‘मुक्तांगन’ में ‘राम’ से शाम तकJanuary 31, 20171 mins6वसंत के मौसम के लिहाज से वह एक ठंढा दिन था लेकिन ‘मुक्तांगन’ में बहसों, चर्चाओं, कहानियों,… continue Reading..
रईस नहीं होता तो आज की सियासत नहीं होतीJanuary 30, 20171 mins165‘रईस’ एक राजनीतिक फिल्म है लेकिन जो अहमदाबाद, गुजरात की राजनीति को नहीं समझते वे इसकी राजनीति… continue Reading..
स्वर्णलता विश्वफूल की कविताएँJanuary 28, 20171 mins138कटिहार के एक कस्बे में स्कूल में पढ़ाने वाली इस कवयित्री की कविताएँ देखिये कैसी लगती हैं-… continue Reading..