Atlasbet girişmeritkingmeritking girişromabetromabet girişrestbetrestbet girişalobetalobet girişmavibetmavibet girişmatbetmatbet girişMillibahis girişjasminbet girişpokerklaspokerklas girişperabetperabet girişmeritkingmeritking girişmeritkingmeritking girişperabet girişpokerklas girişromabet girişrestbet girişalobet girişmatbet girişmatbet girişmavibet girişmeritkingmeritking girişmarsbahismarsbahis girişTeosbetTeosbet girişTophillbetTophillbet girişRoyalbetRoyalbet girişJokerbetJokerbet girişVegabetVegabet girişMeybetMeybet girişBetbigoBetbigo girişPrensbetPrensbet girişKalebetKalebet girişTeosbetTeosbet girişTophillbetTophillbet girişRoyalbetRoyalbet girişJokerbetJokerbet girişVegabetVegabet girişPrensbetPrensbet girişMeybetMeybet girişAtlasbet girişBetbigoBetbigo girişEditörbetEditörbet girişBahiscasinoBahiscasino girişEnjoybetEnjoybet girişRoketbetRoketbet girişBetbigoBetbigo girişKalebetKalebet girişTeosbetTeosbet girişTophillbetTophillbet girişRoyalbetRoyalbet girişJokerbetJokerbet girişVegabetVegabet girişPrensbetPrensbet girişMeybetMeybet girişAtlasbetAtlasbet giriştophillbettophillbet girişroyalbetroyalbet girişnorabahisnorabahis girişgalabetgalabet girişeditörbeteditörbet girişamgbahisamgbahis girişefesbet girişmasgterbettingmasgterbetting girişperabetperabet girişpokerklaspokerklas girişromabetromabet girişrestbetrestbet girişalobetalobet girişmatbetmatbet girişmatbetmatbet girişmavibetmavibet girişmeritkingmeritking girişmeritkingmeritking girişmarsbahismarsbahis girişBetbigoBetbigo girişKalebetKalebet girişTeosbetTeosbet girişTophillbetTophillbet girişRoyalbetRoyalbet girişJokerbetJokerbet girişVegabetVegabet girişmeritkingmeritking girişholiganbetholiganbet girişmatbetmatbet girişmavibetmavibet girişmarsbahismarsbahis girişkavbetkavbet girişmeritkingmeritking girişMillibahisMillibahis girişjasminbetjasminbet girişMeybetMeybet girişAtlasbetAtlasbet girişefesbetefesbet girişamgbahisamgbahis girişromabetromabet girişpokerklaspokerklas girişmillibahismillibahis girişbetzulabetzula girişaresbetaresbet girişmasterbettingmasterbetting girişatmbahisatmbahis girişbetplaybetplay girişbetgarbetgar girişbetnisbetnis girişBetbigoBetbigo girişKalebetKalebet girişTeosbetTeosbet girişTophillbetTophillbet girişJokerbetJokerbet girişVegabetVegabet girişmeritkingmeritking girişmarsbahismarsbahis girişmavibetmavibet girişmatbet girişkavbetkavbet girişMeritkingMeritking girişMeritking Giriş: Meritking Spor Bahisleri, Meritking Casino Ve Slot OyunlarıMarsbahis Giriş: Marsbahis Para Yatırma Ve Çekme İşlemleriMavibet Giriş: Mavibet Güvenilir Mi, Mavibet Giriş AdresiMeritking Giriş: Meritking Canlı Destek Ve İletişimMarsbahis Giriş: Marsbahis Casino Ve Slot OyunlarıMavibet Giriş: Mavibet Bonus Ve KampanyalarMeritking Giriş: Meritking Bonus Ve Kampanyalar, Meritking Spor BahisleriMarsbahis Giriş: Marsbahis Mobilden Giriş 2026, Marsbahis Casino Ve Slot OyunlarıMavibet Giriş: Mavibet Canlı Destek Ve İletişimMeritking Giriş: Meritking Spor Bahisleri, Meritking Casino Ve Slot OyunlarıMarsbahis Giriş: Marsbahis Para Yatırma Ve Çekme İşlemleriMavibet Giriş: Mavibet Güvenilir Mi, Mavibet Bonus Ve KampanyalarBetbigoBetbigo girişKalebet girişTeosbetTeosbet girişTophillbetTophillbet girişRoyalbet girişMeybet girişAtlasbet girişEnbet girişBetzula girişRomabetRomabet girişaresbetaresbet girişamgbahisamgbahis girişatmbahisatmbahis girişbetzulabetzula girişpokerklaspokerklas girişefesbetefesbet girişmillibahismillibahis girişbetplaybetplay girişbetnisbetnis girişbetgarbetgar girişMeritking Giriş: Meritking Bonus Ve KampanyalarMarsbahis Giriş: Marsbahis Mobilden Giriş 2026Mavibet Giriş: Mavibet Canlı Destek Ve İletişimpokerklaspokerklas girişmillibahismillibahis girişaresbetaresbet girişbetplaybetplay girişhttps://extraordinaryethiopiatours.com/https://extraordinaryethiopiatours.com/ girişMeritking Giriş: Meritking Bonus Ve Kampanyalar, Meritking Güvenilir MiMarsbahis Giriş: Marsbahis Mobilden Giriş 2026, Marsbahis Güvenilir MiMavibet Giriş: Mavibet Canlı Destek Ve İletişimCeltabetCeltabet girişEditörbetEditörbet girişEnjoybetEnjoybet girişRomabetRomabet girişGalabetGalabet girişBahiscasinoBahiscasino girişCasinoroyalCasinoroyal girişBetkolikBetkolik girişNorabahisNorabahis girişHiltonbetHiltonbet girişPadişahbetPadişahbet girişGrandbettingGrandbetting girişBetplayBetplay girişmarsbahismarsbahis girişfestwinpokerklaspokerklas girişmillibahismillibahis girişaresbetaresbet girişbetplaybetplay girişbetgarbetgar girişbetnisbetnis girişefesbetefesbet girişrestbetrestbet girişsonbahissonbahis girişelitcasinoelitcasino girişfestwing girişmarsbahis güncel girişfestwin güncel girişholiganbetholiganbet girişholiganbet güncel girişmavibetmavibet girişmavibet güncel girişMeritking Giriş: Meritking Spor BahisleriMarsbahis Giriş: Marsbahis Para Yatırma Ve Çekme İşlemleriMavibet Giriş: Mavibet Güvenilir Mi, Mavibet Bonus Ve Kampanyalarmeritkingmeritking girişBetbigoBetbigo girişKalebetKalebet girişTeosbetTeosbet girişTophillbetTophillbet girişRoyalbetRoyalbet girişJokerbetJokerbet girişVegabetVegabet girişMeybetMeybet girişAtlasbetAtlasbet girişMeritkingMeritking girişMarsbahisMarsbahis girişMeritking Giriş: Meritking Güvenilir Mi, Meritking Bonus Ve KampanyalarMarsbahis Giriş: Marsbahis Giriş Adresi, Marsbahis Mobilden Giriş 2026Mavibet Giriş: Mavibet Spor Bahislerimatbetmatbet girişmeritkingmeritking girişmarsbahismarsbahis girişholiganbetholiganbet girişmeritkingmeritking girişmarsbahismarsbahis girişmavibetmavibet girişMeritking Giriş: Meritking Mobilden Giriş 2026Marsbahis Giriş: Marsbahis Bonus Ve KampanyalarMavibet Giriş: Mavibet Casino Ve Slot Oyunları, Mavibet Mobilden Giriş 2026Meritking Giriş: Meritking Casino Ve Slot Oyunları, Meritking Mobilden Giriş 2026Marsbahis Giriş: Marsbahis Canlı Destek Ve İletişimMavibet Giriş: Mavibet Mobilden Giriş 2026Meritking Giriş: Meritking Spor Bahisleri, Meritking Giriş AdresiMarsbahis Giriş: Marsbahis Para Yatırma Ve Çekme İşlemleriMavibet Giriş: Mavibet Güvenilir MiMeritking Giriş: Meritking Mobilden Giriş 2026, Meritking Güvenilir MiMarsbahis Giriş: Marsbahis Bonus Ve Kampanyalar, Marsbahis Mobilden Giriş 2026Mavibet Giriş: Mavibet Casino Ve Slot Oyunları

विनीता परमार की कहानी ‘विसर्जन’

विनीता परमार पेशे से अध्यापिका हैं। स्त्री जीवन के जद्दोजहद को कहानियों में ढालती हैं। आज उनकी ताज़ा कहानी पढ़िए-

=============================

 साची ने कंडक्टर की आवाज़ सुन अपना सर ऊपर उठाया, देखा कि बस रुक चुकी है। बस की सीट पर पिछले एक घंटे से धँसी वह उस अहसास के दलदल में कब जकड़ गई पता ही न चला।  वो चिल्ला भी नहीं पाई, रो भी न पाई यहाँ तक कि बता भी न पाई। एक घंटे से बाएँ पैर को दाहिने पैर पर चढ़ाकर बैठी थी, वह बिल्कुल ही समझ नहीं पाई।  आज कितनी आसानी उसने अपने बर्षों की झिझक और अपनी ख़ुद की बनाई बेड़ियों को भी तोड़ दिया। उसे ख़ुद पर भरोसा नहीं था कि ऐसे तोड़ फेंक देगी इन वर्जनाओं को। आज की जद्दोजहद में उसने अपने को समझा लिया जब वो यह कर सकती है तो तेज से खुलकर मिल क्यों नहीं सकती? बस से उतरते ही वो उसे सबकुछ समर्पित कर देगी। उसके इंतज़ार तक पहुँचने के लिए उसे अपने साथ कितना प्रतिरोध करना पड़ा यह वही समझ सकती है। इस चार घंटे के रास्ते में वह चार जन्मों के कष्ट से एकबारगी मुक्त हो गई।

जबसे इस छोटी जगह में पोस्टिंग हुई है तभी से दीदी जी की तरह सलवार – सूट और दुपट्टे का दामन थाम रखा है। ब्लॉक की नौकरी रोज़ गाँव वालों का सामना, वैसे में साची ने निपट देहात में अपने को कानाफूसी का विषय बनने से रोक दिया है। पहले दिन जब ज्वाइन करने आई थी, तो जिंस और कुर्ता ही पहन रखा था लेकिन ब्लॉक के चपरासी से लेकर दूसरे अधिकारी भी ऐसे देख रहे थे, जैसे वो इस ग्रह से नहीं किसी दूसरे ग्रह से आई हो। पहली पोस्टिंग और पहली नौकरी का अनुभव बहुत ही देर से मिला इस कारण उसने उस छोटे से प्रखंड मुख्यालय की माँग को ताड़ लिया था और पूरी तरह वहाँ के लोगों की नज़र की सुविधानुसार अपने को ढाल चुकी है। पहले दिन ही खपरैल ऑफिस को देख सारा उत्साह ठंढा पड़ गया। थोड़ी हिम्मत की, अपने को समझाया, लेकिन सारी हिम्मत काफूर हो गई जब इकलौते शौचालय के बाहर इंतज़ार करना पड़ा। शौचालय ऐसा जिसकी कुंडी नहीं लगती थी, अंदर की पीली पड़ चुकी बाल्टी को दरवाजे के प्रहरी के रूप में खड़ा करना पड़ता। पहले दिन जब पेशाब लगी तो सारे स्टाफ मुँह ताकने लगे।

एक घिसा-पिटा नेमप्लेट जिसपर  सुरेश लकड़ा लिखा था। वहाँ बैठे व्यक्ति ने कहना शुरू किया – “मैडम एक ही शौचालय है, वहाँ इमरजेंसी केस में ही कोई जाता है। बाकी तो छोटा केस सारे लोग ऑफिस के पीछे निपटा देते हैं। ऐसा है मैडम पिछले सात – आठ साल से इसी खपरैल ऑफिस में हम काम कर रहे हैं। उतने दिनों से कोई औरत यहाँ ज्वाइन करने आई ही नहीं; आप पूरी तरह पहली महिला हैं जो इस ऑफिस में आईं हैं।”

अरे! हाँ; “मुंडा जी परसों आप डीसी ऑफिस गये थे परमानेंट बिल्डिंग के प्रोपोजल का क्या हुआ?”

“सर; सब ठीक रहा तो अगले मार्च से काम शुरू हो जायेगा। मैडम का भाग्य, इनके आते ही नई बिल्डिंग बन जाये और महिलाओं के लिए अलग से शौचालय भी बन जाए।”

इस ऑफिस में ज्वाइन करते ही साची के लिए नई चुनौती शुरू हो गई है। ऐसा है; बहुत ही मेहनत और कितनी परीक्षाओं में बैठने के बाद इस स्टेनो की परीक्षा पास कर पाई है। माँ-पिता ने अंतिम वार्निंग दे रखी थी, इस साल भर राँची हॉस्टल में रहने देंगे; अब कोई परीक्षा नहीं पास करोगी तो घर का आटा गीला मत करो। शादी–ब्याह की भी धमकियाँ आम बात हो गई थी। पिछले दो साल से परीक्षा और प्यार दोनों को बचाने की चुनौती के साथ सबकुछ इतना भी आसान न था।

स्टेनो के रिजल्ट को जब तेज ने बताया तो वो उस ख़ुशी के साथ दो फाड़ में बंट गई। पहले उसके कॉल और विडियो कॉल का समय माँ के लिए निर्धारित होते थे और तेज को अपने चौबीस घंटे में सोलह घंटे का समय देती थी। दोनों साथ पढ़ते, कोचिंग जाते ऐसे साथ – साथ पिछले दो सालों से थे। तेज ने बाकी के आठ घंटों में सेंध लगाने की कोशिश की – “साची आज हमदोनों नाइट शो पिक्चर देखकर आते हैं; तुम अपनी पीजी वाली आंटी से कोई बहाना कर दो।”

“तेज मैं तुम्हें कितनी बार बता चुकी हूँ समय की इस सीमा के बाहर मैं तुम्हें समय नहीं दे सकती; मैं इस नैतिकता की चादर को अपनी नौकरी अपनी स्वतन्त्रता के बाद ही फेंक पाऊँगी।”

साची के ऐसे बहानों से जाने कितनी बार तेज आहत हुआ, कई बार तो ब्रेक अप और रास्ते अलग – अलग करने की परिस्थितियाँ भी आईं। लेकिन, दोनों की दोस्ती और प्यार की समझ परिपक्व थी। दोनों को अपने – अपने रिजल्ट का इंतज़ार रहता। साची से पहले तेज ने बैंक ज्वाइन कर ली और साची ने ब्लॉक में स्टेनो। तेज की पोस्टिंग वहीं राँची में हो गईं और साची की पोस्टिंग पलामू के किसी प्रखंड मुख्यालय में।

साची अब हर आधे घंटे में अपने दो रूपों को प्रस्तुत करती है। सुबह – सुबह जब माँ का फोन आता है तो वो ऑफिस की बड़ाई करते नहीं थकती है। मसलन, माँ- ऑफिस में सभी बड़े अच्छे हैं, अकेली लेडी होने की वजह से मुझे सब इज्ज़त देते हैं। बड़े बाबू तो बेटी जैसा मानते हैं और-तो-और मुझे अब लंच बनाने की भी जरूरत नहीं पड़ती, कोई–न–कोई मेरे लिए रोटियाँ बनवाकर लाता है। माँ से बात करने के तुरंत बाद जब तेज का फोन आता और साची पूरी तरह उलट जाती।

“जाने किस जन्म का पाप है कि यहाँ पोस्टिंग हो गई। कैसे भी ट्रान्सफर का जुगाड़ करो। आधे से ज्यादा लोग ऑफिस घूमने आते हैं। ओ ! मुंडा सर और लकड़ा सर के मुँह से इतनी बदबू आती है कि किसी काम के लिए उनकी टेबल तक जाने की हिम्मत नहीं पड़ती। माँ यहाँ आने बोल रही हैं और मैं सब ठीक है कहकर टाल देती हूँ। सबसे मुश्किल वाशरूम जाने में होती है, जानते हो! मैं अब ऑफिस में पानी ही नहीं पीती। मन करता है एडल्ट डायपर ही पहन लूँ। पिछली बार जब माँ-पापा के पास गई थी तब बिस्तर पर पड़ी दादी उनकी असमर्थता को देख मन रुक गया था एक उम्र के बाद अपने शरीर पर भी अपना नियंत्रण नहीं रहता। अपने लिए डायपर की कल्पना के बाद दादी की दशा जेहन में आ जाती। कितना अजीब है न एक तरफ शारीरिक  मज़बूरी दूसरी तरफ सामाजिक मजूबरी।”

साची की ऐसी बातें सुन तेज ठहाके लगाने लगता तो साची कहती – “हँस लो, हँस लो जिसपर बीत रही है वह समझेगा न; फिर भी किसी-किसी दिन ज़ोर से वाशरूम की तलब होती है तो भगवान–भगवान करते घुसती हूँ।”

रोज़ – रोज़ एक ही तरह की शिकायत और बात सुन तेज भी अब झुंझला जाता।

“तुम्हारा ये पुराण जाने कब समाप्त होगा?”

फिर भी साची के दिन की शुरुआत और बाद की बातों के विसर्जन की जगह तेज ही रहता। तेज से अपनी बात कह साची अपने को रुई के फाहे जैसा महसूस करती। इंसान अपनी परेशानियों को सिर्फ़ कहकर सोचता है कि अब वह आधी हो गईं।

देखते – देखते साची को भी इस कार्यालय में काम करते छ: महीने बीत गये।

आज फिर अपनी शिकायतों की गठरी लिए तेज से बात करती साची की आवाज़ सख्त हो गई –

“ आज जब मैं कार्यालय कब तक बनेगा यह पूछ रही थी। तब ऑफिस के चंद मर्दों ने मेरा मजाक बना दिया कहने लगे- क्या मैडम आप भी समस्या बनाकर बैठी हैं, हमारे झारखंड में रेजा – कुली और गाँव की औरतें खड़े होकर ही निपटा देती हैं।

मेरा दिमाग खराब हो गया किसी बात पर बस नीचा दिखाना है। नियति भी अजीब है औरतों की प्राकृतिक बनावट के साथ ऊँचाई भी मर्दों की तुलना में छोटी कर हरदम याद दिलाते रहता है तुम औरत हो।”

तेज ने कहा – “कितना सोचती हो, अच्छा यह बताओ शौचालय में कुछ प्रगति हुई है नहीं।”

“ हुई है न; शौचालय के अंदर अब बाल्टी के साथ एक स्टील का लोटा आ गया है। गैलरी और चारों ओर तहक़ीक़ात के बाद जब कोई नज़र नहीं आता तो वह सर्र से वाशरूम में घुस जाती हूँ, फिर भी किसी के आने का अंदेशा बना रहता  है, थोड़े–थोड़े अंतराल पर लोटा बजा देती हूँ।  जिस दिन वॉशरूम जाना पड़ता है लगता है एक नरक पारकर निकल आई हूँ। पीली बाल्टी और चिकट फ़र्श का सामना नहीं करना चाहती हूँ। दूसरी तरफ़ यूरिन इन्फ़ैकशन के खतरे से भी बहुत डर लगता है। पीजी की वो रात कैसे भूल सकती हूँ कॉलेज के वाशरुम से इन्फेक्शन लेकर आ गई थी; ठहर – ठहरकर वाशरूम जाते – जाते थक गई थी, बाद में तो ऐसा लगने लगा था कि यहीं बाथरूम में बैठे रहूँ। बहुत मुश्किल से दवा और एक हफ्ते तक इन्फेक्शन की दवा खाने के बाद ठीक हो पाई थी। हाँ! आजकल संडास थोड़ा बहुत साफ़ रहने लगा है, मैंने स्वीपर को अलग से कुछ पैसे पकड़ाना शुरू कर दिया है।”

एक संघर्ष अलग तरह का जिसे सिर्फ़ तेज को बता पाती है अपने किसी दोस्त को भी नहीं। कभी – कभी ख़ुद पर हंसी भी आती है और अपने प्रेम पर फक्र भी जो उसके मन की कैसी भी बात सुनता है। उसने अपनी दोस्तों से जाना था लडकियाँ अपने बॉयफ्रेंड से सामान्य तौर पर ऐसी बातें नहीं करती हैं।

आज शुक्रवार है। तेज का कॉल आया –“सुनो कल की छुट्टी ले लो, तुम्हें देखे हुए बहुत दिन हो गये, मेरे बैंक में तो सेकंड सैटरडे की छुट्टी रहेगी बस एक बार तुम आ जाओ।”

बिना किसी हिलहुज्जत के साची ने तेज की बात मान ली  और ऑफिस में छुट्टी की अर्जी दे डाली। मन में एक चोर था कि छ: घंटे के रास्ते पर तो उसका घर भी है लेकिन इस चार घंटे के रास्ते में जाने के लिए वह तैयार हो गई। कहीं – न – कहीं तेज ने अपनी पैठ साची के मन मस्तिष्क में पूरी तरह बना ली है।

साची ने आज छ: महीने बाद अपना फेवरिट ब्लू जिंस और व्हाइट टॉप के ऊपर रेड जैकेट पहना है। तेज ने जो झुमके उसके पिछले बर्थ डे पर दिये थे उसे पहनते हुए जाने कहाँ खो गई। उसे लगा जैसे तेज उसके बालों में उँगलियाँ फिरा रहा है और वो झुकते जा रही है जैसे वो अपना वजूद उसकी छाती से टिका रही हो। अबकी बार वो जोर – जोर से हँसने लगी। न जाने; मैंने कौन सा पुण्य किया जो ऐसा प्रेमी मिला? मेरे हाथों के अलावा अबतक वो कहाँ छू पाया, मेरे किसी अंग को। पहले दिन हाथों के पकड़ने के अहसास को समेटते हुए कैसे मैंने उसे झटका दे दिया था। वही है जो मुझे इतना स्पेस देता है आजकल प्रेमी और प्रेमिकाएं बदलना तो फैशन में है। उसके पीजी में भी तो लड़कियाँ आए दिन प्रेमी बदलते रहती थीं।

 तैयार होकर साची आईने के सामने दो-तीन बार खड़ी हो ख़ुद को देख चुकी है। ख़ुद को पूरी तरह तैयार कर साची घर से निकल गई।

राँची की बस पकड़ने के लिए उस सरकारी बस स्टैंड आने में उसे एक घंटे लग चुके हैं। बस स्टैंड तक आने के लिए उसे टेकर की यात्रा करनी पड़ी। टेकर की इस यात्रा में हर तरह के गंध-सुगंध को पचा रही है। उसने अपनी सुविधा के लिए एक सीट का ज्यादा पैसा दिया फिर भी कोई फर्क नहीं पड़ रहा है। किसी ने हड़िया तो किसी ने महुआ पी रखा है। उसके बगल की सीट पर एक पढ़ी – लिखी सी औरत बैठी तो उसकी साँसें अपनी जगह पर ठीक से चलने लगी, वैसे इन छ: महीनों में ये सारी तस्वीरें आम हो गई हैं। बस स्टॉप पहुँचने पर पता चला नौ बजे वाली बस आज नहीं जायेगी, अगली बस अब दस बजे जायेगी। बस अभी आई नहीं थी। स्टैंड में कहीं बैठकर मोबाइल चलाकर समय बिताने के अलावा कोई रास्ता नहीं दिख रहा है। यात्रियों के लिए कुछ सीमेंट से बने चबूतरे की तरह जगह जरूर थे, लेकिन कहीं कोई खाली जगह नहीं। किसी की टोकरी तो कुछ बोरियाँ रखी हुईं थी। पान की गुमटियों पर टंगे गुटखे की लच्छियाँ और उनपे बजते नागपुरी गाने साची को अपवर्ड लग रहे हैं। उससे इतनी ही देर में जाने कितने लोग पूछ चुके हैं?

“कहाँ जाना है मैडम?”

एक – दो लोगों को जवाब दिया फिर उसे यह बात समझ आई सभी उससे सिर्फ़ पूछने आ रहे हैं; वे उसकी आवाज़ सुन या उसके इर्द-गिर्द घुम अपनी नज़र और अपनी इंद्रिय को शांत कर रहे हैं। डेढ़ घंटे लोगों की पूछती आँखों के बीच काटना बड़ा ही कठिन लग रहा है। फिर भी अब तो कैसे भी इन पलों को काटना है। यात्रा के इस पड़ाव में घूरती नज़रों से पीछा छुड़ाना और ठंड के दिन की सबसे बड़ी समस्या बार – बार पेशाब लगने की, इसका निपटारा मन की शांति के लिए जरूरी होता है। वैसे अपने कमरे से निकलने के पहले साची तीन–चार बार निवृत होकर हो चुकी है। मन और शरीर की इस शांति के लिए  उसने एक रास्ता निकाला है कि घर से कम पानी पीकर निकलूंगी तो ऑफिस में भी कम रिस्क की संभावना रहेगी और यात्रा में भी इसी नुस्खे पर भरोसा जताया। बचपन से ही इस बार – बार पेशाब जाने की समस्या को टालने के लिए कम पानी पीने की आदत जैसी ही हो गई है। हालाँकि, यूरिन इन्फेक्शन की समस्या की वजह से डॉक्टर से कई बार सामना हो चुका है और डॉक्टर ने ज्यादा पानी पीने की हिदायत दसवीं क्लास के समय ही दे रखी थी। कई वर्ष पहले दी गई हिदायत समस्या के समाधान के समक्ष बौनी थी। बचपन से ही सार्वजनिक जगहों पर त्याग की समस्या ने कम पानी पीने को मजबूर कर दिया था। अब वर्तमान परिस्थितियों में इन्फेक्शन का एक अनजाना भय भी हावी रहता है। तत्काल की समस्या को टालने के लिए भविष्य की चिंता ना करना ही बेहतर है। यह साची ने मान लिया है। परिस्थितियों को स्वीकार लेना अपने आप में समाधान है।

एक घंटे से ज्यादा बस का इंतज़ार कोई जानने वाला नहीं थोड़ा बहुत व्हाट्ट्सएप्प और फ़ेसबुक टटोलने के बाद दिमाग फिर उस जगह पर अटक गया। मस्तिष्क के अग्र-भाग की कोशिकाएँ भूलती क्यों नहीं? उन्हें बिनवजह बार – बार यूरिन पास करना याद रहता है। अब समस्या से ज्यादा बस में कहाँ करुँगी की चिंता हावी थी इस वजह से उसे एक बार निवृत होने  की अनिवार्यता समझ आ रही है। साची ने बस का इंतज़ार करती एक महिला से तफ़्तिश की। महिला भी जैसे किसी के इंतज़ार में बैठी थी। साची और अनजानी महिला थोड़ी देर के लिए ही सही सखी हो चुकी हैं, दोनों ने आँखों ही आँखों में बातें की और वाशरूम की तलाश में निकल पड़ी। बस-स्टैंड में इधर- उधर शौचालय ढूंढती महिलाएँ सफल नहीं हो पाईं। एक पान के गुमटी वाले ने इशारा किया  – “उस मकान के पीछे चल जाइए।”

दोनों की नज़रें उस मकान को ढूँढ ही रही थी कि एकबारगी बस- स्टैंड में सब दौड़ने लगे। चार–पाँच आवाज़ें राँची,राँची… की आने लगी। दो बसों के पैसेंजर बस का इंतज़ार कर रहे थे; सब बस की दिशा में भागने लगे। एक व्यक्ति लगभग साची का हाथ पकड़ने लगा मैडम जी जल्दी चढ़िए नहीं तो अगली बस बारह बजे आयेगी। साची भी बस के पास खड़ी हो गई जैसे – तैसे एक सीट मिल गई। बस में बैठने और सीट के इंतज़ार में ध्यान भटक गया। बस भर चुकी है फिर भी राँची,राँची … की आवाज़ आ रही है। अब बस में तिल भर जगह नहीं है,एक के ऊपर एक लदे लोग उसी बीच कंडक्टर की बीच-बीच में आवाज़ आ रही है- “और पीछे चलिए और पीछे।”

“अब कहाँ जाए भईया”

“बस खुलेगी अपने जगह बन जायेगा”

इसी बीच उस बस – स्टॉप के लिए टिकट काटने वाला कमीशन एजेंट बस में चढ़ चुका है।

राँची, राँची …. की आवाज़ लगानेवाले लोगों को दस-बीस रुपया पकड़ाकर कंडक्टर भी बस में चढ़ चुका है।

साची को संयोग से खिड़की वाली सीट मिली है, वहाँ से वो बाहर के दृश्यों को देख सकती है। बस की सकदम हालत को देखकर अंदर देखना मुमकिन नहीं। आवाजों से अंदर बैठे लोगों का जायजा लिया जा सकता है।एक – दो बच्चों की रोने की आवाज़ के अलावा भीड़ में  लोगों की साँसों की जद्दोजहद सुनी जा सकती है। बीच-बीच में कमीशन एजेंट  की आवाज़ आ रही है- “एक पैसा कम किराया नहीं , डेढ़ सौ निकालिए,डेढ़ सौ।” भीड़ की वजह से एजेंट के चेहरे को नहीं पहचाना जा सकता लेकिन आवाज़ की पिच अब हर यात्री के मस्तिष्क में उतर चुका है । वो एजेंट भीड़ को धक्का देते साची की सीट के पास आ चुका है ।

तभी साची को वो पिछले आधे घंटे से जानी – पहचानी आवाज़ आई- “किराया निकालिए।”

साची ने पाँच सौ का एक नोट पकड़ाना चाहा।

“खुले पैसे दीजिये ?”

 “रुकिए देखती हूँ”

“जल्दी कीजिए मैडम”

उसने डेढ़ सौ रुपए पकड़ाये, तबतक सामने लिखे अक्षरों पर नज़र पड़ी। कागज पर बड़े-बड़े अक्षरों में लिखा हुआ है ।

बस कहीं नहीं रुकेगी, सीधे राँची ही रुकेगी। पेशाब वगैरह के लिए भी बस नहीं रुकेगी। कंडक्टर को बार – बार परेशान न करें।

यह पढ़ते ही साची के दिमाग की बॉल-बत्ती गुल हो गई। उसने इस तुगलकी फरमान को बस में दूसरी जगहों पर भी देखने की कोशिश की।

अपने को समझाते हुए कान में ईयरफोन लगा लिया, फिर तेज को कॉल लगाया। उससे हल्की – फुल्की बात की और बस में चढ़ने की सूचना देकर वो गाने चलाकर अपने में व्यस्त हो गई। अपने गाने के साथ बस में किराया लेन-देन की धीमी सी आवाज़ सुनती साची तेज के बारे में सोच जाने किस दुनिया में खो गई।

ग्रेजुएशन फाइनल ईयर में नोट्स के लेन-देन से शुरू दोस्ती जाने कब प्यार में बदल गई। तेज की फिक्र और चाह ने साची को किसी दूसरे के बारे में सोचने का मौका ही न दिया। तेज के प्यार पर साची को इतना भरोसा था कि नौकरी लगते ही माँ से उसके बारे में बता चुकी थी। राँची रहते हुए दोनों कई बार अकेले में मिले लेकिन साची ने अपने आगे जो रेखा खींच रखी थी उसे पार नहीं कर पाई। तेज भी कभी खुलकर कुछ बोल नहीं पाया लेकिन एक अनजानी समझ में साची को मालूम था तेज उससे क्या चाहता है? अपने प्यार के अहसास के साथ हल्की खुली खिड़की से आनेवाली हवा के झोंके ने साची को नींद के आगोश में ले लिया। बस अपने वेग में चल रही है  मिड नाइनटीज के गाने चल रहे हैं। हालाँकि साची ने ईयरफोन लगाकर ख़ुद को बाहर के शोर से मुक्त कर रखा है। लगभग डेढ़-दो  घंटे की यात्रा के बाद बस की गेट के पास कोई यात्री बोल रहा है –“भईया थोड़ा रोक दीजिए इमरजेंसी है।”

“बस नहीं रुकेगी, बस में चढ़ने के पहले पढे क्यों नहीं? सब जगह तो लिखा है। आपके दस मिनट रोकने में हमारा टाईम छूट जाएगा, मालिक को कौन जवाब देगा?”

दो–तीन यात्री और बस रोकने के लिए हल्ला करने लगे।

“खलासी की आवाज़ आई आगे पाँच मिनट के लिए बस रुकेगी जिसको – जिसको हल्का होना है जल्दी आ जाये।”

अपने नैचुरल कॉल को दबाने की जुगत में पैर पर पैर चढ़ाकर बैठी साची को नींद आ गई थी। कंडक्टर और खलासी के एलान से अनभिज्ञ साची की नींद बस में अचानक लगे ब्रेक के बाद खुल गई। बस सड़क के किनारे ही रुकी जहाँ खाली खेत है। जल्दी – जल्दी सारे मर्द उतरने लगे एक – दो साड़ी वाली महिलाएँ भी उतर गईं। साची ने अपने प्रवाह को गाने और नींद की भटकन में रोक लिया था, अब उसकी भी इच्छा तीव्र होने लगी। नीचे उतरकर इधर-उधर झाँकती साची को थोड़ा सा एकांत चाहिए। आज इस जिंस के कारण इन मर्दों के बीच वो निवृत नहीं हो सकती। खलासी ने चिल्लाना शुरू किया -“जल्दी चढ़िए, जल्दी चढ़िए बस खुल जायेगी।” अपने अंदर एक बौखलाहट, एक चिढ और सबसे सच कोई रास्ता न होना से गुस्साई  हुई साची खलासी की आवाज़ सुन फिर बस में चढ गई। मुँह दबाकर मन ही मन भुनभुनाती वो अपनी सीट पर बैठ गई। फिर वही भीड़ और साची का गाना सुनने का उत्क्रम।

बस चल पड़ी, अब साची का पेट लग रहा है कि फट जायेगा। यह बेचैनी सिर्फ़ और सिर्फ़ वही समझ सकती है। यह यातना एक लड़की होने की यातना या बस से यात्रा की सजा थी।  इंसान या तो खूब थकने के बाद सो जाता है या बिल्कुल बोर हो जाने पर। अत्यधिक बेचैनी के शमन की चाह में साची की आँख फिर लग गई। अब नींद में स्वप्न जो पिछले छ: महीने का द्वंद है। वो पहले लड़ रही है अपने बिडीओ से फिर लकड़ा, मुंडा सभी ऑफिस वालों की नज़रों के लिए खुलकर ताना दे रही है, कल को आपकी बेटी बाहर जायेगी तो इसी नज़र से घुरिएगा। सपने में उल्टी- सीधी बाते देखते-देखते वो देखती है – वो अपने कार्यस्थल से राँची मार्केटिंग करने जा रही है। सड़क पर थोड़ी दूर चलने के बाद उसे ज़ोर से पेशाब लगी इधर-उधर देखने पर उसे कोई जगह नहीं दिखा। सड़क किनारे एक घर के दरवाज़े की घंटी बजाने पर एक महिला बाहर निकली उनसे वो मनुहार कर रही है –“आंटी प्लीज मुझे बाथरूम जाने दीजिए। आप मेरे पर्स रख लो, आप मोबाइल भी रख लो मुझे वाशरूम जाने दो, नहीं तो मैं जिंस में ही कर दूँगी।”

आंटी ने एक नहीं सुनी –“खूब जानती हूँ तुम जैसों को घर खाली कर दोगी।”

साची के पास आंटी से सवाल–जवाब करने की हिम्मत नहीं बची थी। तभी बगल की चारदीवारी से एक पुरुष की आवाज़ आई- “मैडम इधर आ जाइये”,

पिछले कई घंटों से परेशानी को जैसे एक मरहम मिल गया हो।

कौन ? क्या ? किसे ? आदि प्रश्नों को छोड़ वो उस अनजान व्यक्ति के घर में जाती है। सारे सामान बाहर एक कुर्सी पर रख, बाथरूम कहाँ है ? यह पूछ बिना जवाब का इंतज़ार किये वो वाशरूम में घुस रही है और उस संडास पर उसने अपनी लगातार कई घंटों की पीड़ा को त्याग दिया। तभी वो व्यक्ति उसका हाथ पकड़ जबरदस्ती करना चाह रहा है। वो चिल्लाने लगी ऐसा लग रहा है किसी ने उसका गला दबा दिया।

अचानक से किसी ठंढी चीज का अहसास! स्वप्न टूट चुका है । इस गीले अहसास ने एकदम से बचपन में लौटा दिया। उस समय तो मस्तिष्क और नियंत्रण में तारतम्यता नहीं होने पर जब भी बिस्तर गीला किया तो उसे चांटे मिले। बचपन के उसी अहसास के साथ नींद खुली। मस्तिष्क ने मूत्र त्याग की तीव्रता के आगे हाथ खड़े कर लिए हैं। उसे अनुभव हुआ पैरों के पास बहते पानी का, उसकी जिंस और सीट दोनों गीले हो चुके हैं। वो अब बिल्कुल हल्की हो चुकी है। इस पंद्रह मिनट के जद्दोजहद में साची मन से भी हल्की हो गई।

जब अपने बहाव को प्रवाहित कर चुकी हूँ तब कैसा शर्म? कितनी चीजें इकट्ठी थीं जिसे वो उड़ेलना चाहती थी। इसी गीलेपन के भय में वो अबतक अपने को दबाये जा रही थी। नींद और गीलेपन  में धँसी साची की आँख अचानक से कंडक्टर की आवाज़ सुनने के बाद खुलती है। बस राँची बस-स्टैंड में पहुँच चुकी है। बस के अंदर की लाइट ऑन है वैसे बाहर भी धूप खिली हुई है। बस–स्टैंड में कुछ दूर पर खड़े तेज को साची देख चुकी है। उसने हाथ हिलाकर तेज को सूचित करने की कोशिश की, वो उसे देख नहीं पाया। उसने बचपन से लेकर अब तक की दागदार चीज का आज सार्वजनिक विसर्जन कर दिया। बस से एक-एक-कर उतरती सवारियाँ अब उसके बर्दाश्त के बाहर है।  अब वो बेधड़क उतर सकती है, उसने एक सवारी को लगभग धक्का दे दिया, बेझिझक वो बढ़ चली है।  उसकी आँखों में चमक है आज इस प्राकृतिक विसर्जन के साथ दुनिया की बनाई उस मूर्ति को ही तोड़ चुकी है, साची पवित्रता और अपवित्रता के दायरे को तोड़ बढ़ चुकी है। अप्रत्याशित रूप से वो दौड़कर तेज के गले लग गई। तेज के होठों पर चुंबन जड़ती वो आज सच में निर्मल हो गई।

==========================

दुर्लभ किताबों के PDF के लिए जानकी पुल को telegram पर सब्सक्राइब करें

https://t.me/jankipul

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

1 mins
WordPress Center Ankara Escort: Beypazarı Escort, Pursaklar Escort, Etimesgut Escort İstanbul Escort: Esenyurt Escort, Bahçelievler Escort, Maltepe Escort Bursa Escort: Gürsu Escort, Keles Escort, İznik Escort What are the best budget smartphones available in 2025? Reason Why Everyone Love Travel Doubts About Lifestyle You Should Clarify List Fusion – Best PopUp and Lead Generation Plugin Cleaning Services Booking Management for WordPress and WooCommerce Ultimate Reviewer – Elementor & WPBakery Page Builder Addon Recent Posts For Elementor Kuveyt Türk 3D Virtual POS Gateway for WooCommerce SurvForm – Survey Form Builder Plugin For WordPress News Revolution Layouts for Elementor WordPress Plugin Hospital – Hospital Management System Zigaform – PHP Form Builder – Contact & Survey Multi-Page Forms for NEX-Forms