Posted in समीक्षा ‘विचार और वजूद’ लोक की जड़ों में रोपी गई जमीन की हकीकत Estimated read time 1 min read Posted on June 15, 2026 by prabhat प्रसिद्ध लेखिका नूर ज़हीर के 2008 में प्रकाशित उपन्यास ‘बड़ उरैये’ के बहाने वैचारिकता के संघर्ष पर यह टिप्पणी लिखी…