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ये आंदोलन कहीं ज्यादा सोशल-मीडिया के हैं
नालायक बनने में ही आदमी का बचाव है
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कविता कोश, दिनकर और अफजल गुरु
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अपर्णा मनोज की कहानी \’सारंगा तेरी याद में\’
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मामला जितना दिखता है उससे कहीं अधिक गहरा है
जानकी पुल (Janki Pul)
लेखक-संपादक प्रभात रंजन द्वारा वर्ष 2009 में स्थापित जानकी पुल का विजन आभासी दुनिया में गंभीर और लोकप्रिय साहित्य को बढ़ावा देना तथा साहित्यिक एवं सांस्कृतिक विषयों पर चर्चा के लिए एक मंच तैयार करना है। अनुवाद के माध्यम से यह अपने विशाल हिंदी पाठकों को विश्व साहित्य उपलब्ध कराता है।
कंटेंट (Content)
जानकीपुल डॉट कॉम का उद्देश्य इंटरनेट पर श्रेष्ठ साहित्य को प्रस्तुत करना और उसका प्रसार करना है। यह युवाओं को साहित्य से जोड़ने और उनमें पढ़ने-लिखने की संस्कृति विकसित करने के लिए प्रतिबद्ध है। यही कारण है कि जानकी पुल ने सदा युवाओं के लेखन को प्राथमिकता और महत्व दिया है।
पिछले लगभग पंद्रह सालों के दौरान युवा रचनाशीलता का सबसे प्रभावी मुक़ाम जानकी पुल रहा है। हिन्दी युवा रचनाशीलता का श्रेष्ठ अंश इसी माध्यम से मुखरित हुआ है। इतना ही नहीं, हिन्दी के सभी प्रमुख विमर्श, बहसें और तकनीक को लेकर होने वाली चर्चाओं के केंद्र में भी जानकी पुल रहा है।
ऐसे दौर में जब आभासी दुनिया में गंभीर साहित्य की विदाई का नैरेटिव गढ़ा जा रहा था, जानकी पुल ने गंभीर साहित्य को अपने अनूठे प्रस्तुतीकरण के माध्यम से लोकप्रिय बनाने का काम किया। इसके लिए केवल युवा लेखकों की रचनाएँ ही प्रकाशित नहीं की गईं, बल्कि नई किताबों के परिचय, समीक्षाएं और पुस्तक अंशों के माध्यम से किताबों के प्रचार-प्रसार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई गई।
अनुवाद के माध्यम से दुनिया की विभिन्न भाषाओं की समकालीन चर्चित कृतियों, लेखों और अंतरराष्ट्रीय ख्याति के लेखकों की बातचीत प्रकाशित कर हिंदी जगत में विश्व साहित्य की समझ को विस्तार दिया गया है।
सहयोग (Support)
यह उल्लेखनीय है कि जानकी पुल का यह सफर बिना किसी निजी या सांस्थानिक मदद के तय किया गया है। इसका संचालन खर्च स्वयं मॉडरेटर द्वारा वहन किया जाता है। जानकी पुल लेखकों और पाठकों के रचनात्मक सहयोग से मज़बूत बना हुआ है।
इसे लगातार बनाए रखने के लिए आपके सहयोग की आवश्यकता है। यदि आप जानकी पुल को आर्थिक सहयोग देना चाहते हैं, तो दिए गए क्यूआर कोड (QR Code) के माध्यम से भुगतान कर सकते हैं।

वैधानिक: जानकी पुल पर प्रकाशित रचनाओं में व्यक्त किए जाने वाले विचार पूर्णतः लेखक के निजी विचार होते हैं। उनके लिए जानकी पुल उत्तरदायी नहीं है।
