. समकालीन राजनीतिक हालात पर इतना गहरा व्यंग्य शायद ही कोई लिखता हो.… continue Reading..