कर्ज के जाल में फंसकर किसानों के मजदूर बनते जाने की पीड़ा को प्रेमचंद ने अपने उपन्यास ‘गोदान’ में उकेरा…
चेतन भगत अंग्रेजी साहित्य के ‘नच बलिये’ हैं!
इन दिनों चेतन भगत ‘नच बलिये’ के जज बनकर चर्चा में हैं. ट्विटर पर उनको लेकर चुटकुलों का दौर जारी…
भूकंप के झटकों के बीच पटना में कहानी का झटका
पटना में दिनांक 25-27 अप्रैल को आयोजित ‘अखिल भारतीय हिंदी कथा समारोह‘ के बारे में फेसबुक स्टेटस से यह पता…
भालचंद्र नेमाड़े के उपन्यास ‘हिन्दू’ का एक अंश
आज मराठी के प्रसिद्ध लेखक भालचंद्र नेमाड़े को ज्ञानपीठ पुरस्कार प्रदान किया जा रहा है. उनके प्रसिद्ध उपन्यास ‘हिन्दू’ का…
कुँवर नारायण की कहनियों में धंसते हुए
युवा लेखक मनोज कुमार पाण्डेय ने यह लेख लिखा है हिंदी के वरिष्ठ कवि-कथाकार कुंवर नारायण की कहानियों को पढ़ते…
बापू! देश का अंतिम जन अपने अंत की ओर बढ़ रहा है!
महात्मा गाँधी की वतन वापसी के सौवें साल में उनके नाम यह मार्मिक पाती लिखी है दिल्ली विश्वविद्यालय के विद्यार्थी…
मीरांबाई की छवि और मीरां का जीवन
बड़ी चर्चा सुनी थी माधव हाड़ा की किताब ‘पंचरंग चोला पहर सखी री’ की. किसी ने लिखा कि मीरांबाई के…
हृषीकेश सुलभ कथाकार हैं, क्रॉनिकल राइटर नहीं!
हृषीकेश सुलभ के छठे कहानी संग्रह ‘हलंत’ की कहानियों को पढ़ते हुए यह मैंने लिखा है- प्रभात रंजन ==== ====…
नेताजी का सच और गुमनामी बाबा का मिथक!
गुमनामी बाबा नेताजी थे- इस बारे में सबसे पहले ‘गंगा’ नामक पत्रिका में पढ़ा था. बात 1985-86 की है. तब…
‘कोर्ट’ : भारतीय सिनेमा का उजला चेहरा
सर्वश्रेष्ठ फिल्म का राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त फिल्म ‘कोर्ट’ हो और प्रसिद्ध फिल्म समीक्षक मिहिर पंड्या की लेखनी हो तो कुछ…



