मंटो के जीवन और लेखन पर बनी फिल्म ‘मुफ्तनोश’ के 60 साल

सैयद एस. तौहीद फिल्मों के बारे में एक से एक जानकारी खोज निकालते हैं. मंटो के जन्म के महीने में…

भरम हैं रास्ते, चौराहे सत्य और नित्य हैं

कविताएं बहुत लिखी जा रही हैं- यह कहने का मतलब यह नहीं है कि अच्छी कविताएं नहीं लिखी जा रही…

सांसद एक सामान्य व्यक्ति की तरह क्यों नहीं रह सकता- हरिवंश

  प्रसिद्ध पत्रकार हरिवंश को राज्यसभा में आये एक साल से अधिक हो गया है. उन्होंने अपने अनुभवों को साझा…

“स्वतंत्रता” शब्द गुलामी से उपजता है!

आज सुबह एक अच्छी और सार्थक बातचीत पढ़ी. गीताश्री हमारे समय की एक महत्वपूर्ण कथाकार हैं, पत्रकार हैं. उनकी यह…

कविता एवं कला महोत्सव, शिमला में मिलते हैं !

साहित्य-कला उत्सवों के दौर में यह अपने तरह का पहला आयोजन है-कविता एवं कला महोत्सव, शिमला. लिटरेचर फेस्टिवल्स के दौर…

सेल्फी के जमाने में ‘बॉलीवुड सेल्फी’

जब से फिल्म समीक्षक पी.आर. एजेंसी के एजेंट्स की तरह फिल्मों की समीक्षा कम उनका प्रचार अधिक करने लगे हैं…

दुख उतना ही गहरा हुआ जितना गहरा था प्रेम!

कहने को मृत्यु को लेकर कुछ नोट्स हैं, लेकिन जिंदगी के राग से गहरे सराबोर. मनीषा पांडे के इस लेखन…

पता नहीं क्यों इधर दु:स्वप्न झूठे नहीं हो रहे हैं!

दिल्ली-मुम्बई जैसे महानगरों में कला संस्कृति का कारोबार बढ़ता जा रहा है लेकिन कलाकारों-संस्कृतिकर्मियों की अड्डेबाजी की जगहें कम होती…

अनुराग अन्वेषी की प्रेम कविताएं

आज कुछ कविताएं अनुराग अन्वेषी की. कविताओं में इस तरह की ऐन्द्रिकता कम हो गई है इन दिनों जैसी अनुराग…

यह साहित्य के भूकम्पोत्तर काल का आयोजन था!

बिहार में संपन्न हुए अखिल भारतीय कहा समारोह पर यह टिप्पणी पटना के युवा साहित्य प्रेमी, समीक्षक सुशील कुमार भारद्वाज…

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Jankipul : A Bridge of World's Literature एक नयी शुरुआत! मेरा कॉलम #Jankipul के लिए " जनहित में जारी सब पर भारी" आपकी टिप्पणी की अपेक्षा रहेगी