फ़िल्म डायरेक्टर विशाल भारद्वाज की कविता

विशाल भारद्वाज निर्देशित फ़िल्म ‘रंगून’ हाल में रिलीज़ हुई और बहुत चर्चा में है। जानकीपुल पर भी कई रिव्यू पढ़ा…

शम्भुनाथ सिंह का गीत ‘मुझको क्या क्या नहीं मिला’

नई कविता की तर्ज़ पर नवगीत आन्दोलन चला था. जिसके सूत्रधार थे शम्भुनाथ सिंह. इन्होने तीन खण्डों में नवगीत दशक…

प्रेम की नहीं देशप्रेम की फिल्म है ‘रंगून’

सिनेमा पर लिखता नहीं हूँ लेकिन रिव्यू पढ़कर सिनेमा देखता जरूर हूँ. ‘रंगून’ देखने के बाद यह महसूस हुआ कि रिव्यू…

ओम प्रकाश आदित्य की कविता ‘इधर भी गधे हैं’

यूपी चुनाव और गधा विमर्श में ओम प्रकाश आदित्य की यह कविता भी पढियेगा- मॉडरेटर ============================================= इधर भी गधे हैं,…

हम सब भी इंसान रूप में कुछ-कुछ गधे ही हैं

सदन झा इतिहासकार हैं. आधुनिक इतिहास के गहरे अध्येता, सिम्बल्स को लेकर बहुत अच्छा काम कर चुके हैं. यूपी के…

‘एक गधे की आत्मकथा’ के चुनिन्दा अंश

1950 के दशक के आखिरी वर्षों में उर्दू के मशहूर लेखक कृशन चंदर का उपन्यास आया था ‘एक गधे की…

अज्ञेय की पहली जीवनी अंग्रेजी में लिखी जा रही है

कल एक कार्यक्रम में बोलते हुए अंग्रेजी के विद्वान् लेखक रामचंद्र गुहा ने यह बताया कि अज्ञेय की जीवनी लिखी…

क्या ‘रंगून’ कंगना की सबसे यादगार फिल्म होगी?

‘रंगून’ फिल्म या तो हंटरवाली नाडिया जैसे किरदार के कारण चर्चा में है या कंगना रानाउत के कारण. फिल्म के…

निर्मल वर्मा के शब्दों में देशप्रेम का मतलब

आजकल ‘देशप्रेम’ की चर्चा चरम पर जिसके बल हर तरह की हिंसा को जायज ठहराने की कोशिश की जाने लगी…

प्रियंका वाघेला की कुछ कविताएँ

मेरे जीमेल अकाउंट में अनजान पतों से आई रचनाओं में छत्तीसगढ़ की प्रियंका वाघेला की कविताओं पर नजर गई. प्रियंका वाघेला, चित्रकार…

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Jankipul : A Bridge of World's Literature एक नयी शुरुआत! मेरा कॉलम #Jankipul के लिए " जनहित में जारी सब पर भारी" आपकी टिप्पणी की अपेक्षा रहेगी