बोर्खेस की कविताएँ धर्मवीर भारती के अनुवाद में

अर्जेंटीना के कवि-लेखक होर्खे लुई बोर्खेस स्पेनिश भाषा के महानतम लेखकों में गिने जाते  हैं. हिन्दी में उनकी कविताओं के अनेक अनुवाद आए हैं. लेकिन मुझे सबसे अच्छे धर्मवीर भारती द्वारा किए गए अनुवाद लगते हैं, जो ‘देशांतर’ में सम्मिलित हैं. ध्यान रखने की बात है कि भारती जी ने बोर्खेस के अनुवाद तब किए थे जब अंग्रेजी में भी उनके कम ही अनुवाद आए थे और स्पेनिश भाषा के बाहर उनकी कोई खास चर्चा भी नहीं थी.   ‘देशांतर’ में संकलित दो कविताएं यहाँ प्रस्तुत हैं: जानकी पुल.
———————————————————————————————–

१.

नीले मकान

जहाँ सेन जुआन और चाकावुकों का संगम होता है
मैंने वहाँ नीले मकान देखे हैं
मकान: जिन पर खानाबदोशी का रंग है
वे झंडों की तरह लहरा रहे हैं
पूर्व- जो अपने आधीनों को स्वतंत्र कर देता है- की तरह गंभीर हैं

कुछ पर उषा के आकाश का रंग है
कुछ पर तड़के के आकाश का रंग
घर के किसी भी उदास अँधेरे कोने के सामने
उनका तीव्र भावनात्मक आलोक जगमगा उठता है
मैं उन लड़कियों के बारे में सोच रहा हूँ जो
तपते हुए आँगन में से आकाश की ओर देख रही होंगी
उनकी चम्पई बाहें और
काली झालरें
शरबत के गिलासों-सी उनकी लाल आँखों में अपनी
छाया देखने का उल्लास
मकान के नीले कोने पर
एक अभिमान भरे दर्द की छाप है
मैं लोहे का दरवाजा खोलकर
भीतरी सहन को पार कर
घर के अंदर पहुंचूंगा
कक्ष में एक लड़की- जिसका हृदय मेरा हृदय है-
मेरी प्रतीक्षा में होगी
और हम दोनों को एक प्रगाढ़ आलिंगन घेर लेगा
हम आग की लपटों की तरह काँप उठेंगे
और फिर उल्लास की बेताबी
धीरे-धीरे
घर की मृदुल शान्ति में खो जायेगी.

२.

आँगन

शाम होते-होते
आँगन के आलोक रंग मुरझा जाते हैं
पूनम के चाँद की विराट स्वच्छता, थिर, परिचित
आसमानों पर जादू नहीं बिखेरती
आसमान में बादल घिर आए हैं
दुश्चिंताएं कहती हैं कि किसी देवदूत का अवसान हो गया है!

आँगन आकाश का, स्वर्ग का संदेशवाही है-
आँगन एक खिडकी है, जिसमें से
ईश्वर आत्माओं की खोज-खबर रखता है-
आँगन एक ढालुआं रास्ता है
जिसमें से आकाश, घर के अंदर ढुलक आता है
चुपचाप-
शाश्वतता सितारों के चौराहों पर इन्तजार करती है!
चिर-परिचित दरवाजों, नीची गर्म छतों और
शीतल हौजों के बीच
एक संगिनी के प्रगाढ़ स्नेह की छाया में
ज़िंदगी कितनी प्यारी लगती है.

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बोर्खेस की कविताएँ धर्मवीर भारती के अनुवाद में

8 thoughts on “बोर्खेस की कविताएँ धर्मवीर भारती के अनुवाद में”

  1. Desantar me bhrarti ji ne bahut sari kavitawo ka achha anuwad kiya hai bharti hi ke apne Sarah thanda loha me bahut sari kavitawo se Joe rachana post kare

  2. बहुत अच्छी कविताएं हैं…कहाँ से चुन कर लाते हैं…?
    आपका इंतख़्वाब लाजवाब है ।

  3. Pingback: 토렌트
  4. Pingback: Bk8

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बोर्खेस की कविताएँ धर्मवीर भारती के अनुवाद में

अर्जेंटीना के कवि-लेखक होर्खे लुई बोर्खेस स्पेनिश भाषा के महानतम लेखकों में गिने जाते  हैं. हिन्दी में उनकी कविताओं के अनेक अनुवाद आए हैं. लेकिन मुझे सबसे अच्छे धर्मवीर भारती द्वारा किए गए अनुवाद लगते हैं, जो ‘देशांतर’ में सम्मिलित हैं. ध्यान रखने की बात है कि भारती जी ने बोर्खेस के अनुवाद तब किए थे जब अंग्रेजी में भी उनके कम ही अनुवाद आए थे और स्पेनिश भाषा के बाहर उनकी कोई खास चर्चा भी नहीं थी.   ‘देशांतर’ में संकलित दो कविताएं यहाँ प्रस्तुत हैं: जानकी पुल.
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१.

नीले मकान

जहाँ सेन जुआन और चाकावुकों का संगम होता है
मैंने वहाँ नीले मकान देखे हैं
मकान: जिन पर खानाबदोशी का रंग है
वे झंडों की तरह लहरा रहे हैं
पूर्व- जो अपने आधीनों को स्वतंत्र कर देता है- की तरह गंभीर हैं

कुछ पर उषा के आकाश का रंग है
कुछ पर तड़के के आकाश का रंग
घर के किसी भी उदास अँधेरे कोने के सामने
उनका तीव्र भावनात्मक आलोक जगमगा उठता है
मैं उन लड़कियों के बारे में सोच रहा हूँ जो
तपते हुए आँगन में से आकाश की ओर देख रही होंगी
उनकी चम्पई बाहें और
काली झालरें
शरबत के गिलासों-सी उनकी लाल आँखों में अपनी
छाया देखने का उल्लास
मकान के नीले कोने पर
एक अभिमान भरे दर्द की छाप है
मैं लोहे का दरवाजा खोलकर
भीतरी सहन को पार कर
घर के अंदर पहुंचूंगा
कक्ष में एक लड़की- जिसका हृदय मेरा हृदय है-
मेरी प्रतीक्षा में होगी
और हम दोनों को एक प्रगाढ़ आलिंगन घेर लेगा
हम आग की लपटों की तरह काँप उठेंगे
और फिर उल्लास की बेताबी
धीरे-धीरे
घर की मृदुल शान्ति में खो जायेगी.

२.

आँगन

शाम होते-होते
आँगन के आलोक रंग मुरझा जाते हैं
पूनम के चाँद की विराट स्वच्छता, थिर, परिचित
आसमानों पर जादू नहीं बिखेरती
आसमान में बादल घिर आए हैं
दुश्चिंताएं कहती हैं कि किसी देवदूत का अवसान हो गया है!

आँगन आकाश का, स्वर्ग का संदेशवाही है-
आँगन एक खिडकी है, जिसमें से
ईश्वर आत्माओं की खोज-खबर रखता है-
आँगन एक ढालुआं रास्ता है
जिसमें से आकाश, घर के अंदर ढुलक आता है
चुपचाप-
शाश्वतता सितारों के चौराहों पर इन्तजार करती है!
चिर-परिचित दरवाजों, नीची गर्म छतों और
शीतल हौजों के बीच
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