इरा टाक की कविताएं


इरा टाक आजकल अपनी शॉर्ट फिल्म के कारण चर्चा में हैं. बहुत अच्छी पेंटर हैं. लेकिन वह मूलतः कवयित्री हैं. आज उनकी कुछ कवितायेँ- मॉडरेटर 

“मैं” और “हम”
वजन एक है
पर अंतर मीलों का है न
मेरे प्रिय !
आजकल सपने बुना करती हूँ
जैसे माँ कभी स्वेटर बुनती थी
पर मेरी गति तेज़ है
या यूँ कह लो कि बस एक यही काम है
ढेर लगा दिया है इंद्रधनुषी सपनों का
देखो न…
मेरे प्रिय !
एक कविता
कहीं गुम हो गयी
संभाल न सके
तुम
मेरे प्रिय !
मैं पहाड़ी नदी सी चंचल
तुम गहरी झील से शांत
मैं हवाओं की तरह उन्मुक्त
तुम बादलों से भरे हुए
लेकिन बह जाते हो
मेरे प्रेम में
प्रबल है न वेग…
मेरे प्रिय !
रोज़ एल नया रंग मिलता है
मुझे तुम में
कितने निश्छल सरल हो तुम
मन करता है तुम्हे
अपने रंगों में उतार लूँ
और ढल जाऊँ
तुम्हारे शब्दों में
मेरे प्रिय !
अक्सर कहते हो
दुःसाहसी हूँ मैं
दुनिया  की नहीं
बस अपने दिल की सुनती हूँ
प्रेम जो अनुशाषित हो
तो प्रेम ही कैसा
मेरे प्रिय !
कहीं कोई रिश्ता
चटकता है
तो वजह होता है
एक खालीपन
दोषी एक भी हो सकता है
और दोनों भी
ये खालीपन न भरने देना
इस रिश्ते में
मेरे प्रिय !
क्यों कहते हो
प्रेम मन में रखो
शब्दों से न करो जाहिर
दुनिया से तो छुपाया है
मन ऐसा उमड़ता है
तेरे लिए
तुमसे भी न कहूँ तो
कहीं डूब न जाऊँ
मेरे प्रिय !
कोई कितना भी खास हो
मेरे लिए आम है
लोगों से बना ली है दूरियाँ
बस तेरे ख्यालों से काम है
अब दुनिया मेरे ख़िलाफ़ हो तो
संभाल लोगे न ?
मेरे प्रिय !
बहुत सोचा करती हूँ
सही गलत,फ़र्ज़,उसूल,
कायदे कानून
उलझी रही हूँ हमेशा
अब कुछ पल तो सिर्फ
अपने लिए जी लूँ
आज़ाद होकर
मेरे प्रिय !
मैंने अपना बचपन नहीं जिया
कहीं कोई मधुर याद नहीं
बहुत खाली हूँ अंदर से
क्या तुम जियोगे मेरे साथ
फिर से मेरा बचपन
जिसमें सिर्फ बेफिक्री
और मिठास हो
बोलो न
मेरे प्रिय !
मेरी हर बात तुम पर
केंद्रित हो गई है
जैसे मेरे हमराह ही नहीं
मंज़िल भी तुम हो
एक इंसान कैसे दुनिया बन जाता है
प्रेम भी कितना विचित्र है न
मेरे प्रिय !
कितना प्रेम करती हूँ
तुमको…
कुछ अंदाज़ा है ?
तुम्हारा अर्जित सारा
ज्ञान भी कम पड़ जाये
इतना
मेरे प्रिय !

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