राकेश तिवारी के उपन्यास ‘राम सिंह फ़रार’ का एक अंश

वरिष्ठ लेखक राकेश तिवारी के नए उपन्यास ‘राम सिंह फ़रार’ का अंश पढ़िए। राकेश तिवारी के गद्य को पढ़ने का अपना आनंद है। वाणी प्रकाशन से प्रकाशित इस उपन्यास को पढ़ने का अपना ही सुख है-

===================

भवान सिंह और गंगा देवी के बार-बार फ़ोन आ रहे थे— चपेड़ लगाई उसे? गिरीश कैसे बताए कि चपेड़ तो तुम्हारा लड़का लगा गया। उसे, पुलिस डिपार्टमेंट को, बच्चू बाबू को, रामबदन, मामा, सभी को। एक-दो बार उसने टालमटोल की और अंत में फ़ोन उठाना बंद कर दिया। उसके बाद पूरन ने कॉल किया कि भवानी चाचा का फ़ोन क्यों नहीं उठा रहे जीजाजी? उसने टाल दिया। अरे भाई, व्यस्त हो गया था।

   कैसे बताए राम सिंह भाग गया। ससुराल में इज़्ज़त के धुर्रे उड़वाता? उनकी नज़र में खच्चर बन जाता? अपनी बेबसी पर बड़ी झुँझलाहट हो रही थी। हाथ आया लड़का उसके रहते मछली की तरह फिसल गया। अब इतने बड़े समुंदर में कहाँ मिलेगा?

   उधेड़बुन चल ही रही थी कि एक दिन अचानक गोरेलाल मिल पड़ा। कुपोषण का शिकार ऊँट समझ लो। बादाम गिरी जैसे पक्के रंग का। गिरीश ने किसी भी स्रोत से अब तक इस बात की पुष्टि नहीं की थी कि यह राम सिंह उन्हीं सल्ला वालों का बेटा है जो आदमी को भगवान बना देते हैं? उसने मान लिया था राम सिंह वही है। एस.आई और थानेदार ने भी मान लिया था और भवान सिंह व उसकी पत्नी ने भी। गोरेलाल से मिल कर गिरीश के मन में यह सवाल अचानक कौंधा कि वह भवान सिंह का ही बेटा था, इसका प्रमाण क्या है? क्या एक बार इस बादामी आदमी से नहीं पूछना चाहिए?

   गोरेलाल बात करने को इसलिए राजी हुआ क्योंकि उसको अपनी बेइज़्ज़ती का फोड़ा ठीक होता नहीं लग रहा था। वह एक अलग कहानी थी जो उसके पिछवाड़े में पल रही थी।

   गोरेलाल ने बताया जिस दिन पुलिस राम सिंह को पकड़ने आई थी और बच्चू बाबू मामा बुद्धिनाथ के घर पहुँचे थे, उस दिन पुलिस के जाने के बाद असल कांड हुआ। ग़ज़ब ही हो गया था श्रीमान। इधर पुलिस गई, उधर बच्चू जी मामा के सोफ़े पर दैत्य की तरह पसर गए। मामा उनके लिए जूस लाने लगे तो वे झल्लाए— अब जूस पिला कर ठंडा करोगे? मामा इशारा समझ गए। दिन-दहाड़े शिवाज रीगल खोल दी, जो उन्होंने मध्यम श्रेणी के सरकारी अफ़सरों की ख़िदमत के लिए सँभाल कर रखी थी। इससे नीचे का कोई ब्रांड खोल कर वे बच्चू जी को झल्लाने का मौक़ा नहीं देना चाहते थे। उन्हें लग रहा था केस की दिशा बदलने से बच्चू बाबू खीझे हुए हैं। बच्चू बाबू ने दो पैग तेज़ी से गले में धकेल कर अचानक मामी को आवाज़ दी। मामी डरी-सहमी ड्राइंग रूम में पहुँचीं तो बच्चू जी ने पुचकार कर कहा, “ज़रा और क़रीब आओ।”

   मामी क़रीब आने में घबराएँ। संबोधन से तरीक़े से संकेत मिल गया था कि गड़बड़ हो गई। बच्चू जी डपट कर बोले, “इधर आओ।”

   मामी थरथर काँपने लगीं। मामा पास में खड़े घबरा रहे थे कि श्रीमती जी पर गाज जाने क्यों गिर पड़ी। अब यह नया मोड़ कहाँ से आ गया? इस हड़बोंग में वे गोरेलाल को भूल गए। उसे उन्होंने बाहर बारामदे में फ़्यूज़ बल्ब बदलने के काम में लगा रखा था। कहा था, अभी और इसी वक़्त बदलो। रात में कोई आ जाए या भाग जाए, साला पता ही नहीं चलता। गोरेलाल बाँस की सीढ़ी पर चढ़ कर बल्ब बदल रहा था और वहाँ से ड्राइंग रूम का पूरा दृश्य देख रहा था— बच्चू बाबू सोफ़े पर पसरे हैं। उनकी पीठ और मुंडी दिख रही है। मामी साड़ी के पल्लू का एक कोना पकड़े सामने खड़ी हैं। कुछ दूरी पर सहमे खड़े हैं मामा। मेज पर शराब की बोतल और गिलास रखा हुआ है। गिलास में एक घूँट बची है। मामी के पीछे सूर्योदय की पेंटिंग है और उनके मुँह का सूर्यास्त हो गया है।

   मामी ने डरते हुए दो कदम आगे बढ़ाए। मुँह पर साँझ का झुटपुटा दिखाई दिया। तभी बच्चू जी उठे और उसी ढलते मुँह पर तमाचा जड़ कर वापस सोफ़े पर बैठ गए। बची हुई गले में उतार कर बोले, “साली, लौंडे के इश्क में हमसे दग़ा किया?”

   मामा को पहली बार भानजे की यह हरक़त ख़राब लगी। उन्होंने पहली बार बच्चू जी को चुप कराने की कोशिश की। हालाँकि घिघिया कर बोले, “इस तरह की बातें मत कीजिए बच्चू बाबू।”

   बच्चू जी ने डपट दिया, “चुप रहिये आप। एक डेढ़फुटिया औरत आपसे सँभलती नहीं, बड़े आए सलाह देने वाले। इसका यार न होता तो भगाती उसे?”

   बच्चू जी और मामा दोनों छहफुटा आदमी थे। उन्हें पाँच फुट दो इंच की मामी डेढ़ फुट की लगती थीं।

   “ज़बान सँभालो अपनी, समझे।” मामी चंडी रूप में आ गईं। बच्चू जी ने दूसरा थप्पड़ रसीद करने के लिए कदम बढ़ाया ही था कि वे चिल्लाईं, “ख़बरदार बच्चू बाबू, वरना भूल जाएँगे तुम कौन हो। अपने नीचे सुला लिए तो इसका मतलब ये नहीं कि हम किसी के भी इश्क में पड़ जाएँगे।”

   बच्चू जी सन्नाटा खा गए। इस औरत ने तो एक डायलॉग में जिंदगी झंड कर दी। वे सोफ़े पर बैठकर दूसरा पैग बनाने लगे। गोरेलाल अपने कत्थई होंठों में मुस्करा रहा था। फोड़े पर मलहम लग रहा था। मन झूम उठा। होल्डर पर फिट हो चुके बल्ब को वह केवल इसलिए थामे रहा कि कहीं फिसल पड़ा तो आहट हो जाएगी। नहीं चाहता था वे उसे घटना का चश्मदीद बनने से वंचित कर दें। फिर सिरफिरे बच्चू बाबू का क्या भरोसा। सीढ़ी पर लात ठोक कर कहें— उतरो नीचे बे, आसमान में चढ़ कर तमाशा देख रहे हो?

   ले दनादन गालियों की बौछार।

   वह बच्चू बाबू से घृणा करता था और कुछ हद तक मामा से भी।

   बच्चू बाबू मामा से नज़रें चुरा रहे थे। मामा ने मामी का मुँह दबोचने की कोशिश की तो वह हाथ छुड़ा कर बच्चू जी पर दहाड़ी, “तुम क्या समझते हो, हमें तुमने फँसाया? या हम तुम पर फ़िदा हो गए? नहीं, ग़लतफहमी में जी रहे हो। ये जो आदमी मेरा मुँह दबा रहा है, जिसे तुम ताड़ का पेड़ कहते हो और मूर्ख समझते हो, इसने हमें फँसवाया।”

   इस बम विस्फोट से मामा खड़े-खड़े ज़मीन में गड़ गए।

   “हमारा जन्म तुम्हारे मज़े के लिए और इन छहफुटिया की सफलता के लिए नहीं हुआ, ये बात समझ लो। लेकिन तुम क्या समझोगे बे? तुम दोनों अगर मनुष्य होते तो तुम्हें पता होता कि एक औरत को किसी में अपना बेटा भी दीख सकता है।” इतना कह कर मामी काँच की तरह बिखर गईं। वे कुछ और कहतीं तो भी उन दोनों मर्दों को समझ न आता। इसीलिए मामी ने इससे आगे जो बोला वह शायद आत्मालाप था। जिसे गोरेलाल सुन नहीं पाया और गिरीश को बता नहीं पाया। जिसे पत्रकार चंदन जान भी लेता तो अपनी अख़बारी रपट में लिख नहीं पाता। भावनाएँ अख़बार में लिखी नहीं जातीं। क्या लिखता, कि एक औरत जो अपने पति के भानजे के नीचे सोती थी वह घर में काम करने वाले एक युवक में अपना बेटा ढूँढ़ती थी? बेटा जो पैदा होने के साल भर के भीतर गुज़र गया, जो उसके बाद कभी पैदा नहीं हो पाया, जिसे दो मर्द मिल कर पैदा नहीं कर पाये। ऐसी सपाट भाषा में?

   नहीं, भावनाएँ किसी भाषा में लिखी नहीं जा सकतीं।

   वे क्या बतातीं और ये सिल-लोढ़े क्या समझते? यह बतातीं कि राम सिंह को वे अपने पुष्ट स्तनों से एक बेटे की तरह चिपकाना चाहती थीं? राम सिंह को बेटे की तरह देखने लगी थीं, इसीलिए छुप कर फल, दूध और खाने-पीने की चीज़ें दिया करती थीं? मामा की अनुपस्थिति में कई बार उसके गाल खींच लेती थीं? उस लाड़ को ये दोनों तो एक लौंडे से इश्क ही मानते। दुनिया ही कौन-सा यक़ीन कर लेती।

   गोरेलाल सीढ़ी से तब उतरा जब दृश्य का पटाक्षेप हुआ। चुपके से। मन पर उदासी की चादर पड़ गई थी। मामी के लिए दुखी था। हालाँकि शुरुआत में वह खुश हुआ और चाहता था मन उसी तरह झूमे, हवा चलने पर पेड़ जैसे झूमता है। वह तो जीवन में कभी बदला नहीं ले सकता था, मामी ने ले लिया।

   पर चाह कर भी मन झूम नहीं रहा था। न पछवाँ चल रही थी, न पुरवा। मौसम ग़ुम था।

   गोरेलाल का फोड़ा फिर टीसने लगा। घटना साल भर पुरानी है। तब तक राम सिंह का आगमन नहीं हुआ था। बच्चू बाबू लकदक कुर्ता-पजामा पहने घर में घुसे थे। घंटे भर बाद जब लौटे तो उनका नाड़ा लटका हुआ था। गोरेलाल से रहा नहीं गया। बोल दिया, “बाबू, नाड़ा।”

   बच्चू बाबू ने पहले अपना नाड़ा देखा और फिर जिस फुर्ती से उसे लपेटा उसी तेज़ी से गोरेलाल को लात जमा दी, “अपनी औक़ात में रहा करो हरामी। समझे?”

   मामा उस वक़्त घर से बाहर निकले थे। लौटने पर दूसरे नौकर माधो ने उन्हें सब बता दिया। वे बच्चू जी की नाराज़गी का कारण पूछते रहे। माधो एक ही बात कहे कि उसे नहीं पता, उसने दूर से देखा था। वह बेहद डरा रहने वाला आदमी था। हर घटना के मनोरंजक पक्ष को वह क़रीब से और उत्पीड़न को सुरक्षित दूरी से देखता था। मामा ने गोरेलाल को पुचकारा। अंततः उसकी टोंटी खुल गई। धारमधार बहा। मामा ने समझाया, “देखो, पेशाब फिरने के बाद नाड़ा कई बार लटका रह जाता है। बहुतों के लटके रहते हैं। तुम्हें टोकने की ज़रूरत क्या थी?”

   इस घटना ने बच्चू बाबू के लिए तो मन में नफ़रत भर ही दी, मामा भी उसकी नज़रों में गिर गए। थू है तुझ पर निर्बुद्धिनाथ।

   उस दिन बुद्धिनाथ को उसने मूर्ख समझा था।

   बाँस की सीढ़ी से उतरते हुए वह उदास था और उदासी ने बदला उतरने का सारा मज़ा किरकिरा कर दिया। सब अधूरा-सा लगने लगा। इस वाक़ये को किसी से साझा करने की इच्छा पाल ली थी, ताकि रूह को आराम मिले और फोड़े को ठंडक।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

1 mins
WordPress Center Ankara Escort: Beypazarı Escort, Pursaklar Escort, Etimesgut Escort İstanbul Escort: Esenyurt Escort, Bahçelievler Escort, Maltepe Escort Bursa Escort: Gürsu Escort, Keles Escort, İznik Escort What are the best budget smartphones available in 2025? Reason Why Everyone Love Travel Doubts About Lifestyle You Should Clarify WordPress Live NFT Cards Affiliates with VueJS Masking Video addon for Elementor Bookly Custom Duration (Add-on) WooCommerce for LatePoint (Payments Addon) WP IconFinder – Find free icons for WordPress WooCommerce Product Page Customizer WordPress Popups Plugin Stunning 3D Off Canvas Menu WordPress Plugin – 3D Menu Awesome Interactive World Map for Elementor – Mapper Gravity Forms Autocomplete (+address field)