आशकारा खानम कश्फ़ की नज़्म ‘डर तो लगता है’

आज पढ़िए उर्दू की संजीदा शायरा आशकारा खानम कश्फ़ की नज़्म-
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डर_तो_लगता_है
 
डर तो लगता है
कोई पूछे तो, इस ज़माने में
साफ़ कहने में, कुछ छुपाने में
आईनों से, नज़र मिलाने में
डर तो लगता है
 
डर तो लगता है
ज़ब्त को अपने, आज़माने में
ख़ुद ही ख़ुद से, फ़रेब खाने में
बेसबब कश्फ़, मुस्कुराने में
डर तो लगता है
 
डर तो लगता है
कुछ भी सुनने में, या सुनाने में
शामे फ़ुरक़त, ग़रीब ख़ाने में
वक़्त बे वक़्त, आने जाने में
डर तो लगता है
 
डर तो लगता है
पास आने में, दूर जाने में
इक कहानी में, या फ़साने में
कोई किरदार, हो निभाने में
डर तो लगता है
डर तो लगता है
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