प्रसिद्ध लेखिका मृणाल पाण्डे इन दिनों कथा ऋंखला लिख रही हैं- बच्चों को न सुनाने लायक बालकथा। यह उस सीरिज़…
एक लडकी को उसके जूते की सही जोड़ी दो और वह आपको दुनिया जीत कर दिखा देगी: मर्लिन मुनरो
मर्लिन मुनरो 1950 के दशक की हॉलीवुड की सबसे चर्चित अदाकारा रही हैं. उनका जन्म 1 जून, 1926 को अमेरिका…
रचना का समय और रचनाकार का समय
योगेश प्रताप शेखर दक्षिण बिहार केंद्रीय विश्वविद्यालय में प्राध्यापक हैं और हिंदी के कुछ संभावनाशील युवा आलोचकों में हैं। रचना…
कविता शुक्रवार 5: अरुण देव की नई कविताएँ
‘कविता शुक्रवार’ में इस बार अरुण देव की कविताएं और युवा चित्रकार भारती दीक्षित के रेखांकन हैं। अरुण देव का…
संजीव पालीवाल के उपन्यास ‘नैना’ के बनने की कहानी
संजीव पालीवाल के उपन्यास ‘नैना’ की चर्चा लगातार बढ़ती जा रही है। वेस्टलैंड से प्रकाशित इस उपन्यास के बनने की…
उन्नीसवीं शताब्दी का आख़िरी दशक, स्त्री शिक्षा और देसी विदेशी का सवाल
युवा शोधकर्ता सुरेश कुमार ने 19 वीं शताब्दी के आख़िरी दशकों तथा बीसवीं शताब्दी के आरम्भिक दशकों के स्त्री साहित्य…
ये चराग़ बे-नज़र है ये सितारा बे-ज़बाँ है!
दरभंगा महाराज रामेश्वर सिंह पुरा नायक की तरह रहे हैं, जितनी उपलब्धियाँ उतने ही क़िस्से। अलीगढ़ के मोहम्मडन एंग्लो ओरियेंटल…
कोरोना काल में मध्यवर्गीय खिड़की और बालकनी
सदन झा इतिहासकार हैं, संवेदनशील लेखक हैं। अपने तरह के अनूठे गद्यकार हैं। कोरोना काल के अनुभवों को उन्होंने रचनात्मक…
मृणाल पाण्डे की कहानी ‘पिशाचों की पोथी और पंडित की कथा’
प्रसिद्ध लेखिका मृणाल पाण्डे आजकल बच्चों को न सुनाने लायक बालकथाएँ लिख रही हैं। यह पाँचवीं कड़ी है। इस बार…
भोपाल क्यों याद करे काॅमेडियन जगदीप को?
प्रसिद्ध अभिनेता जगदीप के निधन पर श्रद्धांजलि देते हुए यह लेख लिखा है अजय बोकिल ने। वे ‘सुबह सवेरे’ अख़बार…



