आज से ‘हिंदी महोत्सव’ की शुरुआत हो रही है. दिल्ली विश्वविद्यालय के आई.पी. कॉलेज और वाणी फाउंडेशन के संयुक्त तत्वाधान…
चेखव की कहानी ‘मामूली मजाक’ श्री श्री की आवाज में
‘आधुनिक कहानियों के जनक’ कहे जाने वाले चेखव अपने ‘ ‘इम्प्रेशनिस्ट स्टाइल’ के लिए जाने जाते हैं। इसीलिए पाठक शीघ्र…
जहाँ फ़नकार को हर तरह की आज़ादी हो जहाँ हर एक को हासिल ख़ुशी बुनियादी हो
दिल्ली विश्वविद्यालय में विचारधाराओं की जंग के कारण माहौल बिगड़ रहा है, दूषित होता जा रहा है. इस माहौल में…
रोहित वेमुला की डायरी में एबीवीपी का ज़िक्र
हैदराबाद विश्वविद्यालय के छात्र रोहित वेमुला ने आत्महत्या कर ली थी. आत्महत्या के बाद से वह एक तरह से प्रतीक…
औरत ने जनम दिया मर्दों को मर्दों ने उसे बाज़ार दिया
साहिर लुधियानवी का लिखा हुआ यह गीत यूँ तो 1958 में रिलीज़ हुई फ़िल्म ‘साधना’ के लिए इस्तेमाल किया गया…
क्या होता अगर वह स्त्री न होकर पुरुष होती?
एक तरफ स्त्री आजादी की बात की जाती है दूसरी तरफ यह है कि आज भी कोई औरत अगर बोलती…
नज़ीर बनारसी की नज़्म ‘फ़िरक़ापरस्ती का चैलेन्ज’
आज के माहौल में नजीर बनारसी का यह कलाम याद आ गया- मॉडरेटर =================================== ताक़त हो किसी में तो मिटाए…
‘रंगून’ फिल्म नहीं एक अतुकांत कविता है
सोशल मीडिया के वर्चस्व के इस दौर में हम जजमेंटल होने की जल्दबाजी में रहते हैं. एक वाक्य में फैसला…
देशप्रेम ब्लडी हेल! ‘रंगून’ में प्रेम है प्रेम!
‘रंगून’ फिल्म जब से आई है तब से उसको लेकर कई तरह की व्याख्याएं हो रही हैं. आज मुश्किल यह…
मृणाल पाण्डे का अथ वणिक रत्नसेन प्रबंध-4
यह जानकी पुल के लिए गौरव की बात है कि प्रसिद्ध लेखिका मृणाल पाण्डे एक कथा-श्रृंखला लिख रही हैं जो…



