Posted in ब्लॉग बात इतनी सपाट हो जाएगी कि कला नहीं रहेगी Estimated read time 1 min read Posted on December 2, 2011 by आर. चेतनक्रान्ति की कविताएँ किसी आशा, किसी विश्वास की कविताएँ नहीं हैं, न ही स्वीकार की. वे नकार के कवि…