लोग भी किन किन बातों पर कितना शोध करते हैं. एक सदानंद पॉल जी हैं. पढ़िए इन्होने क्या शोध किया है? हाँ, लेख के बाद उनका परिचय भी धैर्यपूर्वक पढियेगा- मॉडरेटर
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आज से 10 साल पहले मैंने स्व0 देवकीनन्दन सिंह की पुस्तक ‘ज्योतिष- रत्नाकर‘ (पृष्ठ संख्या- 979 से 985 तक/ पुनर्मुद्रण वर्ष- 1999/ प्रकाशक- मोतीलाल बनारसीदास) पढ़ा, तो पाया महात्मा गाँधी की जन्मतिथि विक्रमी संवत् में ‘आश्विन बदी द्वादशी, संवत् 1925′ लिखा है, जबकि गाँधी जी की जन्मतिथि उनकी ‘आत्मकथा‘ (गुजराती और हिंदी संस्करण) के अनुसार विक्रमी संवत् में ‘भादो बदी द्वादशी, संवत् 1925′ है, दोनों तरह की पुस्तकों में महात्मा गाँधी की जन्मतिथि की अँग्रेजी तारीख 02 अक्टूबर 1869 ई0 ही प्रकाशित है, किन्तु यह प्राथमिकता के तौर पर नहीं , अपितु ‘अर्थात्‘ लिए है !
जिन वर्षों में और जहाँ (सौराष्ट्र प्रांत) गाँधी जी ने जन्म लिया, वहाँ और उस समय हिन्दू व जैन परिवारों में विक्रमी संवत् का प्रचलन था । विज्ञानलेखक डॉ0 गुणाकर मुळे ने मुझे ‘हिंदी भाषा में गणित का पहला अन्वेषक‘ का खिताब दिया । इसतरह से अपना गणितीय-आकलन, फिर ठाकुर प्रसाद पंचांग सहित कई स्थानीय और परप्रांतीय पंचांगों से मिलान व मलमासों की स्थितियों के योग करके मैंने पाया कि ‘आश्विन बदी द्वादशी, संवत् 1925′ की अँग्रेजी तारीख 13 सितम्बर 1868 ई0 , दिन – रविवार है, जबकि ‘भादो बदी द्वादशी, संवत् 1925′ की अँग्रेजी तारीख 16 अगस्त 1868 ई0 , दिन- रविवार है । पहली जन्मतिथि की स्थिति में पुस्तक ‘ज्योतिष-रत्नाकर‘ में गाँधी जी की जन्मकुण्डली का उल्लेख करते हुए विक्रमी संवत् की जन्मतिथि को उद्धृत किया गया है, जबकि दूसरी जन्मतिथि को स्वयं गाँधी जी ने अपनी ‘आत्मकथा‘ में लिखा है । इसतरह से CONFUSE करनेवाली स्थिति पर स्पष्टीकरण पाने को लेकर मैंने गाँधी जी की जन्मकुण्डली जानने तथा विद्यालयीय-पंजी (पोरबंदर / राजकोट में) में दर्ज़ वास्तविक जन्मतिथि की सटीक जानकारी अर्जित करने को लेकर ‘सूचना एवम् जन संपर्क विभाग, गुजरात सरकार, गाँधीनगर‘ को दिनांक- 14.11.2008 को ‘स्पीड पोस्ट‘ (नं. EE899091939IN / MANIHARI P.O.- 854113) से पत्र भेजा, किन्तु काफी घूम-फिर कर पत्रयुक्त स्पीडपोस्ट-लिफ़ाफ़ा मेरे पास वापस आ गया । हो सकता है, पानेवाला का पता मैंने गलत उद्धृत किया हो ! किन्तु डाक विभाग और पोस्टमैन की सहृदयता जहाँ परिवर्तित पता में भी पत्र को पहुँचाया जा सकने की स्थिति को दृढ़ित करता है, परंतु ऐसा मेरे साथ नहीं हो सका !
तब मैंने महामहिम राष्ट्रपति सचिवालय, माननीय प्रधानमन्त्री कार्यालय और माननीय गृह मंत्रालय, भारत सरकार से यह जानना चाहा—— ‘हम जो अपने राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी की जयंती 02 अक्टूबर को मनाते हैं , इस जन्मतिथि का आधार या श्रोत (जहाँ से जन्मतिथि संकलित हुई है) जो हो बतायेंगे, चूँकि गाँधी जी की जन्मकुण्डली – विषयक पुस्तक और उनकी आत्मकथा में विक्रमी संवत् लिए जन्मतिथि क्रमशः आश्विन बदी द्वादशी, भादो बदी द्वादशी (दोनों में संवत् 1925 ) का ज़िक्र है और दोनों के मेरे गणितीय-आकलनानुसार अँग्रेजी तारीख क्रमशः 13 सितम्बर 1868 और 16 अगस्त 1868 आती है, पर 02 अक्टूबर 1869 नहीं आती है‘ ।
राष्ट्रपति सचिवालय ने अंतरित करते हुए तीन बार [866-892/RTI/10/09-10/दि.11.
चूँकि गाँधी जी सत्य और अहिंसा के वैश्विक पुजारी थे, इसलिए इस प्रातः स्मरणीय महापुरुष की असली जन्मतिथि (जन्मकुण्डली के अनुसार 13 सितम्बर 1868 और आत्मकथा के अनुसार 16 अगस्त 1868) लिए असली जयंती (13 सितम्बर या 16 अगस्त) ही मनाये जाने चाहिए । मेरी तिथि अनंतिम नहीं है, अन्य प्राधिकार भी पड़ताल करने को स्वतंत्र है । आखिर जो सही हो, उन्हीं को मानिए, किन्तु यह सत्यान्वेषित हो । ध्यातव्य है, मेरे द्वारा अन्वेषित गाँधी जी की जन्मतिथि को भारत सरकार के कॉपीराइट कार्यालय ने भी रजिष्टर्ड किया है तथा लगभग 5 वर्षों से वेब पत्रिका ‘अपनी माटी‘ में मेरे मित्र डॉ0 देवेन्द्र कुमार ‘देवेश‘ (विशेष कार्याधिकारी, साहित्य अकादेमी, नई दिल्ली) के मार्फ़त यह जानकारी अब भी जारी है ।×××××××××××××××
लेखक परिचय- सदानंद पॉल (SADANAND PAUL) शिक्षाविद् , साहित्यकार, पत्रकार, गणितज्ञ, नृविज्ञानी, भूकंपविशेषज्ञ, RTI मैसेंजर, ऐतिहासिक वस्तुओं के संग्रहकर्ता हैं.स्वतंत्रतासेनानी, पिछड़ा वर्ग, मूर्तिकार, माटी कलाकार परिवार में 5 मार्च 1975 को कटिहार,बिहार में जन्म हुआ.
पटना विश्वविद्यालय में विधि अध्ययन, इग्नू दिल्ली से शिक्षास्नातक और स्नातकोत्तर, जैमिनी अकादेमी पानीपत से पत्रकारिता आचार्य , यूजीसी नेट हिंदी में ऑल इंडिया रैंकधारक, भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय से रिसर्च फेलो,11 वर्ष में महर्षि मेंहीं रचित सत्संग योग की समीक्षा पर नेपाल के प्रधानमन्त्री कुलाधिपति श्री एनपी रिजाल से आनरेरी डॉक्टरेट कार्ड प्राप्त, पटना विश्वविद्यालय पीइटीसी में हिंदी अध्यापन 2005-07 और 2007 से अन्यत्र व्याख्याता, 125 मूल्यवान प्रमाणपत्रधारक, तीन महादेशों की परीक्षा समेत IAS से क्लर्क तक 450 से अधिक सरकारी,अकादमिक,अन्य परीक्षाओं में सफलता प्राप्त.
23 वर्ष की आयु में BBC लंदन हेतु अल्पावधि कार्य , दैनिक आज में 14 वर्ष की अल्पायु में संवाददाता, 16 वर्ष में गिनीज बुक रिकार्ड्स समीक्षित पत्रिका भूचाल और 18 वर्ष में साप्ताहिक आमख्याल हेतु लिम्का बुक रिकार्ड्स अनुसार भारत के दूसरे सबसे युवा संपादक, विज्ञान-प्रगति हेतु प्रूफएडिटिंग, बिहार सरकार की ज़िलास्मारिका कटिहार विहंगम-2014 के शब्दसंयोजक, अर्यसन्देश 2015-16 के ग्रुपएडिटर. दस राज्यों के पत्र पत्रिकाओं और आकाशवाणी पटना हेतु कार्य. मा. राष्ट्रपति , प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री,खिलाड़ी, सिनेमा महानायक, साहित्यकार, आज़ाद हिन्द फ़ौज़ सहित 1942 क्रान्ति के सेनानियों इत्यादि हज़ारों व्यक्तियों से साक्षात्कार पत्रवार्ताएं.
दर्जनों शोधालेख, 250 विविध रचनाएँ देश विदेश के पत्रिकाओं संस्थानों में से प्रकाशित प्रसारित तथा लोकपर्व छठ पर पहला आलेख बिहार से बाहर के अखबार में पहलीबार प्रकाशित, स्वयंखोजी 70 लोकगाथाएं नालंदा खुला विश्वविद्यालय में पंजीकृत हुआ, चाइना रेडियो से चतुर्थ विश्व महिला सम्मेलनार्थ लिखा Pearl writing विभूषित आलेख प्रसारित , शब्द श्री को 2 करोड़ 5 लाख 912 तरीक़े से लिखा, जिनके आधारित हिंदी का पहला ध्वनि व्याकरण लिखा,जिनपर चीन के शंघाई विश्वविद्यालय ने पहली प्रतिक्रिया दी, भारत सरकार ने पहलीबार स्पेसफिक्शन लव इन डार्विन का कॉपीराइट रजिस्टर्ड किया, फिल्मांतरण भी.
भारत के दूसरा विक्रमादित्य अटल बिहारी वाजपेयी, पूर्वांचल की लोकगाथा गोपीचंद, दलित साहित्य का समाजशास्त्र, ऐवरेस्ट पर सर्वप्रथम पहुँचनेवाला भारतीय था इत्यादि प्रकाशितालेख हैं.
ग्यारह वर्ष की अल्पायु में 100 स्वयंखोजी सूत्रों का गणित डायरी प्रकाशित, एक सवाल का 1600 तरीके से हल लिए गणित डायरी द्वितीय संस्करण 1998 में छपा, जिसे पटना, भागलपुर और केरल विश्वविद्यालय ने सराहे , CSIR की संस्थान ने आलेख कंप्यूटर की Y2K समस्या का समाधान के प्रकाशन पर पत्र लिखा, 30 विश्वविद्यालयों , 10 IIT IISc TIFR , 5 जर्नल्स में विचारार्थ Formula of Next PRIME NUMBERs Know शोध Abel Prize समिति को प्राप्त , कापरेकर नियतांक गलत साबित और संख्या 2178 की खोज पर अमेरिकन मैथेमेटिकल सोसाइटी से पत्र प्राप्त , हिंदी में प्रथम गणित कहानी के लेखक , शोधपत्र भूकंप की भविष्यवाणी और Pi का समानांतर मान को तृतीय अ.भा. विज्ञान सम्मलेन, नई दिल्ली 2004 में प्रस्तुत. वैश्विक गणित में भारतीय गणितज्ञों की स्थिति,कुछ सोचनीय गणितीय उलझनें इत्यादि प्रकाशितालेख हैं.
सूचनाधिकार RTI अधिनियमान्तर्गत देशभर और सभी राज्यों के प्रायः विभागों को 14000 सूचनावेदन भेजकर हज़ारों सूचनाएं एकत्र किया, जिनमें एक्सप्रेसट्रेन आरक्षित बोगी से कष्टदायक साइड मिडिल बर्थ हटाया, रेलयात्रियों को चलती ट्रेन में टिकट की प्रथम अवधारणा, BPSC ने परीक्षार्थियों को करोड़ो रुपए के डाकटिकटों को वापस किया, बिहार में प्रिंटेड रजिष्ट्रर से लाखों शिक्षकों की फ्रेश नियुक्ति, UGC ने NET परीक्षार्थियों के रैंकिंग दिए इत्यादि. केंद्रीय सूचना आयोग, सभी राज्य सूचना आयोगों में case जीतनेवाले भारत के एकमात्र अपीलकर्ता.
12000 RTI आवेदन भेजने में अपना 3.5 लाख रुपये तब खर्च किये, जब औसत वार्षिक आय 1 लाख रु. भी नहीं था. अविवाहित रहकर,कई भौतिक सुखों को त्यागकर और कई लाख रुपये खर्चकर अप्राप्य दस्तावेजों,पत्रिकाओं,पुस्तकों, कई सदी के सिक्के, डाकटिकट, रेलसामग्री इत्यादि इकट्ठेकर संग्रहालय बनाया. तमिलनाडु,बिहार सही अन्य राज्यों में आये बाढ़ हेतु आपदा राहत प्रेषित. भूकंप पर शोध लिए नये सिद्धांत विकसित किये. 1 लाख से अधिक आवेदन, Drafts के लेखक. प्रतिदिन शिक्षकों, कर्मचारियों, प्रतियोगियों के समस्याओं के निदानार्थ बौद्धिक सहायता. फोर्ड फाउंडेशन फेलोशिप के फाइनलिस्ट, किन्तु भारतीय संस्कृति की गरिमा का ख्यालकर तत्काल छोड़ा.
प्रधानमन्त्री श्री चंद्रशेखर से प्रशंसित कविता को राष्ट्रीय कविता अवार्ड 1994-95, जिसे मा.राष्ट्रपति डॉ. एसडी शर्मा ने भी सराहे.महर्षि मेंहीं रचित – सत्संग योग- चतुर्थ भाग
भारत के दूसरा विक्रमादित्य अटल बिहारी वाजपेयी, पूर्वांचल की लोकगाथा गोपीचंद, दलित साहित्य का समाजशास्त्र, ऐवरेस्ट पर सर्वप्रथम पहुँचनेवाला भारतीय था इत्यादि प्रकाशितालेख हैं.
प्रधानमन्त्री श्री चंद्रशेखर से प्रशंसित कविता को राष्ट्रीय कविता अवार्ड 1994-95, जिसे मा.राष्ट्रपति डॉ. एसडी शर्मा ने भी सराहे.महर्षि मेंहीं रचित – सत्संग योग- चतुर्थ भाग


