बिना अपनी परम्परा को जाने उससे विद्रोह की बात काफी निरर्थक लगती है- मनोहर श्याम जोशी

मनोहर श्याम जोशी की पुण्यतिथि पर प्रस्तुत है यह साक्षात्कार जो सन 2004  में आकाशवाणी के अभिलेखगार…

‘शुक्ल भी केवल अपने तरह के ही दिखाई पड़ते हैं, शुक्ल की तरह।’

लेखक-कवि विनोद कुमार शुक्ल को ज्ञानपीठ पुरस्कार मिलने पर यह टिप्पणी लिखी है अमेरिका प्रवासी प्रसिद्ध अंग्रेज़ी…

अशोक कुमार पांडेय के कविता संग्रह पर पवन करण की टिप्पणी

बरसों बाद अशोक कुमार पांडेय का कविता संग्रह प्रकाशित हुआ है ‘आवाज़-बेआवाज़’। राजकमल प्रकाशन से प्रकाशित इस…