जब से ‘राज़ी’ फिल्म आई है इसकी चर्चा थम नहीं रही है. मेघना गुलजार की इस फिल्म को आलिया भट्ट…
वंदना राग की कहानी ‘अम्मा की डायरी’
आज मदर्स डे है. समकालीन दौर की सबसे संवेदनशील कथाकार वंदना राग की यह कहानी पढ़िए. पढ़ते पढ़ते मुझे अपनी…
थियेटर ओलंपिक्स: मंजरी श्रीवास्तव का पुनरावलोकन
आठवें थियेटर ओलंपिक्स के समाप्त हुए एक महीने से ऊपर समय बीत चुका है. लेकिन इक्यावन दिन चले इस…
सियासत की धुन पर मोहब्बत का फ़साना ‘हसीनाबाद’
गीताश्री के पहले उपन्यास ‘हसीनाबाद’ ने इस साल पाठकों-समीक्षकों-आलोचकों का ध्यान अच्छी तरह खींचा. इस उपन्यास की यह समीक्षा…
मुल्क तो बंटा, लोग भी बंट गये। वो एक लोग थे। अब दो लोग हो गये।
गुलजार साहब ने उर्दू में एक उपन्यास लिखा. पहले वह अंग्रेजी में प्रकाशित हुआ ‘टू’ नाम से. कुछ महीने बाद…
माइक्रोसोफ्ट के सीईओ की किताब ‘हिट रिफ्रेश’ का एक अंश
पिछले साल एक ऐसी किताब का अनुवाद किया जिससे बहुत कुछ सीखा. वह किताब है माइक्रोसोफ्ट कंपनी के भारतीय सीईओ…
स्त्री विमर्श की नई बयानी की कहानी ‘लेडिज सर्किल’
हिंदी के स्त्रीवादी लेखन से एक पाठक के रूप में मेरी एक शिकायत है कि अब यह बहुत प्रेडिक्टेबल हो…
मिथिला से रवीन्द्रनाथ टैगोर के आत्मीय रिश्ते थे
आज रवीन्द्रनाथ टैगोर की जयंती थी. उनके जीवन-लेखन से जुड़े अनेक पहलुओं की चर्चा होती है, उनपर शोध होते रहे हैं.…
अंग्रेजी कवि संजीब कुमार बैश्य की कविताएँ हिंदी अनुवाद में
संजीब कुमार बैश्य दिल्ली विश्वविद्यालय के जाकिर हुसैन दिल्ली कॉलेज(सांध्य) में अंग्रेजी के प्राध्यापक है. असम के रहने वाले…
पत्रकारों की सुरक्षा की चिंता किसे है?
ईयू-एशिया न्यूज़ के नई दिल्ली संपादक पुष्प रंजन जी को पढना बहुत ज्ञानवर्धक होता है. हिंदी अखबारों में ऐसे लेख…



