Verifying that you are not a robot...

  • लेख
  • रील्स के युग में बच्चों को उनकी जड़ों से जोड़ने वाला साहित्यिक पुनर्जागरण

    कल जाने-माने समाज चिंतक योगेन्द्र यादव का एक लेख इंडियन एक्सप्रेस में प्रकाशित हुआ था जो बाल साहित्य के नये दौर के बारे में था। व्यापक बहस की माँग करने वाले इस लेख का हिन्दी अनुवाद किया है जाने-माने पत्रकार, अनुवादक भुवेंद्र त्यागी ने। इंडियन एक्सप्रेस से साभार प्रस्तुत इस लेख को आप भी पढ़ सकते हैं- मॉडरेटर 

    ================

    हवा खारिज करने के हुनर के जरिए व्यक्तित्व विकास पर एक अनूठी सचित्र कविता। प्यारे लेकिन झगड़ालू लोगों के साथ एक युवती मैथिली के रोमांच के बारे में सजीव रेखाचित्रों से सजी पुस्तक। पूर्वोत्तर में एक युवा महिला के रूप में चित्रित सूर्य के बारे में एक नि:शब्द कथा। मिथकों, कहानियों और चित्रों के माध्यम से हमारी नदियों का लुभावना परिचय। और एक आधुनिक भारतीय चित्रकार से बच्चों को परिचित कराती एक अद्भुत कला।

    आपको दिल्ली में चल रहे विश्व पुस्तक मेले में सभी उम्र के बच्चों के लिए ये सभी और इसी तरह की सैकड़ों नवी-नवेली पुस्तकें मिलेंगी। हॉल 6 में आएं, जिसे खूब सलीके से बाकी प्रदर्शनी से पूरी तरह से अलग ढंग से तैयार किया गया है। बच्चों की तरह ही बच्चों की किताबों को भी अपनी खास जगह की जरूरत होती है। यहां आने के लिए आपको चमकते-दमकते और लुभाते सजावटी पैवेलियनों और बड़े प्रकाशकों के सामने से गुजरना होगा। आप दमकती आयातित किताबों, सुनहरी परीकथाओं और दिखावटी अंग्रेजी फिक्शन, बचपन से पढ़ते आ रहे पंचतंत्र की उन्हीं पुरानी किताबों और अमर चित्र कथा, एक्टिविटी और ड्राइंग की उबाऊ किताबों और आपके बच्चे को सबसे अच्छा रैंक दिलाने की गारंटी देती बेशुमार ‘शैक्षिक सामग्री’ में उलझना तो नहीं ही चाहेंगे।

    ये सब भी काम की हो सकती हैं, लेकिन इन्हें तो आप ऑनलाइन ऑर्डर करके भी मंगा सकते हैं। जाहिर है, आप उनके लिए किसी पुस्तक मेले में नहीं जाते। वहां तो नई और रचनात्मक किताबें लेने जाते हैं। आप वहां उन पुस्तकों की तलाश में जाते हैं जो बच्चों में पढ़ने, लिखने और सीखने की रुचि विकसित करने में मदद करती हैं। आप अपने बच्चों को उनके संदर्भ से जोड़ने के लिए वहां जाते हैं- इस विशाल उपमहाद्वीप के इतिहास, मिथकों, कहानियों और वास्तविक जीवन के बारे में उन्हें बताने के लिए, जहां वे पल-बढ़ रहे हैं। आप वहां उस बच्चे की जिज्ञासा और रचनात्मकता को गुदगुदाकर जगाने के लिए जाते हैं, जो कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के साथ जीना चाहता है। दूसरे शब्दों में, आप वहां भारतीय बच्चों के लिए लिखी गई भारतीय पुस्तकों, खासकर भारतीय भाषाओं की पुस्तकों के लिए जाते हैं।

    यदि आप यही सब खोज रहे हैं, तो आपके लिए अच्छी खबर है। भारत का बाल साहित्य एक पुनर्जागरण से गुजर रहा है। इसकी शुरुआत अंग्रेजी की भारतीय पुस्तकों से हुई। और मुझे लगता है कि यह चलन हिंदी से होते हुए तमाम भारतीय भाषाओं में फैल रहा है। यह बच्चों और नौजवानों के लिए किसी लेखक, चित्रकार, प्रकाशक और साहित्य का पाठक बनने का एक रोमांचक समय है।

    आप पराग के साधारण से दिखते स्टॉल से शुरुआत कर सकते हैं, जो टाटा ट्रस्ट की एक बहुत ही जरूरी पहल है। पिछले पांच वर्ष से यह ट्रस्ट एक वार्षिक पराग सम्मान सूची की घोषणा करता है। यह बच्चों और नौजवानों के लिए अंग्रेजी और हिंदी में उत्कृष्ट पुस्तकों के एक क्यूरेटेड संग्रह की सूची होती है। अच्छी बात यह है कि वे स्वयं पुस्तकें प्रकाशित नहीं करते और इसीलिए अन्य प्रकाशकों के साथ उनकी कोई प्रतिस्पर्धा नहीं है। उनका विश्वसनीय निर्णायक मंडल आपके लिए यह शानदार चयन करता है। आप 2025 की उनकी नवीनतम सम्मान सूची और संभव हो तो पिछले पांच वर्ष की सूचियों में से चुन सकते हैं। आप इसे www.paragreads.in पर ऑनलाइन भी देख सकते हैं। इस सूची में अब तक 286 पुस्तकें शामिल की जा चुकी हैं। इन्हें आयु वर्ग और प्रकार के आधार पर वर्गीकृत किया गया है। ये पुस्तकें 24 प्रकाशकों की हैं। इनमें से कई किताबें उनके स्टॉल पर भी उपलब्ध हैं। इनमें मुस्कान और तूलिका जैसे प्रकाशकों की कुछ किताबें भी शामिल हैं, जिनका अपना कोई स्टॉल नहीं है। आप चाहें, तो सीधे उन प्रकाशकों के पास जा भी सकते हैं।

    सबसे रोमांचक लेखन तो भारत की अंग्रेजी किताबों का हो रहा है, क्योंकि यह उन पाठकों की जरूरतों को पूरा करती हैं, जो जेब ढीली कर सकते हैं। हमारे पास ग्रुफैलो फेम के जूलिया डोनाल्डसन और एक्सेल शेफलर जैसे प्रसिद्ध लेखक-रेखाचित्रकार जैसी जोड़ी नहीं है, लेकिन सी. जी. सलमान डेर और राजीव ईप संगीत प्रेमी जीव असुनाम की कहानी के साथ उस दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। प्रथम बुक्स और तूलिका बुक्स आपको डकबिल और पफिन जैसी कुछ अच्छी किताबों के साथ-साथ सात साल की उम्र तक के शुरुआती और बहुत छोटे पाठकों के लिए सबसे अच्छा विकल्प प्रदान करती हैं। दस साल से अधिक उम्र वालों और किशोरों के लिए आप हार्परकॉलिन्स, स्पीकिंग टाइगर, तारा बुक्स और कल्पवृक्ष भी देख सकते हैं। अधिकांश अन्य प्रकाशकों के विपरीत प्रथम बुक्स कई भारतीय भाषाओं में अनुवादित किताबों की सौगात भी प्रदान करती है। कराडी टेल्स ने पीपुल्स आर्काइव ऑफ रूरल इंडिया के सहयोग से ग्रामीण भारत के सभी कोनों से वास्तविक जीवन की कहानियों की एक नई श्रृंखला शुरू की है। आर्टफर्स्ट ने भारतीय कला पर कुछ उत्कृष्ट पुस्तकें प्रकाशित की हैं। इनमें गणेश पाइन और एस. एच. रजा पर पुस्तकें शामिल हैं।

    लेकिन मैं आपको दो उन स्टॉलों पर लिए चलता हूं, जिन्हें आप शायद चूक जाएं। ये हिंदी में बच्चों की असाधारण पुस्तकें प्रदान करते हैं। ये दो आधिकारिक आउटलेटों नेशनल बुक ट्रस्ट और चिल्ड्रन बुक ट्रस्ट के अलावा हैं, जिनकी पुरानी किताबें अब भी किफायती और पढ़ने लायक हैं।  और जाहिर है, ये उस प्रथम बुक्स के भी अलावा हैं, जो हिंदी पुस्तकों के सबसे बड़े चयनों में से एक प्रदान करती है, विशेष रूप से शुरुआती पाठकों के लिए।

    एकतारा ट्रस्ट (जुगनू के प्रकाशक) में आपका स्वागत है। यह निस्संदेह हिंदी में बाल साहित्य में रचनात्मकता में सबसे आगे है। उनकी सूची में गुलजार की पुस्तकों की श्रृंखला, विनोद कुमार शुक्ला की पुस्तकें और हाल ही में आया कृष्ण कुमार का एक उपन्यास शामिल है। एकतारा ने बच्चों की पुस्तकों की एक पूरी श्रृंखला प्रकाशित की हैः पॉकेट बुक से लेकर भारी-भरकम किताबों तक, कविता कार्ड से लेकर कलाकृति फ़ोल्डर तक, शिशुओं के लिए बिना शब्दों की चित्रात्मक पुस्तकों से लेकर नौजवानों के लिए उपन्यास तक। गुलजार द्वारा लिखित उनकी पुस्तकों का सेट जरूर तलाशें। इसके लिए एलेन शॉ ने रेखाचित्र बनाए हैं। या आश्चर्यजनक कवि और शब्दशिल्पी सुशील शुक्ला की किताबें। मुझे नवीनतम सचित्र पुस्तक ‘गुनगुन ऑर्केस्ट्रा’ बहुत पसंद आई। उनकी पत्रिकाओं- शुरुआती पाठकों के लिए ‘प्लूटो’ और युवाओं के लिए ‘साइकल’ की सदस्यता लेना न भूलें।

    एकतारा से दूसरे कोने तक जाकर भोपाल से ही एकलव्य के स्टाल पर जाएं। होशंगाबाद विज्ञान शिक्षण प्रोग्राम का पथप्रदर्शक काम कर रहे इस एनजीओ ने मामूली सी शुरूआत से विज्ञान शिक्षा तक लंबा सफर तय किया है। आप शिक्षा पर शिक्षकों और अभिभावकों को लाभान्वित करने वाली पुस्तकों के अलावा उनकी विज्ञान पुस्तकों और टूलकिट को भी देख सकते हैं। कई वर्ष से उनकी पत्रिका ‘पिटारा’ सभी आयु वर्ग के बच्चों के लिए कविता, कहानी और कथेतर सामग्री की सौगात दे रही है। वरुण ग्रोवर की ‘फुट्ट-बॉल’ लुधियाना के एक पंजाबी लहजे वाले लड़के की मार्मिक कहानी है, जो लखनऊ के एक हिंदी स्कूल में पढ़ता है। आप बच्चों के लिए उनकी पत्रिका ‘चकमक’ या शिक्षा प्रदाताओं के लिए ‘संदर्भ’ की सदस्यता ले सकते हैं। ‘पिटारा’ भारत के सभी कोनों और समुदायों के बच्चे के सांस्कृतिक संसार को फलक देने के लिए बेहतरीन काम कर रही है।

    अगर आप बच्चों को प्रदर्शनी में अपने साथ ले जाते हैं, तो आपको मुझसे कहीं अधिक सौगात मिलेगी। कहावत है कि कल्पना बच्चों की किताबों में ही कुलांचे भरती है।

    (लेखक स्वराज इंडिया के सदस्य और भारत जोड़ो अभियान के राष्ट्रीय संयोजक हैं।)

    —————————————————————————————————

    ■ पत्रकार, लेखक और अनुवादक भुवेंद्र त्यागी के विविध विषयों पर 3,000 से अधिक लेख, फीचर, रिपोर्ताज, साक्षात्कार और समीक्षाएं प्रकाशित हो चुके हैं। आकाशवाणी, विविध भारती और बीबीसी से 250 से अधिक वार्ताएं, कार्यक्रम और साक्षात्कार प्रसारित। 27 अनुवादित पुस्तकों सहित विविध विधाओं की 42 पुस्तकें प्रकाशित। दैनिक भास्कर मुंबई में संपादक।

    Leave a Reply

    Your email address will not be published. Required fields are marked *

    1 mins
    WordPress Center Ankara Escort: Beypazarı Escort, Pursaklar Escort, Etimesgut Escort İstanbul Escort: Esenyurt Escort, Bahçelievler Escort, Maltepe Escort Bursa Escort: Gürsu Escort, Keles Escort, İznik Escort What are the best budget smartphones available in 2025? Reason Why Everyone Love Travel Doubts About Lifestyle You Should Clarify Create Add On For Elementor On-Scroll Video Effects for Elementor Simple Forum – Responsive Bulletin Board Crypto Price Alerts | WordPress Plugin Khara – Ultimate Coming Soon & Maintenance Plugin Bookly Advanced Google Calendar (Add-on) Wooprofil: Woocommerce Products Search and Filter WordPress Plugin SUMO WooCommerce Waitlist Woocommerce Plugin Customization Emaily | WooCommerce Responsive Email Template + Subscriptions + Bookings + Memberships Compatible